March 2, 2021
अन्य आगरा शिक्षा

ब्रेन हो रहा एक्टिव, फ्यूचर होगा ब्राइट

  • कल के टफ कॉम्पटीशन की तैयारी में कंप्यूटर से तेज हो रहा बच्चों का दिमाग
  • बच्चे का भविष्य हो सुनहरा, ब्रेन एक्टिवेशन क्लासेज का सहारा ले रहे अभिभावक

आवास विकास में रहने वाले विश्वदीपक का बेटा अभी एल केजी में है। विश्वदीपक बताते हैं कि वे और उनकी धर्मपत्नी एक समझदार माता-पिता की तरह अपने बच्चे की परवरिश करना चाहते हैं। कहीं से उन्हें ब्रेन एक्टीवेशन स्कूल के बारे में पता लगा। वे बच्चे को वहां लेकर पहुंचे और काउंसलिंग के जरिए यह पता करने की कोशिश की कि उनका बच्चा किस मनोस्थिति का है।

स्कूल में सेंसिस टेस्ट के जरिए फिंगर प्रिंट से पहचानकर एक्सपर्ट ने उन्हें बताया कि बच्चा ईगल प्रवृत्ति का है और उसकी बेहतर परवरिश के लिए माता-पिता को डव यानि शांत प्रवृत्ति रखनी होगी। स्कूल में बताया गया व्यवहार जब हमने बच्चे के साथ अपनाया तो उसमें काफी बदलाव देखने को मिला।

आने वाले कल में बहुत टफ कॉम्पटीशन होगा। ऐसा हम आए दिन और लगभग सभी से सुनते हैं, लेकिन इसी कॉम्पटीशन की तैयारी में कुछ बच्चों का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलने लगा है। वे गणित की बड़ी-बड़ी पहेलियां चुटकियों में सुलझा देते हैं। बिना देखे फोटो और ताश के पत्ते पहचान सकते हैं, आंखों पर पट्टी बांधकर स्केटिंग कर सकते हैं, मैच खेल सकते हैं, यहां तक कि साइकिल चला सकते हैं। जिन सवालों को हल करने में बडे़-बड़ों के पसीने छूट जाएं, यह बच्चे मिनटों में सुलझा देते हैं। असंभव सा लगने वाला यह काम कैसे यह मुमकिन हो पा रहा है। पढ़िए इस रिपोर्ट में…

विश्वदीपक की तरह ही एक अन्य अभिभावक ने कहा कि वे अपने बच्चे अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए चाहते हैं कि उनका बच्चा ब्रेन एक्टीवेशन क्लास ज्वाइन करे। ज्यादातर अभिभावकों से बात करने पर पता चलता है कि उनका बच्चा कल के कॉम्पटीशन और नॉलेज मैनेजमेंट के माहौल में ढल जाए, इसकी तैयारी उन्होंने आज ही शुरू कर दी है। साइंस कहती है कि अमूमन हम लोग अपने दिमाग के बांए हिस्से का ही इस्तेमाल करते हैं, दांया हिस्सा कमोबेश कम एक्टिव रहता है और एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी उसे ही माना जाता है, जिसके दिमाग का दांया हिस्सा भी एक्टिव रहे। यही वजह है कि आगरा में अभिभावक अपने बच्चों को ब्रेन एक्टिवेशन प्रोग्राम ज्वाइन करा रहे हैं, जो बच्चों की एनालाटिकल, रीजनिंग और क्रिएटिविटी को बढ़ा देते हैं। आगरा में सैकड़ों माता-पिता अपने बच्चों को ब्रेन एक्टिवेशन कोर्स करा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर वे माता-पिता भी हैं जो इन सेंटर्स पर पहुंचकर केवल काउंसलिंग कराते हैं, यह समझने के लिए उनके बच्चे की परवरिश उन्हें कैसे करनी है।

इन बच्चों की खासियत जानकर हो जाएंगे हैरान
न्यू राजा मंडी में प्रियांशी अभी सात साल की है, लेकिन आंखें बंद करके चित्रों, रंगों, फोटो को पहचानती है, दिमाग तेज चलता है तो लोग बातें सुनकर हैरान हो जाते हैं। दयालबाग की मेहर 16 साल की हैं और अपने से बड़ी उम्र के कई बच्चों से ज्यादा होशियार हैं। उनमें भी कई खूबियां हैं जो दूसरे बच्चों में विकसित नहीं होतीं या देरी से होती हैं। कई सारी विशेषताओं के साथ न्यू आगरा के कुशाग्र भी बाकी बच्चों से अलग हैं। न्यू इंद्रपुरी में 10 साल के उत्कर्ष और न्यू राजा मंडी के 09 साल के शुभ के कारनामे रिश्तेदारों और स्कूल के शिक्षकों को भी हैरान करते हैं।
शमसाबाद रोड पर रहने वाले पार्थ 10 साल के हैं, वे बिना देखे चीजें पहचान लेते हैं तो लोगों को ये जादू की तरह लगता है। गणित और साइंस के सवाल वे चुटकियों में हल करते हैं। ये कुछेक ही उदाहरण हैं, आगरा में ऐसे हजारों बच्चे हैं जो छोटी उम्र में बडे़- बड़े काम कर हैरान कर रहे हैं।

क्या है ब्रेन एक्टीवेशन
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ब्रेन एक्टीवेशन वह तरकीब है जिससे बच्चे के दिमाग के विकास की क्षमता और दायरा बढ़ जाता है। यह पूरी तरह विज्ञान पर आधारित है। बस कुछ घंटे की ब्रेन स्टॉर्मिंग एक्सरसाइज से बच्चे की क्षमताएं बढ़ जाती हैं।

ये भी हैं खूबियां
ब्रेन एक्टिवेशन एक्सपर्ट आशना बताती हैं कि ब्रेन एक्टिवेशन प्रोेग्राम की कई और भी खूबियां हैं। जैसे चित्रों, रंगों, तस्वीरों को बिना देखे पहचानना, आंखें बंद करके किताब के अक्षर, ताश के पत्ते, मोबाइल के फोटो पहचानना। यह काफी मनोरंजक भी है।

विजय प्रकाश,
डायरेक्टर, ब्रेन गुरुकुल

कैसे बढ़ जाती है बच्चे की क्षमता
आगरा में ब्रेन गुरूकुल के डायरेक्टर विजय प्रकाश बताते हैं कि यह कोर्स कुछ दिनों से कुछ महीने के होते हैं। इनमें सेंस ऑर्गन्स यानि ज्ञान इंद्रियों की क्षमताओं को बढ़ाया जाता है। इसमें सुनना, सूंघना, स्वाद, स्पर्श और देखना आदि शामिल है। बच्चों को बिना आंखें खोले चीजों को पहचानने का अभ्यास कराया जाता है। वे किसी तस्वीर, रंग या वस्तु को बिना देखे पहचान सकते हैं। रीजनिंग के साथ ही गणित और साइंस के जटिल सवाल आसानी से हल कर सकते हैं। टच, फील और स्मेल के जरिए बहुत सारे काम कर सकते हैं। वे आंखें बंद करके स्केटिंग, साइक्लिंग और मैच खेलने जैसे काम आसानी से कर लेते हैं। उनके आगरा में इस तरह के लगभग 25 सेंटर्स हैं, जहां सैकड़ों बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह प्रक्रिया डमेटोग्लाइफिक्स मल्टीपल इंटेलीजेंस (डीएमआईटी) पर आधारित है। बच्चे के फिंगर प्रिंट से सेंसिस का पता लगाया जाता है। यह एक तरह से बच्चे के इन बोर्न टेलेंट को पहचानकर उसे बढ़ाने जैसा है।

पंकज गुप्ता,
ब्रेन एक्टिवेशन, एक्सपर्ट

मिड ब्रेन एक्टिवेशन
ब्रेन एक्टिवेशन प्रोग्राम के एक्सपर्ट पंकज गुप्ता बताते हैं कि मिड ब्रेन एक्टिवेशन वैसे तो हर उम्र के लिए है, लेकिन बच्चे जल्दी सीखते हैं। इसके लिए योग, नृत्य, संगीत, मेडिटेशन, रिलेक्सेशन और बिहेवियरल साइंस को मिलाकर एक प्रोग्राम तैयार किया जाता है। इस प्रोग्राम के जरिए बच्चों की एकाग्रता और दूसरी क्षमताओं को बढ़ाया जाता है। दिमाग का बांया हिस्सा लॉजिकल और दांया क्रिएटिव होता है। कुछ विशेष प्रकार की दिमागी एक्सरसाइज से इन दोनों हिस्सों को जोड़ा जाता है, इसलिए इस प्रोग्राम का नाम मिड ब्रेन एक्टिवेशन है।
– चीजों को क्रम में लगाना – विश्लेषण करना – तार्किक गणित के सवाल सुलझाना – रीजनिंग करना – भाषा का ज्ञान -शब्दों के बारे में सोच विचार -तथ्यों का ज्ञान – गणनाएं करना – गानों के शब्द – क्रिएटिविटी – इमेजिनेशन – हॉलिस्टिक एप्रोच – कला – विजुअलाइजेशन – डे ड्रीमिंग

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