नगर निगम बार्ड संख्या -34 के वादे, दावे और हकीकत, आइये जानते हैं क्षेत्र के पार्षद राजेश कठेरिया से एक साक्षात्कार द्वारा

आगरा। एशिया की सबसे बड़ी 786 एकड़ क्षेत्र में फैली आवसीय कॉलोनी आज पानी, बिजली, सड़क व सफाई जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। कॉलोेनी में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए आवास विकास निगम की ओर से स्थापित चांर जोनल पम्पिंग सैट व छह पानी की टंकियों पर लगी मशीनरी (पम्प, मोटर आदि) अधिकारियों की मिलीभगत से गायब कर दिए गए, बदले में साल 2012  के बाद से क्षेत्रीय जनता को मिल रहा है दूषित पेयजल, जो पीने के योग्य ही नहीं है। ये पानी भी टंकियां बंद हो जाने के कारण यहां के वाशिंदों को टुल्लू पंप लगाकर पानी लेने को मजबूर होना पड़ता है। हैरानी की बात है कि जनता द्वारा निर्वाचित पार्षद से लेकर महापौर तक इस गायब मशीनरी (पम्प, मोटर आदि) पर मौन हैं।  नगर निगम सदन में कभी ये आवाज गूंजी, या नहीं गूंजी , न ही किसी अधिकारी ने इस पर ध्यान दिया। उल्टे जनता को पानी के नाम पर कुर्की की धमकी वाले नोटिस भेजे जा रहे हैं। ये अलग बात है कि वार्ड-34 के क्षेत्रीय पार्षद राजेश कठेरिय़ा दावा करते हैं कि उन्होंने पार्षद बनने के बाद से अब तक लगभग पौने पांच करोड़ रुपये की राशि के काम कराए हैं, 22 करोड़ की अवस्थापना मद से काम कराए हैं। हालांकि क्षेत्रीय जनता पार्षद के इन दावों को पूरी तरह झूठ का पुलिंदा बताते हुए कहते हैं कि पार्षद न तो जनता के लिए सुलभ हैं न ही समस्याओं को लेकर गंभीर हैं।

  • पार्षद कहते हैं – पौने पांच करोड़ के विकास कार्य कराए |
  • पानी की टंकियों से मोटर व पंप हो गए गायब , 2006 से हैं बंद पानी की टंकी |
  • गंदे पानी के एवज में जल संस्थान भेजा रहा है जनता को कुर्की की धमकी वाले नोटिस |
  • जनता पी रही है दूषित पानी|
  • जनता बोली नहीं मिलते पार्षद |क्या कहते हैं पार्षद- अपने पांच साल के कार्यकाल में उन्होंने अपने वार्ड में आने वाले सेक्टर एक से लेकर 12 तक (सेक्टर-4 नहीं) उन्होंने हर वार्ड में सड़कें, नालियों व पार्कों के सुंदरीकरण के काम कराए हैं। पार्षद को निगम फंड से सिर्फ हर साल बीस लाख रुपये मिलते हैं, लेकिन उन्होंने लगातार अपनी आवाज बुलंद कर पौने पांच करोड़ रुपये तक के काम कराए हैं। यही नहीं अवस्थापना मद की राशि से भी 22 करोड़ रुपये की राशि से क्षेत्र की सड़कों का निर्माण कराया है। सेक्टर 8 व सेक्टर-1 में कुछ काम लंबित हैं, ये काम भी जल्द शुरू हो जाएंगे। सबसे ज्यादा उपेक्षित सेक्टर-1 में काम कराना उनकी सबसे बड़ी कामयाबी है, क्योंकि यही सेक्टर सबसे ज्यादा समस्याओं से जूझ रहा है। वे अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट हैं। पार्टी ने अगर उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने की इजाजत दी तो फिर वे अपने काम के आधार पर जनता के बीच जाएंगे।

    बंद पड़ी टंकियों के संबंध में वे कई बार जल संस्थान को पत्र लिख चुके हैं। टंकियों के पंप व मोटर खुद जन संस्थान के कर्मचारियों ने ही गायब करा दिए गये , इसके लिए जलकल संस्थान की महाप्रबंधक मंजू गुप्ता पूरी तरह जिम्मेदार हैं, राज्य में सरकार बदली है, अब उनके हर भ्रष्टाचार का हिसाब होगा।

    क्या कहती है जनता

     

  • समाजसेवी राम भारद्वाज कहते हैं कि क्षेत्रीय पार्षद जनता की सेवा में लगातार तत्पर रहते हैं, यही वजह है कि उनके प्रयासों से क्षेत्र में लगभग पांच करोड़ रुपये के विकास के काम हुए। पार्षद राजेश कठेरिया ने कई पार्कों का निर्माण कराया है, क्षेत्रीय जनता को भी विकास कार्यों में सहयोग करना चाहिए, एक पार्क की सुंदरीकरण के बाद लोग पार्क की ग्रेल ही उखाड़ ले गए, एेसे में पार्षद के प्रयास कैसे सफल हो सकते हैं।

 

सेक्टर-11 बी निवासी मोहनलाल कहते हैं कि चुनाव जीतने के बाद पार्षद जनता के बीच आए ही नहीं, सेक्टर-11 की बंद    पड़ी स्ट्रीट लाइटों को लेकर वे कई बार पार्षद को फोन कर चुके हैं लेकिन न तो पार्षद आए न ही स्ट्रीट लाइट ठीक हुई।        करकुंज रोड का नाला तो कभी साफ ही नहीं हुआ। सफाई कर्मचारी तो क्षेत्र में कभी देखने को नहीं मिलता है।

 

 

सेक्टर-11 के ही निवासी सोनू चौहान का कहना है कि जिस तरह आवास विकास कॉलोनी में विकास के काम होने चाहिए, पार्षद राजेश कठेरिया इस मामले में पूरी तरह नकारा साबित हुए हैं, ये अलग बात है कि जब भी उन्होंने कभी किसी काम के लिए कहा है तो पार्षद उनके प्रभाव से काम कर देते हैं, लेकिन आम जनता के काम नहीं होते हैं।

 

टंकियां बनी शो पीस – आवास विकाश कोलोनी के अंदर 4 पप्मिंग स्टेशन और 6 पानी की टंकियां है जो लाखों रूपये में बनकर तैयार हुई थी जो कुछ साल चलकर बंद हो गई और पर इनमें पानी भरने वाली मोटर भी अब गायब हो गये | अब ये सभी टंकिया शो पीस बनी हुई है |

जनता का होता शोषण –

नगर निगम द्वारा पानी के नाम पर शोषण किया जा रहा है जैसे कि डायरेक्ट पानी की सप्लाई के कारण पानी घरों तक नहीं पहुंच पाता है इस कारण से आवास विकाश के नागरिकों बिजली से चलने वाली टिल्लू पम्प का उपयोग पानी ऊपर फैकने के लिए करते हैं इस कारण से बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है |पानी शुद्द एवं पीने योग्य न होने के कारण लोग आर ओ की बोतल वाला पानी पीनी को मजबूर हैं जी कर्ण आदमी को ३६०० रूपये प्रतिसाल के हिसाब से खर्च आता है |

क्या है क्षेत्र की हकीकत

पूर्व पार्षद एवं आप के जिला संयोजक कपिल वाजपेयी का कहना है कि पार्षद की हकीकत जाननी है तो नगर निगम के एजेंडे का रिकार्ड चेक करा लें, पार्षद ने क्षेत्र के विकास का कोई प्रस्ताव एजेंडे में शामिल ही नहीं कराया, नगर निगम सदन में वे कभी बोले ही नहीं, अगर वे जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर होते तो पानी और सूखी टंकियों को लेकर क्यों आवाज बुलंद नहीं की, और तो और चलते हुए पम्पिंग स्टेशन से मोटर व पम्प गायब हो गये क्यों नहीं ? वे आज तक गायब करने वालों के खिलाफ एफआईआर करा पाए। एक टंकी पर तो महापौर का कैंप अॉफिस बन गया, लेकिन क्यों नहीं पार्षद ने कभी महापौर से पूछा उनके कैंप ऑफिस वाली टंकी की मोटर व पंप कहां गए और क्यों बंद है । वे जनता के बीच गए ही नहीं, सदन में बोले ही नहीं तो क्षेत्र के विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है। दो बड़़े काम हो रहे हैं सड़कों की मरम्मत व सेन्ट्रल पार्क में सुंदरीकरण का काम, ये दोनों बड़े काम विधानसभा चुनाव से पूर्व कुंदनिका शर्मा के प्रयासों से शुरू हुए थे।

 

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