February 28, 2021
आगरा कारोबार ताजा नगर निगम

तोड़ने पड़ेंगे 200 मकान

  • नगर निगम की सक्रियता से घटवासन में खलबली
  • नगर निगम की सात हेक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से बने हैं ये मकान
  • लोगों का कहना है- उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कर बनाए हैं मकान
  • डीएम के आदेश के बाद नगर निगम कर रहा तोड़फोड़ की तैयारी, खौफ

प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में मौजा घटवासन में नगर निगम की सात हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जे होने के मामले में नगर निगम ने कार्यवाही की कसरत शुरू कर दी है। इससे वे लोग खौफजदां हो चुके हैं, जिनके मकान इस जमीन पर बने हुए हैं। लगभग डेढ़ सौ मकान और अपार्टमेंट्स में पचास से अधिक फ्लैट तथा दो मैरिज होम तोड़फोड़ की जद में आ गए हैं। यह मामला भी जॉन्स मिल संपत्ति की तरह प्रशासन और नगर निगम के गले की फांस बन सकता है क्योंकि यहां के लोग भी यही कह रहे हैं कि उनके पास वैध रजिस्ट्रियां हैं। उन्होंने जमीन खरीदकर मकान बनाए हैं। इन्हें किसी भी हालत में नहीं टूटने देंगे।

‘नये समीकरण’ ने 17 फरवरी के अंक में यह आशंका जताई थी कि क्या नगर निगम घटवासन क्षेत्र में कथित अवैध कब्जा कर बनाए गए मकानों को इतनी आसानी से हटा पाएगा। क्षेत्रीय पार्षद रवि शर्मा ने तो कल ही तेवर दिखा दिए थे कि वे अपने क्षेत्र के लोगों के साथ खड़े रहेंगे। पार्षद ने सवाल उठाए थे कि अगर यह जमीन नगर निगम की है तो निगम अफसर उस समय कहां थे जब इस पर कब्जे कर मकान बनाए जा रहे थे। पार्षद का यह भी कहना है कि घटवासन की जमीन पर जो भी मकान बने हुए हैं, उन सभी लोगों के पास रजिस्ट्रियां हैं। जमीन खरीदकर मकान बनाए हैं, इसलिए वे इन्हें उजड़ने नहीं देंगे।

घटवासन क्षेत्र में जिस जमीन का यह मामला है, वह कमला नगर से शुरू होकर बल्केश्वर की ओर है। प्रशासन द्वारा गठित कमेटी ने जांच में पाया था कि लगभग तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक कीमत की इस जमीन पर कब्जा कर मकान बनाए जा चुके हैं। जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह ने जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद नगर आयुक्त को जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए कहा है। नगर आयुक्त मातहतों के साथ बैठक कर जमीन मुक्त कराने की रणनीति बना रहे हैं। इसकी भनक लगने पर ही घटवासन क्षेत्र में हलचल शुरू हो गई है। अवैध कब्जे वाली घटवासन की सात हेक्टेयर जमीन में से अभी भी कुछ खाली पड़ी हुई है। शेष जमीन पर लगभग 200 मकान बन चुके हैं। इनमें लगभग डेढ़ सौ स्वतंत्र आवास हैं जबकि कुछ अपार्टमेंटस में पचास से अधिक फ्लैट बने हुए हैं। इन मकानों को तोड़ा जाता है तो 200 परिवार सड़क पर आ जाएंगे।

कैसे होती रहीं रजिस्ट्री, कैसे बनते रहे अवैध मकान
घटवासन की जमीन पर अवैध कब्जों की कहानी भी दूसरे इलाकों के अवैध कब्जों जैसी ही है। नगर निगम को तीन दश्क पहले से मालूम है कि ये जमीन उसकी है, फिर भी इस जमीन पर रजिस्ट्रियां होती रहीं। मकान बनते रहे और नगर निगम सोता रहा। क्या नगर निगम की ओर से रजिस्ट्री विभाग को लिखकर नहीं दिया जाना चाहिए था कि इस भूखंड पर किसी प्रकार की रजिस्ट्री न करे। जब अवैध मकान बन रहे थे, तब एडीए ने क्यों नहीं रोके? वे कौन लोग हैं जो नगर निगम की जमीन को बेचे जा रहे थे और संबंधित विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो घटवासन की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के अभियान के दौरान प्रशासन की मुसीबत बनेंगे। हालांकि यह भी सही है कि जमीन नगर निगम की है तो अवैध कब्जेधारियों को इसे खाली करना ही पड़ेगा।

विकास कार्य भी कराए नगर निगम ने
नगर निगम घटवासन में अपनी जिस सात हेक्टेयर जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की तैयारी कर रहा है, वहां के आबादी क्षेत्र में सड़क, नाली, खरंजा और स्ट्रीट लाइट जैसे काम भी नगर निगम ने ही कराए हैं। यह हास्यास्पद नहीं तो क्या है कि नगर निगम अपनी ही जमीन पर अवैध कब्जे वाली बस्ती में विकास कार्य भी कराता रहा।

तीसरे चित्र में तीन मंजिला अपार्टमेंट। यही निर्माण प्रशासन की जांच में नगर निगम की सात हेक्टेयर जमीन पर पाए गए हैं और अब जिन्हें तोड़ने की तैयारी है। फोटो-एनएस

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