कोहिनूर पर भारत का दावा अब और मजबूत

दुनिया में हर चीज़ की एक कीमत होती है . लेकिन एक चीज़ ऐसी भी है जिसकी आज तक कोई कीमत नहीं लगा पाया. ये एक हीरा है… जिसका नाम है कोहिनूर . कोहिनूर फारसी भाषा का एक शब्द है जिसका मतलब है… रोशनी का पहाड़ . कोहिनूर… भारत की एक खादान से निकला था… ये हीरा भारत का ही है लेकिन करीब 160 वर्षों से ये हीरा ब्रिटेन की महारानी के ताज में चमक रहा है . इससे पहले ये हीरा पंजाब के महाराजा दलीप सिंह के पास था . इस सवाल पर हमेशा विवाद रहा है कि महाराजा दलीप सिंह ने ब्रिटेन की महारानी को ये हीरा Gift किया था या फिर अंग्रेज़ों से हारने के बाद उन्हें ये हीरा ब्रिटेन की महारानी के सामने Surrender करना पड़ा था ?

इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए एक RTI दाखिल की गई थी और इसके जवाब में भारत सरकार ने कहा है कि अंग्रेज़ों से हारने के बाद महाराजा दलीप सिंह को मजबूरी में ये हीरा अंग्रेज़ों को देना पड़ा था . आप ये भी कह सकते हैं कि भारत ने ब्रिटेन को कोहिनूर हीरा, Gift नहीं किया था बल्कि ब्रिटेन ने भारत से ये हीरा छीन लिया था . आप सोच रहे होंगे कि इन सवालों का अब कोई मतलब नहीं है क्योंकि इस घटना को 170 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन भारत सरकार का जवाब बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अब कोहिनूर हीरे पर भारत का दावा और मजबूत हो गया है .

अगर पंजाब के महाराज दलीप सिंह ने ये हीरा ब्रिटेन की महारानी को उपहार में दिया होता तो भारत का आज इस हीरे पर कोई दावा नहीं होता क्योंकि उपहार में दी गई चीज़ पर दावा नहीं किया जाता. लेकिन अब भारत, ब्रिटेन के सामने कोहिनूर हीरे पर और मजबूती से दावा कर सकता है . भारत के अलावा, पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान भी कोहिनूर पर अपना दावा कर चुके हैं . लेकिन कोहिनूर सिर्फ भारत का है क्योंकि ये भारत के राज्य आंध्र प्रदेश में मौजूद कुल्लूर की खान से निकला था .

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