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जानिए कौन है “जाटव”  शब्द के जन्मदाता और किस सन में मिला “जाटव ” शब्द , क्या है इनका परिचय

122 वीं जयंती पर विशेष 

जाटव शब्द के जन्मदाता दादा सहाब डॉक्टर मानिक चंद्र जाटव वीर का जन्म 11 नवंबर 1897 ई0 में आगरा में हुआ था। इनके पिता श्री भोलेनाथ जी एक महान समाज सुधारक थे। पिता में समाज सुधार की भावना के गुणों का प्रभाव दादा सहाब पर भी पड़ा। जिसके परिणाम स्वरूप दादा सहाब युवावस्था में ही समाज सेवा एवं समाज सुधार के कार्यों में जुट गये। दादा सहाब अत्यंत साहसी , स्वाभिमानी, व कार्यशील क्रांतिकारी समाज सुधारक थे। दादा सहाब जातिवाद के कट्टर विरोधी थे। दादा सहाब ने दलित समाज को शिक्षा के महत्व से परिचित कराते हुए उन्हें शिक्षित होकर स्वयं व समाज के सर्वागीय विकास में योगदान देने हेतु जागरूक किया । दादा साहब ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार तथा समाज में कुरीतियों को समाप्त करने हेतु 1937 में एमसी वीर इंस्टिट्यूट की स्थापना की।

  •  सन – 1937 में एमसी वीर इंस्टिट्यूट की स्थापना की|
  • 1943 में दादा साहेब को राय बहादुर की उपाधि से सम्मानित किया|
  • 1946 में दादा साहब को सत्याग्रह के आंदोलन में जेल की यात्रा करनी पड़ी|
  • भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को 10 मार्च 1946 में प्रथम बार आगरा में लाने वाले दादा सहाब मानिकचंद वीर ही थे|
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  • डॉ मानिक चंद जाटव वीर  को मिलने वाले पद एवं सम्मान
  • 1952 में भरतपुर-सवाई माधोपुर राजस्थान (एससी के लिए आरक्षित) से संसद सदस्य (कृषक लोक पार्टी)।
  • 1 डी व्यापारी, सदस्य, सेवा समिति, आगरा- 1912
  • सदस्य, आर्य कुमार सभा, आगरा- 1912
  • संस्थापक, श्री जाटव महासभा- 1917
  • सदस्य, आर्य मित्र सभा-  1915-18
  • प्रभारी, नगर अस्पताल, आगरा- 1918-28
  • संस्थापक, जाटव-वीर दल -1923
  • अध्यक्ष, यू.पी. अवसादग्रस्त वर्ग लीग
  • संस्थापक, “जीवन ज्योति” और “जाटव ग्रन्थमाला”, मासिक पत्रिकाएँ- 1934
  • एमएलए., यू.पी.- 1937-39
  • संस्थापक, जाटव-वीर संस्थान, आगरा- 1937
  • अध्यक्ष, जिला अनुसूचित जाति शिक्षा बोर्ड, आगरा- 1938-45।
  • सदस्य, यू.पी. प्रांतीय युद्ध बोर्ड- 1940-44
  • सदस्य, प्रांतीय नागरिक सुरक्षा समिति-1941
  • सदस्य, प्रांतीय पुनर्स्मरण बोर्ड, U.P., और प्रांतीय अनुसूचित जाति शिक्षा बोर्ड, U.P.-1943-45
  • मान्यता
  • 1943- वायसराय ने डिप्रेस्ड क्लासेस को सेवाओं के लिए एक पुरस्कार दिया|
  • 1945 में राव साहिब और फिर जागीर बने।

तत्पश्चात इस इंस्टिट्यूट के माध्यम से अनेक विद्यालयों तथा छात्रावासों की स्थापना की गई जिससे समाज के लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में और जागृत किया जा सके। दादा साहब को पीड़ितों की सेवा करने तथा समाज व राष्ट्र के प्रति पूर्ण निष्ठा की भावना से प्रभावित होकर तत्कालीन वायसराय ने 1943 में दादा साहेब को राय बहादुर की उपाधि से सम्मानित किया परंतु भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित शेड्यूल कास्ट फेडरेशन के आह्वान के कारण 1946 में दादा साहब को सत्याग्रह के आंदोलन में जेल की यात्रा करनी पड़ी। जिसके फलस्वरूप भारत के अन्य दलित नेताओं की तरह आपने भी राय बहादुर की उपाधि को वापस कर दिया। भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को 10 मार्च 1946 में प्रथम बार आगरा में लाने वाले दादा सहाब मानिकचंद वीर ही थे।

आज लोग शिक्षा के प्रति अपने मानव अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं वे समाज व राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझने की चेष्टा कर रहे हैं उसका सम्मान समाज सुधारक दादा सहाब मानिक चंद जाटव समाज के लिए त्याग और संघर्ष को ही जाता है। दादा सहाब ही समाज के ऐसे प्रथम नागरिक थे जिन्होंने दलितों के एक वर्ग को समाज में जाटव शब्द देकर समाज को गौरव प्रदान किया। शिक्षा के क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने हेतु दादा सहाब ने एमसी वीर इंस्टिट्यूट की स्थापना की।

इस संदर्भ में इतने वर्षों में कितनी सरकार बनी तथा दलितों की राजधानी कहा जाने वाला आगरा में विधायक तथा मंत्री सरकार में रहे तथा वर्तमान में किसी भी हैं, परन्तु किसी सांसद , विधायक ने इस इंस्टीट्यूट को इंटर कॉलेज तक की मानता दिलाना भी उचित नहीं समझा । यह अत्यंत विचारणीय बिषय है कि वर्तमान समय भी सरकार इस इंस्टिट्यूट को इंटर कॉलेज या डिग्री कॉलेज की मान्यता देना भी उचित नहीं समझ रही है। 1937 से यह इंस्टिट्यूट केवल जूनियर हाईस्कूल तक ही सीमित है जबकि देश में अनेक महापुरुषों के नाम पर देश में इंजीनियरिंग कॉलेज , मेडिकल कॉलेज बनाए गए परंतु जाटव शब्द के जन्मदाता दादा सहाब द्वारा स्थापित एमसी वीर को इंटर कॉलेज , डिग्री कॉलेज की मानता नहीं दी जा रही है अत्यंत शर्मनाक बात है ।

डॉ मुन्ना लाल भारतीय लेखक एवं समाज सुधारक

आज हमारे समाज व राष्ट्र को उन्नति के पथ पर अग्रसर करने के लिए वर्तमान पीढ़ी के युवा वर्ग को दादा सहाब जैसे महान समाज सुधारक की भावना तथा राष्ट्र के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा , भक्तिभाव की भावना से ओतप्रोत व्यतित्व की आवश्यकता है। वर्तमान एक सामाजिक संस्था डॉ मानिक चंद जाटव वीर शोंभायात्रा के नाम से हर वर्ष उनकी शोभायात्रा  निकालती है | एस वर्ष भी संस्था 11 नवम्बर को आगरा शहर में शोभायात्रा निकाली जायेगी |

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