March 3, 2021
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आगरा में भाजपा के तीन सांसद और नौ विधायक फिर भी खाली हाथ!

प्रदेश सरकार द्वारा घोषित बजट से ताजनगरी के वाशिंदों को निराशा हाथ लगी है। बजट में मेट्रो और स्मार्ट सिटी योजना को छोड़कर आगरा के लिए कोई अन्य विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। आगरा के उद्योग और पर्यटन इंडस्ट्री के लिए कोई सीधी मदद नहीं दी गई है। इसके कारण भाजपा की झोली में नौ सीटें देने वाली ताजनगरी के जूता व पर्यटन उद्यमियों में घनघोर निराशा है। वैसे यूपी के जिन दस जिलों में प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए जो राशि दी गई है, उसका लाभ आगरा को मिलेगा और इससे शहरी गरीब और ग्रामीणों को मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि आगरा लंबे समय से भाजपा का गढ़ रहा है। केंद्र में कांग्रेस की सरकार के वर्चस्व के समय में भी आगरा में भाजपा का परचम लहराता रहा है। वर्तमान में आगरा की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। अब प्रदेश व केंद्र में भाजपा की सरकार होने से शहरवासियों को आशा थी कि आगरा के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान किया जा सकता है। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए आगरा का ढलाई उद्योग दम तोड़ चुका है। लंबे समय से शहर में साफ्टवेयर पार्क की स्थापना की मांग की जा रही है। चुनावी वर्ष करीब होने के कारण आशा थी कि आगरा को शायद सॉफ्टवेयर पार्क की सौगात मिल जाए, जिससे शहर से हो रहा युवाओं का पलायन रुक सके।

आगरा का पर्यटन व्यवसाय कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आशा की जा रही थी कि बजट में ऐसा कोई प्रावधान किया जाएगा, जिससे लड़खड़ाते पर्यटन उद्योग को सहारा मिल सके। पर्यटन विकास के लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। पर्यटन के साथ ही हैंडीक्राफ्ट उद्यमियों को भी बजट में कोई राहत नहीं दी गई है।

ताजनगरी के लिए बजट में कोई विशेष राहत नहीं

सभी जानते हैं कि शहर की अर्थव्यवस्था तथा रोजगार सृजन में पर्यटन तथा जूता उद्योग की प्रमुख भूमिका है। जूता उद्योग पहले ही चीन से प्रतिद्वंद्विता झेल रहा था। पिछले वर्ष से कोरोना महामारी फैलने के बाद जूता उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिन देशों में आगरा से जूता निर्यात किया जाता है, वे सभी देश कोरोना की चपेट में हैं। यूरोप और अमेरिका के अधिकांश देशों में अभी तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। यही कारण है कि जूता निर्यातकों को वांछित आर्डर नहीं मिल सके हैं तथा लगभग सभी इकाइयां मंदी की मार झेल रही है।

लॉकडाउन के कारण जूता उद्यमियों की मोटी रकम घरेलू बाजार में फंसी हुई है। आशा की जा रही थी कि जूता उद्योग के लिए बजट में कोई राहत पैकेज दिया जा सकता है। एक जिला एक उत्पाद योजना को लेकर उद्यमी उत्साहित थे कि इस योजना के तहत जूता उद्योग को शायद संजीवनी मिल जाए। इस योजना में कुल 250 करोड़ रुपये के प्रावधान 75 जिलों के लिए किया गया है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। हालांकि स्मार्ट सिटी योजना के तहत यूपी के जिन 10 प्रमुख शहरों को दो हजार करोड़ दिए गए हैं, इनमें आगरा के हिस्से में दो सौ करोड़ रुपये आए हैं। समझा जाता है कि इससे आगरा को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इन दस शहरों में लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, सहारनपुर, बरेली, झांसी, मुरादाबाद और अलीगढ़ हैं।

इसके साथ ही इन दस शहरों में प्रधानमंत्री आवास योजना के मद में 10,029 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 7,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 369 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे आगरा समेत इन सभी दस शहरों में विकास की रफ्तार तेज होगी। इसके साथ ही पड़ोस के मथुरा-वृंदावन जिले के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सुरक्षित शहर योजना के तहत धन का आवंटन किया गया है।

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