March 5, 2021
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एग्री इन्फ्रा फंड से खड़ा होगा एपीएमसी का बुनियादी ढांचा

केंद्र सरकार ने एपीएमसी मंडियों के लिए एग्री इन्फ्रा फंड उपलब्ध होने का एलान आम बजट में करके न सिर्फ यह संकेत दिया है कि उसे इन मंडियों के अस्तित्व की चिंता है, बल्कि यह भी बताया है कि मंडियों का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा तो इसका फायदा किसानों को होगा। कृषि अर्थशास्त्री विजय सरदाना की मानें तो सरकार मंडियों को फिजिकली और डिजिटली मजबूत करने जा रही है।

विजय सरदाना कहते हैं कि राज्यों की कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) द्वारा संचालित मंडियों में जब बुनियादी सुविधाएं होंगी तो वहां क्रेता और विक्रेता दोनों पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि देशभर की मंडियों में गोदाम, साइलो, टेस्टिंग लैब समेत तमाम बुनियादी ढांचे तैयार होंगे और बुनियादी सुविधाएं होने से मंडियों में कृषि व संबद्ध क्षेत्र के उत्पादों का व्यापार सुगम होगा। कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन राज्यों की मंडियों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, उनके लिए यह एक बड़ा अवसर है कि एग्री इन्फ्रा फंड का उपयोग करके वे अपनी मंडियों को मजबूत बना सकते हैं।

केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचों को मजबूत बनाने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर की 1,000 मंडियों को इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म ई-नाम से जोड़ा जा चुका है। विजय सरदाना कहते हैं कि मंडियां जब फिजिकली और डिजिटली मजबूत होंगी तो किसानों को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा। एपीएमसी द्वारा संचालित मंडियों के बाहर कृषि व संबद्ध क्षेत्र के उत्पादों के व्यापार पर नये काूनन में किसी भी प्रकार के शुल्क का प्रावधान नहीं किए जाने से मंडी के व्यापारियों और किसानों के मन में यह आशंका घर कर गई कि केंद्र सरकार एपीएमसी मंडियों का अस्तित्व मिटाकर निजी मंडियों को बढ़ावा देना चाहती है। इसलिए, यह कहा जाने लगा कि नये केंद्रीय कानूनों का फायदा किसानों के बजाय कॉरपोरेट को होगा और देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के पीछे यह एक बड़ी वजह है। हालांकि, सरकार की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि नये कानून से एपीएमसी की मंडियों को कोई खतरा नहीं होगा बल्कि प्रतिर्स्धा बढ़ेगी।

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