March 3, 2021
आगरा इतिहास पॉलिटिक्स

28 साल बाद बाइज्जत बरी भाजपा के दिग्गज

  • स्व. माधवराव सिंधिया से दुर्व्यवहार का मामला
  • सांसद चाहर, विधायक उपाध्याय, डॉ. हरित समेत कई बड़े भाजपा नेताओं को अदालत में मिल गया संदेह का लाभ

इसे समय का ही फेर कहेंगे कि जिन डॉ. जीएस धर्मेश और सुनहरीलाल गोला को पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया के साथ आगरा कैंट पर हुई घटना में केस को मजबूती देने के लिए गवाह बनाया था, उन्होंने ही भाजपा नेताओं के बरी होने का रास्ता साफ करा दिया।

28 वर्ष पूर्व आगरा कैंट पर जब यह घटना हुई थी, उस समय डॉ. जीएस धर्मेश और सुनहरीलाल गोला दोनों ही कांग्रेस में सक्रिय नेता था। इसी के चलते स्व. माधवराव सिंधिया पक्ष की ओर से इन दोनों को केस में गवाह बनवाया गया था। बाद में डा. धर्मेश भाजपा में शामिल हो गए और वर्तमान में वे राज्य सरकार में मंत्री भी बन गए। सुनहरीलाल गोला भी उस समय काफी सक्रिय थे पर धीरे-धीरे वे भी कांग्रेस में निष्क्रिय हो गए। केस में ये ही दोनों मुख्य गवाह थे। चार्जशीट में लिखा गया था कि इन दोनों के सामने आरोपित नेताओं ने घटना को अंजाम दिया था। सुनवाई के दौरान जब इनको गवाही के बुलाया गया तो दोनों ने घटना अपने सामने होने से इंकार कर दिया। मामले में कोई गवाह न मिलने से आरोपित नेताओं को लाभ मिल गया।

यह थी घटना
गौरतलब है कि अयोध्या में विवादित ढांचे के ढहने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित भाजपा के नेताओं को गिरफ्तार कर झांसी के पास स्थित माताटीला में रखा गया था। उनसे मिलने के लिए उस दौरान भाजपा के नेताओं का हर दिन आना-जाना लगा रहता था। ज्यादातर भाजपा नेता शताब्दी एक्सप्रेस से जाते थे और उसी ट्रेन से वापस भी लौटते थे। उसी कड़ी में आगरा से भी स्थानीय नेता स्व. राजकुमार सामा, भगवान शंकर रावत के आडवाणी से मिलकर लौटेने पर कांग्रेसियों ने आगरा कैंट स्टेशन पर जमकर हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया था। उस दौरान इन दोनों नेताओं के साथ जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। इसी की प्रतिक्रिया में भाजपाइयों ने रणनीति बनाकर दो जनवरी 1993 को ग्वालियर से दिल्ली जा रहे तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्व. माधव राव सिंधिया का आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर विरोध किया। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ था। इस मामले में स्व. सिंधिया के पीआरओ अमर सिंह की ओर से भाजपा के वर्तमान सांसद राजकुमार चाहर, विधायक योगेंद्र उपाध्याय, पूर्व मंत्री डॉ. रामबाबू हरित, योगेंद्र परिहार, सुनील शर्मा एडवोकेट, दुर्ग विजय सिंह भैया एडवोकेट, शैलेंद्र गुलाटी, पूर्व पार्षद मुकेश गुप्ता सहित दर्जनों भाजपाइयों के खिलाफ जीआरपी कैंट में मुकद्मा दर्ज कराया था। इस मामले में ब्रज क्षेत्र के तत्कालीन संगठन मंत्री ह्रदयनाथ सिंह का भी नाम था। इसके अलावा अन्य नेता भी शामिल थे, जो अब इस दुनिया में भी नहीं हैं। लंबे समय से इस मामले में केस चल रहा था। सभी आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हो सके। इसके बाद कोर्ट में लगातार उपस्थित हो रहे भाजपा नेताओं की एक अलग से फाइल तैयार कर सुनवाई की गई।

जीआरपी कैंट थाने में दर्ज हुए थे दो मुकदमे
इस मामले में जीआरपी कैंट थाने में बलवा, जानलेवा हमला, चोरी, रेलवे अधिनियम के तहत अलग-अलग दो मुकदमे दर्ज हुए थे। एक मुकदमा उप स्टेशन अधीक्षक किरन सिंह प्रताप और दूसरा मुकदमा एसओ जीआरपी कैंट बिजेंद्र सिंह ने लिखाया था। विवेचना के दौरान स्व. माधव राव सिंधिया के पीआरओ अमर सिंह द्वारा भी अपनी तहरीर दी गई थी। इसको विवेचक ने इसी मामले में शामिल करते हुए विवेचना की। इसके बाद सभी आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र प्रेषित किए थे।

फैसला आते ही खुशी से झूमे
28 वर्ष पहले तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया के समक्ष आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर भाजपाइयों द्वारा किए गये विरोध प्रदर्शन और कथित दुर्व्यवहार के मामले में आरोपित वर्तमान सांसद राजकुमार चाहर, विधायक योगेंद्र उपाध्याय सहित कई भाजपा नेताओं को संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने बरी कर दिया। फैसला आते ही भाजपाइयों के चेहरे पर दमकने लगे। अदालत के बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने बरी हुए नेताओं का स्वागत किया। शनिवार को इस मामले में विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए उमाकांत जिंदल ने फैसला सुनाया। फैसला सुनाने से पहले सभी आरोपित अदालत में पेश हो गए थे। आरोपितों की मौजूदगी में विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए उमाकांत जिंदल ने फैसले में संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत से बरी होने के बाद बाहर आए वर्तमान भाजपा सांसद राजकुमार चाहर, विधायक योगेंद्र उपाध्याय, पूर्व विधायक डाक्टर रामबाबू हरित, अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह भैया, सुनील शर्मा एडवोकेट, योगेंद्र परिहार, शैलेंद्र गुलाटी, मुकेश गुप्ता आदि का भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया।

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