नशे के खिलाफ एक मुहिम, नशा एक जहर है , इसे न करें ?

नशा नाश करे, जीना दुष्वार करे। जिन्दगी जियो भरपूर, नशे से रहो सदा दूर। 
जैसा कि आप जानते हैं कि शराब पीने से लोगों की जान चली जाती है फिर भी लोग मानते नहीं हैं शराब से कई घर बर्बाद हो चुके हैं। शराब की जागरूकता के लिए कई सामाजिक संस्थाएं काम करती हैं वहीं प्रत्येक राज्य में सरकारी संस्थाएं भी कार्य करती हैं सरकारी संस्थाओं में नशे के विरूद्ध जागरूकता के लिए विभाग भी है। जो समय-समय पर नशे से होने होने वाले नुकसान के लिए जागरूक करने का काम करता है। ऐसा ही एक विभाग है मद्य निषेध। इस विभाग के पास नशे एवं अन्य मादक पदार्थो के विरूद्ध  जागरूकता का काम करना है। नशे की जागरूकता के विषय पर आगरा में तैनात मद्य निषेध विभाग के आगरा मण्डल आगरा के क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी रामसेवक यादव से एक मुलाकात जानते हैं कि निषेध विभाग नशे के विरुद्ध जागरूकता करते हुए कितना कामयाब हुआ है।
यादव जी आप यह बताइए आपका विभाग क्या क्या कार्य करता है?
हमारा विभाग नशे के विरुद्ध जागरूक करने का कार्यक्रम चलाता है जो मलिन बस्तियां होती हैं या फिर सरकारी स्कूल होते हैं वहां पर हम जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं और लोगों को नशे एवं अन्य मादक पदार्थों को सेवन न करने की सलाह देते हैं।
आप के अधिकतर कार्यक्रम किस- किस जगह पर होते हैं?
जैसा कि मैंने बताया कि मद्य निषेध के लिए जागरूकता का कार्यक्रम करते हैं। हम ग्रामीण एवं शहरी स्कूलों में 20  मिनट से  45 मिनट की एक शॉर्ट र्डोक्युमेंटरी फिल्म के माध्यम से अपनी भावी पीढ़ी को जागरूक करते हैं और उन्हें खेल- खेल में यह बताते हैं कि नश स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक है। हम वहां पर बच्चों को पुरस्कार स्वरूप कुछ गिफ्ट और एक प्रशस्ति पत्र भी देते हैं ताकि वह याद रहे कि यह प्रशस्ति पत्र हमें उस कार्यक्रम में मिला था।
अब तक आपने कितने स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम किये हैं ?
जून 2018 आगरा में मेरी पोस्टिंग हुई। मेरे क्षेत्र में 15 जिले आते हैं। 15 जिलों के प्रत्येक जिले में एक जिला मद्य निषेध अधिकारी है। उनको साथ लेकर प्रत्येक जिले में हम नशे के आदी लोगों को जागरूक करने का काम करते है लेकिन विभाग में कर्मचारियों की संख्या कम है। यहां मैं यह भी बता दूं कि हमारा मुख्य कार्यालय लखनऊ में है एवं पूरे उत्तर प्रदेश में 7 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में 60 से 65 कर्मचारी काम करते हैं। इतने बड़े उत्तर प्रदेश में नशे एवं अन्य मादक पदार्थों के विरुद्ध जागरूक करना बहुत कठिन कार्य है लेकिन फिर भी हम कोशिश करते हैं कि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा सके।
क्या विभाग में कुछ ऐसे कार्यक्रम  शुरू कर दिए हैं जो सोसायटी पर असर कारक है?
विभाग के पास स्लोगन की संख्या  20 से लेकर 28 के पास है उन स्लोगन्स के माध्यम से समाज में नशे एवं अन्य मद्याक पदार्थो से होने वाली कुरीतियों के बारे में बताते हैं। हम उन स्लोगन्स को सार्वजनिक स्थान पर जहां पर लोगों को आना जाना है वहां पर उन्हें वॉल पेंटिंग करवाते हैं हमने जैसे तहसीलों में जिला कार्यालयों में अस्पतालों में ऐसे स्लोगन्स लिखवाए दूसरा आवश्यकता पडऩे पर हमने होर्डिंग भी  लगवाएं हुए हैं जिनका साइज 10 & 8 के आसपास है।
क्या कोई स्पेशल थीम है क्या प्रचार के लिए?
जी हां हमारे पास एक थीम है रोटी  उस में दिखाया गया है एक बाप मजदूरी करने के बाद जब घर आता है तो बच्चे उसके लिए उतनी ही रोटी बनाते हैं जिनके पिता एवं परिवार की भूख होती है तो सभी लोग मिल बांटकर के उसका भोजन कर लेते और अपना भरण-पोषण कर लेते हैं । जब वो पिता एक दिन शराब पीकर के घर आता है तो वह अधिक रोटी खाता है तो एक दूसरे की हिस्से की भी रोटी खा जाता है इसलिए उस परिवार के बच्चे कोई न कोई सदस्य भूखा रह जाता है इस दिन को हम परिवारिक इमोशनल से टच करते हैं ताकि समाज में यह संदेश जाए एक पिता ए समझे कहीं मेरे बच्चे  तो भूखे नहीं रह गए ।
क्या किसी सामाजिक संस्था के साथ मिलकर काम करते हैं ?
जी हां हमारे यहां वैसे तो रिहेवलेसेन्टर सेंटर हैं जिसमें हम व्यवहारिक ज्ञान सिखाते हैं लेकिन हमारे साथ एक सेंटर इटावा में कार्यरत है वहां पर नशे के आदी लोग को रखा जाता है उनको नश छुड़वाने के बारे में बताया जाता है उनको संस्कार सिखाए जाते हैं और यह बताया जाता है कि सोचो  आप  यहां आप क्यों है? क्योंकि आपने अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभाई आपने ड्रिंक की अर्थात आपके  परिवार की स्थिति खराब होने जा रही है।
आपने अब तक कितने लोगो की शराब छुड़ाई है?
ऐसा हमारे पास कोई आंकड़ा नहीं है। हम यह तो बता सकते हैं कि हमने कितनी जगह जागरूकता के कार्यक्रम किया हैं लेकिन यह नहीं बता सकते कि कितने लोगों ने शराब छोड़ दिया है।
शहर में कई स्थानों पर नशा मुक्ति कार्यालय खुले हैं क्या यह कानूनी तरीके से वैध है ?
नहीं यह कानूनी तरीके से वैध नहीं क्योंकि नशा मुक्ति केंद्र खोलने के लिए एक आपके पास एक चिकित्सालय का होना चाहिए साथ में एक आपके पास डॉक्टर होना चाहिए तब विभागीय परमिशन मिलने के बाद कोई भी व्यक्ति नशा मुक्ति ग्रह चला सकता है मेरी अभी जानकारी में है। जितने भी पूरे मंडल में यह नशा मुक्ति केंद्र खुल रहे हैं इनके विरूद्ध  टीम बनाकर इनकी जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि कौन सही  जो गलत पाए जाएंगे तो उनके विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अपराध पंजीकृत कराया जाएगा। आज की वर्तमान युवा पीढ़ी में नशाखोरी की बढ़ती समस्या देश की तरक्की में बाधक है इस नशाखोरी का अंत करना अति आवश्यक है।
आपने किसी शराबी के खिलाफ आपराधिक अपराध पंजीकृत कराया है ? 
नहीं क्योकि हमारे पास ऐसे कोई कानूनी अधिकार नहीं है हम कानूनी कार्यवाही में पुलिस का सहयोग लेते हैं । अगर कोई नशे का आदी व्यक्ति शराब पीकर ऊधम  मचाता है तो पुलिस उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करती है।
डॉ मनीष मिश्र, वीरेंद्र चौधरी 

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