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केरल नहीं देखा तो कुछ भी नहीं देखा ,घूमने के लिए हैं रमणीय स्थान

सुनहरे समुद्र तट, हरे बैकवाटर, ऊँची पर्वतश्रंखला, शानदार कला… आपके पास जितने विकल्प होंगे उतने ही आश्चर्य केरल में आपके इंतज़ार में होंगे। आइए और अपने साथ ऐसी ‘यादें’ ले जाइए, ऐसी यादें जो आपकी ज़िंदगी को जीने लायक बनाएँगी।

केरल में हों तो बस घूमते रहिए। सुस्त बैकवाटर से अपने दिन की शुरुआत कीजिए और गांव के लोक गीतों को दिल से महसूस कीजिए। जंगलों के आह्वान से अपने भीतर के रोमांच को जगने दें। नहाते हाथियों को देखें। सुदूर त्योहारों को जानें जो आपके दिलोदिमाग पर अमिट छाप छोड़ेंगे।

केरल की खूबसूरती वादियां कपल्स के लिए ही नहीं, फैमिली और फ्रेंड्स के साथ भी मस्ती के लिए है बेस्ट। चारों तरफ फैली हरियाली, समुद्र का शांत किनारा और दोपहर होते ही आकाश में शोर मचाते बादल, इन सबके बीच भला कौन ही छुट्टी बिताने आता होगा बल्कि उसे तो लोग एन्जॉय करने आते हैं।

उत्सव और त्यौहार-

केरलीय जीवन की छवि यहाँ मनाये जाने वाले उत्सवों में दिखाई देती है। केरल में अनेक उत्सव मनाये जाते हैं जो सामाजिक मेल-मिलाप और आदान-प्रदान की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। केरलीय कलाओं का विकास यहाँ मनाये जाने वाले उत्सवों पर आधारित है। इन उत्सवों में कई का संबन्ध देवालयों से है, अर्थात् ये धर्माश्रित हैं तो अन्य कई उत्सव धर्मनिरपेक्ष हैं। ओणम केरल का राज्योत्सव है। यहाँ मनाये जाने वाले प्रमुख हिन्दू त्योहार हैं – विषु, नवरात्रि, दीपावली, शिवरात्रि, तिरुवातिरा आदि। मुसलमान रमज़ान, बकरीद, मुहरम, मिलाद-ए-शरीफ आदि मनाते हैं तो ईसाई क्रिसमस, ईस्टर आदि। इसके अतिरिक्त हिन्दू, मुस्लिम और ईसाइयों के देवालयों में भी विभिन्न प्रकार के उत्सव भी मनाये जाते हैं।

कला व संस्कृति

केरल की कला-सांस्कृतिक परंपराएँ सदियों पुरानी हैं। केरल के सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कलारूपों में लोककलाओं, अनुष्ठान कलाओं और मंदिर कलाओं से लेकर आधुनिक कलारूपों तक की भूमिका उल्लेखनीय है। केरलीय कलाओं को सामान्यतः दो वर्गों में बाँट सकते हैं – एक दृश्य कला और दूसरी श्रव्य कला। दृश्य कला के अंतर्गत रंगकलाएँ, अनुष्ठान कलाएँ, चित्रकला और सिनेमा आते हैं।

पर्यटन

केरल प्रांत पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय है, इसीलिए इसे ‘God’s Own Country’ अर्थात् ‘ईश्वर का अपना घर’ नाम से पुकारा जाता है। यहाँ अनेक प्रकार के दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें प्रमुख हैं – पर्वतीय तराइयाँ, समुद्र तटीय क्षेत्र, अरण्य क्षेत्र, तीर्थाटन केन्द्र आदि। इन स्थानों पर देश-विदेश से असंख्य पर्यटक भ्रमणार्थ आते हैं। मून्नार, नेल्लियांपति, पोन्मुटि आदि पर्वतीय क्षेत्र, कोवलम, वर्कला, चेरायि आदि समुद्र तट, पेरियार, इरविकुळम आदि वन्य पशु केन्द्र, कोल्लम, अलप्पुष़ा, कोट्टयम, एरणाकुळम आदि झील प्रधान क्षेत्र (backwaters region) आदि पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण केन्द्र हैं। भारतीय चिकित्सा पद्धति – आयुर्वेद का भी पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य की आर्थिक व्यवस्था में भी पर्यटन ने निर्णयात्मक भूमिका निभाई है।

केरल के जिले- केरल में 14 जिले हैं:

  • कासरगोड जिला
  • कण्णूर जिला
  • वयनाड जिला
  • कोषि़क्कोड जिला (कालीकट)
  • मलप्पुरम जिला
  • पालक्काड जिला (पालघाट)
  • तृश्शूर जिला
  • एर्ण्णाकुल़म जिला
  • इड्डुक्कि जिला
  • कोट्टयम जिला
  • आलप्पुषा़ जिला
  • पत्तनंतिट्टा जिला
  • कोल्लम जिला
  • तिरुवनन्तपुरम जिला (त्रिवेन्द्रम)

 

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