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दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलें, भवन बनाते समय वास्तु का ध्यान दें

इलाहाबाद -संध्या काल मे किसी भवन का निर्माण नहीं करना चाहिए। गार्डर एवं बीम के नीचे नहीं बैठना चाहिए। बीम के नीचे बैठना आयु को क्षीण करना एवं अशुभ माना जाता है। इसके चलते कार्य मे रुकावट पैदा होती है। बीम के नीचे बैठने वाले तनावग्रस्त रहते हैं। मनुष्य  ठीक से कार्य नहीं कर सकता।
वास्तु के हिसाब से भवन निर्माता को द्वार वेध का विशेष  ध्यान रखना चाहिए। द्वार वेध का ध्यान न रखने से भयंकर परिणाम देखने को मिलते हैं। मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़-पौधे, खंभा, खाई, कुआं, मंदिर की छाया, पीपल की छाया, इस प्रकार की बाधाएं नहीं होनी चाहिए। यह भी विशेष  ध्यान रखने योग्य है कि मुख्य द्वार खोलते या बंद करते समय किसी प्रकार की भी अप्रिय आवाज नहीं होनी चाहिए। मुख्य द्वार यदि सही है, तो घर मे सुख, सौभाग्य, मंगल, ऋद्धि-सिद्धि की वृद्धि होती है, घर फलता-फूलता है और वंश वृद्धि होती है।

अश्ट दिशाओं मे ईशान सबसे महत्वपूर्ण है। ईशान  मे वास्तु संबंधी त्रुटियां हों, तो उस उद्योग-कारखानों का विकास नहीं होता। यह ध्यान मे रखना चाहिए कि कारखाना, उद्योग, दुकान, होटल का ईशान कोण कभी भी अन्य दीवारों से ऊंचा नहीं होना चाहिए। कारखाने के ईशान कोण को छोड़ कर अन्य किसी भी दिशा  मे कुएं अथवा गड्ढे हों, तो उस गृह स्वामी को दुश्परिणामों का शिकार होना ही पड़ेगा।
ईशान दिशा  मे कोई भी त्रुटि, दरार हो, तो गृह स्वामी, उद्योगपति कीी संतान विकलांग होती है। ईषान कोण मे यदि षौचालय हो, तो गृह कलह एवं धन का नाश  होता है। ईशान कोण मे रसोई घर नहीं बनाना चाहिए, वरना निरंतर गृह कलह और धन का क्षय होता है।

ईशान कोण मे कूड़े-कचरे का ढेर, कबाड़ बिल्कुल न रखें, अन्यथा भूस्वामी के लिए शत्रुता, आयु क्षीणता, दुष्चरित्रता उत्पन्न होगी।
वास्तु शास्त्र के नियमों के हिसाब से ईशान मे झाड़ू तक नहीं रखनी चाहिए, अन्यथा वहां स्थाई दरिद्रता का निवास हो जाएगा।
भूखंड खरीदने के पूर्व वास्तु नियमों के अनुसार भूमि की परीक्षा एवं भूखंड की आकृति और कोणों की जांच किसी विद्वान वास्तुविज्ञ से करानी चाहिए। भवन बनाने से पूर्व भूमि जाग्रत कर शुभ मुहूर्त पूजन, नींव पूजन अवष्य करना चाहिए भवन पूरा बन जाने के बाद उसकी विधिवत प्रतिश्ठा, वास्तु पूजा, गायत्री जाप, गणपति पूजा, रुद्र जाप, विश्णु पूजा, नव ग्रह पूजा, ग्रह शाति, हवन के साथ ब्राम्हण भोजन दक्षिणापूर्वक कराना चाहिए। भवन की लागत का दशांस  प्रतिश्ठा मे खर्च करना चाहिए।
हमेशा  घर ऐसा बनाना चाहिए कि उसमे रहने वाले लोगों को अधिकतम प्राकृतिक प्रकाश , स्वच्छ वायु मिल सकें। प्रातःकालीन सूर्य की किरणों का लाभ रहने वालों को अवष्य मिलता रहे।
*दांपत्य सुख के लिए दक्षिण-पष्चिम, दक्षिण दिशा का कमरा ही उत्तम रहता है।

दक्षिण-पूर्व के शयन कक्ष मे सोने से, ‘अग्नि कोण’ के कारण विचार वैमनस्य होने से, मनचाहे समय पर मनचाही संतान की प्राप्ति नहीं हो पाती।
जिनके घर मे संतान नहीं हो रही है, वे लोग संतान गणपति की विषिश्ट प्रतिमा अपने द्वार पर लगायें। पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा के साथ गणपति का पूजन शुभ मुहूर्त मे कर के उन्हें घर मे स्थापित करने पर व्यक्ति के घर मे एक वर्ष  के भीतर संतान हो जाती है।
यदि किसी गृहपति के ग्रह-नक्षत्र उच्च स्तर के, अनुकूल हैं, तो वास्तु दोष  उसे उतनी हानि नहीं पहूँचाता, क्योंकि ज्योतिश का प्रभाव उसे संतुलित कर देता है।
निवास स्थान मे षांति के लिए हर अमावस्या को दही-चावल का भोग बना कर नदी के बहते पानी मे छोड़ना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो सायं काल गृह देवता के पास श्रीफल फोड़ना चाहिए। यह दैविक उपाय अत्यंत लाभकारी है।
घर मे रहने वालों को मानसिक शाति रहे, इसके लिए निम्नलिखित जप नित्य नियम से, जितने समय हो सके, करते रहें। जप संख्या एक लाख होने के बाद यह मंत्र सिद्ध होता है। इसके जाप से घर और परिवार मे चिरकाल तक शान्ति प्रस्थापित होती है।
ऊँ श्री षान्तिसागराय नमः। ऊँ श्री सुदाताय नमः। ऊँ श्री विघ्नहर्ताय नमः। ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।
राम रक्षा मंत्र की भी नित्य नियम से पूजा करने पर किसी प्रकार की बाधा नहीं होती।
वास्तु शास्त्र के महत्व को आधुनिक युग मे मनुष्य  को अवष्य समझना चाहिए। इनका पालन करना दांपत्य सुख और मनचाही संतान प्राप्ति में आशर्यजनक रूप से सहायक होता है।

मकान बनवाते समय मकान की नींच मे प्राण प्रतिश्ठित ‘श्री यंत्र’ स्थापित कर दिया जाए, तो उस घर मे साक्षात् लक्ष्मी का वास हो जाता है। मंगलमय वातावरण बनाए रखने के लिए घर के बाहर दो, चार या छह की संख्या मे अशोक वृक्ष लगवाएं।
मकान के दरवाजे की चौखट पर मंत्र सिद्ध घोड़े की नाल लगानी चाहिए। इससे दुर्भाग्य प्रवेश  नहीं करता। उस घर पर जादू-टोना, बुरी नजर का प्रभाव नही होता।
इन उपायों से मकान सुरक्षित रहता है तथा परिवार के सदस्यों पर किसी प्रकार का अनिश्ट प्रभाव नहीं होता| अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें –

  • विजय मल्होत्रा इलाहाबाद 
  • मोबाइल न० -7755819460

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