March 6, 2021
आगरा इतिहास

313 साल पहले आगरा आए थे गुरु गोबिंद सिंह

  • हाथी घाट पर रुके थे, आगरा किले में बहादुर शाह ने किया था स्वागत
  • गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व आज, सजेगा भव्य कीर्तन दरबार

आज से 313 साल पहले गुरु गोबिंद सिंह के पावन कदम आगरा में भी पड़े थे। 2 अगस्त 1707 को वे आगरा आए थे और यमुना किनारे ठहरे थे। गुरुजी जहां रुके थे, आज वहां गुरुद्वारा हाथी घाट है। इतिहासकारों के अनुसार गुरुजी आगरा किला भी गए थे। गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 22 दिसंबर 1666 में पटना में हुआ था। वे सिखों के दसवें और अंतिम गुरु माने जाते हैं। 11 नवंबर 1675 को सिख समाज के गुरु पद पर आसीन हुए थे और 1708 तक इस पद पर रहे। सिखों की सैनिक संगत, सालसा का सृजन उन्होंने ही किया था।

गुरु गोबिंद सिंह आगरा भी आए थे। गुरुजी जहां रुके थे, आज वहां गुरुद्वारा हाथीघाट है।

गुरु गोबिंद सिंह की आज जयन्ती है। सिख समाज इसे प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाता है। इस मौके पर गुरुद्वारों में कीर्तन दरबार सजेगा और भव्य सजावट भी की जाएगी। इतिहासकारों के मुताबिक गुरुजी 313 बरस पहले आगरा आए थे। औरंगजेब की मृत्यु के बाद उनका बड़ा पुत्र मोहम्मद अज्जम, जिन्हें बहादुर शाह भी कहा जाता है, गुरु गोविंद सिंह की मदद से अपने भाई ताजा आजम पर विजय पाकर बादशाह बन गए थे। बहादुर शाह ने गुरुजी से दर्शन देने का अनुरोध किया था। गुरु साहिब 2 अगस्त, 1707 को आगरा आए और यमुना किनारे ठहरे थे। कहा जाता है कि बहादुर शाह ने गुरुजी को 1,100 सोने की मुहरें भेंट की थीं। एक दिन बादशाह के हाथी का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया। गुरुजी से विनती करने पर उन्होंने मगरमच्छ को मुक्ति देकर हाथी को छुड़ा लिया था। गुरुजी अपने जांबाज सिंहों के साथ आगरा किले में भी गए थे।

गुरुजी को कई भाषाओं का था ज्ञान

गुरुजी को कई भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने सिख कानून को भी सूत्रबद्ध किया था। फारसी, अरबी, संस्कृत व मातृभाषा पंजाबी पर उनकी गजब की पकड़ थी। आगरा किले में आगमन पर उनका भव्य सत्कार हुआ था। बहादुर शाह ने उन्हें दस्तार व हीरे जड़ित कलंगी भी भेंट की थी।

प्रकाश पर्व पर सजेगा भव्य दरबार

शहर की केंद्रीय संस्था श्री गुरु सिंह सभा माईथान में कीर्तन दरबार सजाया जाएगा। गुरुद्वारा में श्री सुखमनी सेवा सभा के वीर महेंद्र पाल सिंह, हजूरी रागी बृजेंद्र सिंह और ज्ञानी कुलविंदर सिंह कथा व कीर्तन कर संगत को निहाल करेंगे। गुरुद्वारा शहीद नगर, शाहगंज सहित अन्य गुरुद्वारों में भी प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।

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