श्रीदेवी का जीवन ऐसी कविता है, जिसके आखिरी अंतरे तो लिखे ही नहीं गए

मुंबई. कुछ वर्ष पूर्व श्रीदेवी ने अपने श्वसुर सुरेंद्र कपूर का 75वां जन्मदिन चेन्नई के अपने बंगले में मनाया। सुबह हवन किया गया। रात में दावत दी गई। उस दावत में रजनीकांत और कमल हासन मेजबान की तरह व्यवहार कर रहे थे। हर अतिथि से जाकर पूछते थे कि आपके लिए कोई चीज लाई जाए क्या? बल्कि ट्रे में ड्रिंक्स लेकर मेहमानों की खातिरदारी कर रहे थे। दो सुपर सितारों का यह व्यवहार ही स्पष्ट कर रहा था कि उनके हृदय में श्रीदेवी के लिए कितना गहरा स्नेह है। चेन्नई स्थित उस बंगले की छत पर एक कांच की दीवार और कांच की छत वाला कमरा है। उसमें बैठकर व्यक्ति आकाश में टिमटिमाते सितारों को देख सकता है। वर्षा में बिना भीगे आप फुहारों को अपनी आत्मा में महसूस कर सकते हैं। इस तरह से सितारों की रोशनी श्रीदेवी की आत्मा का ताप बन गई और वर्षा की फुहारों ने उनके मादक जिस्म को धार दे दी।

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