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रेरा:नहीं हो रहा नियमों का पालन

जयेंद्र कुमार चौबे
चीफ ब्यूरो,वाराणसी

रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (The Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016) भारतीय संसद का एक अधिनियम है जो घरेलू खरीददारों की रक्षा करने के साथ-साथ स्थावर सम्पदा (रियल एस्टेट) में पूँजी निवेश को बढ़ावा देने में मदद करता है। यह अधिनियम राज्यसभा में १० मार्च २०१६ को तथा लोकसभा में १५ मार्च २०१६ को पारित हुआ था। इसकी ९२ में से ६९ धाराओं को लागू करते हुए इस अधिनियम को ०१ मई २०१६ से लागू कर दिया गया ।राज्य स्तर पर ‘रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण’ (RERA) के गठन का प्रावधान।

त्वरित न्यायाधिकरणों द्वारा विवादों का 60 दिन के भीतर समाधान। 500 वर्ग मीटर या 8 अपार्टमेंट तक की निर्माण योजनाओं को छोड़कर सभी निर्माण योजनाओं को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। ग्राहकों से ली गई 70 प्रतिशत धनराशि को अलग बैंक में रखने एवं उसका केवल निर्माण कार्य में प्रयोग का प्रावधान। परियोजना संबंधी जानकारी जैसे-प्रोजेक्ट का ले-आउट, स्वीकृति, ठेकेदार एवं प्रोजेक्ट की मियाद का विवरण खरीददार को अनिवार्यतः देने का प्रावधान। पूर्वसूचित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा न करने पर बिल्डर द्वारा उपभोक्ता को ब्याज के भुगतान का प्रावधान। यह उसी दर पर होगा जिस दर पर वह भुगतान में हुई चूक के लिए उपभोक्ता से ब्याज वसूलता।

रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना की स्थिति में बिल्डर के लिए 3 वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान एवं रियल एस्टेट एजेंट और उपभोक्ता के लिए 1 वर्ष की सजा का प्रावधान है परंतु आज के परिवेश में इसका कोई औचित्य नहीं रह गया है।
ग्राहकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है तथा इसके जो कस्टमर केयर नंबर हैं उस पर कोई कॉल भी रिसीव नहीं कर रहा है।यूपी सरकार ने यूपी रेरा को बहुत जोरों शोरों तरीकों से लागू किया आनन-फानन में इसकी वेबसाइट बनाई गई जिस पर आधी अधूरी जानकारी दी गई जो उत्तर प्रदेश में से बहुत सारे प्रोजेक्ट बिना रेरा की सहमति से चल रहे हैं। वाराणसी में हमने कई बिल्डरों से संपर्क किया तथा उनसे रेरा का विवरण पूछा उनमें से कई ने कहा कि उनको रेरा के बारे में जानकारी नहीं है ।कुछ बिल्डरों ने कहा कि उन्होंने आवेदन दे रखा है इस प्रकार बिल्डर ग्राहकों के हित से खिलवाड़ कर रहे हैं और यूपी सरकार सिर्फ ढिंढोरा पीट रही है। इसका निवारण न करने पर भविष्य में कोई प्लॉट या घर लेने पर ग्राहकों से शिकायतें मिल सकती है तथा आमजन को परेशानी झेलनी पड़ सकती हैं।सरकार को इस समस्या पर भी ध्यान देना चाहिए।

 

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