हिन्दी पखवाड़ा पर हुआ कवि सम्मेलन का आयोजन

आगरा। देवरी रोड स्थित मधु वाटिका में सम्वर्धन जन कल्याण एंव शिक्षा विकास समिति के सौजन्य से हिन्दी दिवस के अवसर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने भाग लिया।
कवि ओमपाल सिंह निडर ने अपनी कविताओं के माध्यम से बताया कि ….भारत में रहना है तो भारत से प्यार करो, नहीं तो इस भारत से मुख मोड़ जाइए… जिनकों नहीं है प्यारी भारत माता भारती, ऐसे लोग शीघ्र ये देश छोड़ जाइए। कवि पदम अलवेला ने बताया कि सज धज के गोरी चली लेकर हरि का नाम
आशा की थी राम की.. मिल गए आशाराम। कवि शिवसागर ने ताजमहल पर बताया कि आलिंगन को व्याकुल हैं चारों मीनारें ताज की.. दो बाहें शाहजहां की है, दो बहियां है मुमताज की। सम्मेलन की अध्यक्षता मुकेश श्रौत्रिय ने की। मंच का संचालन डा. अंगद सिंह धारिया ने किया। डा. धारिया ने बताया कि हम हिन्दी है। हिन्दी हमारी मातृ भाषा है। राष्ट्र भाषा हिन्दी होनी चाहिए। यदि हिन्दी न होती तो सभ्यता संस्कृति हमें स्वप्न के जैसी ही लगती।
इसके साथ एक जुट हुए कवियों ने प्रदेश में ब्रज भाषा अकादमी
बनाने की बात कही है। सम्मेलन में कवि सुरेश चौहान नीरव, मंजुल मंयक, ग्याप्रसाद मौर्य रजत, मनोज बैचेन, मनोज चौहान, डा. मुक्ता सिकरवार, प्रो. शशि मिश्रा, गुजरात से आयीं शोभना ऋतु , बिहार के आरा से आयीं ममता दीप आदित्य ने अपनी कविताओं से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। वहीं सम्मेलन में समिति के संरक्षक पुरूषोत्तम फौजदार, अध्यक्ष डा. अंगद सिंह धारिया और सचिव डा. प्रताप मेहरा और नबाव सिंह मौर्य ने सभी कवियों और कवित्रियों का फूल मालाओं और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
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