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संयुक्त परिवार, जीवन का आधार, परिवार की एकता के लिए कौन सा तरीका अपनाये….

भारत विभिन्न संस्कति एवं संस्कारों वाला देश है| भारत देश में कुछ वर्ष पहले तक संयुक्त परिवार होते थे और सभी एक छत के नीचे जीवन यापन करते थे| संयुक्त परिवार में एक साथ खाना बनता था और सभी एक साथ बैठकर खाते थे उस समय लोगों को संयुक्त रिचाव्र में ही आनन्द आता था| बदलते परिवेश एवं बढती आर्थिक आजादी ने अधिकतर संयुक्त परिवारों को तोड़ दिया है| आज लोग एकल परिवार तो पसंद करते हैं लेकिन जब कोई परेशानी आती है तो वह भी अपने परिवार को याद करते हैं और सोचते हैं कि काश आज सब एक होते?

आज संयुक्त परिवार तो नहीं रहे लेकिन संयुक्त परिवार की यादें अवश्य हैं| आज भी हम संयुक्त परिवार का लुफ्त उठा सकते हैं बशर्ते हम अपने विचारों में बदलाब लायें|

अगर हमारे विचार उदारवादी हैं तो बेशक हम दूर – दूर रहें फिर भी संयुक्त परिवार का लुफ्त उठा सकते हैं|

प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो अथवा पुरूष अपने द्वारा अर्जित धन चाहे व्यापार, खेती-बाड़ी इत्यादि किसी भी साधन से कमाया गया हो, उस धन का कुछ अंश विश्वसनीय व्यक्ति को सौंप दे जो उस धन का व्यय बच्चों की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए समझदारी से खर्च करें। आइये, सभी परिवारजन मिलजुल कर प्रार्थना करें कि हमारे प्रत्येक कार्य-व्यवसाय रोजाना परमात्मा की सुन्दर प्रार्थना बने। हे ईश्वर, यह वर दे कि एकता की ज्योति सारी पृथ्वी पर छा जायें।

आपसी प्रेम ही परिवार को जोड़कर रखता है। इसके बिना दूसरी सभी बातों का कोई महत्व नहीं होता है। जिन परिवारों में प्रेम नहीं होता है, वहां एकता और सुख नहीं होता है।

यदि परिवार को एकजुट रखना है तो आपसी प्रेम के साथ ही यहां बताई जा रही बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।

  • परिवार में प्रेम बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी सदस्यों को अहं का भाव छोड़ देना चाहिए। खुद के सुख को महत्व न देते हुए सभी सदस्यों के सुख को ध्यान में रखना चाहिए।
  • जीवन साथी, बच्चों और घर के अन्य सदस्यों के लिए विश्वास अटूट होना चाहिए। जिस रिश्ते में विश्वास नहीं होगा, वह लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।
  •  परिवार के सदस्यों पर अधिकार जताएं, लेकिन अधिकार जताने का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए कि दूसरे सदस्य हमारे सामने डरे हुए दिखाई दे। यदि लंबे समय तक ऐसा डर रहेगा तो आपसी प्रेम धीरे-धीरे कम हो सकता है।
  •  परिवार में खुलापन होना चाहिए। सभी सदस्यों को सही और गलत बात बताने की आजादी होनी चाहिए।
  • किसी बात पर मतभेद हो तो परिवार के हित को महत्व देते हुए सभी मतभेद सुलझा लेना चाहिए।

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