February 27, 2021
आगरा इतिहास नगर निगम

जमीन में दफन मिल रहे – मुगलिया सल्तनत के अवशेष

  • फतेहपुरसीकरी में चल रहा एएसआई का संरक्षण कार्य, 20 साल बाद हो रही खुदाई
  • टोडरमल की बारादरी में मिले फौवारे, बर्तनों, खिलौनों के अवशेषों को रखा सुरक्षित

सैकड़ों साल से जमीन में दफन मुगलिया दौर की कलाकृतियां बाहर आ रही हैं। फतेहपुरसीकरी में चल रहे एएसआई के संरक्षण कार्य के दौरान बेजोड़ मुगलिया कलाकृति के कई नमूने सामने आए हैं। इनमें अव्वल नंबर पर है फौवारा। जिसकी नक्काशी देखते ही बनती है। फौवारा उस समय की आधुनिक दबाव प्रणाली से लैस था। खुदाई में रोजमर्रा की जरूरी चीजें भी लगातार मिल रही हैं। इन सभी वस्तुओं का संरक्षण किया जा रहा है।

बादशाह अकबर के वित्त मंत्री व नौरत्नों में शामिल रहे राजा टोडरमल की बारादरी के संरक्षण का कार्य इन दिनों जारी है। करीब 20 लाख रुपये की लागत से इसका संरक्षण कराया जा रहा है। पिछले करीब एक पखवाड़े से यहां उत्खनन का कार्य चल रहा है। मिट्टी के नीचे दबे पुराने बर्तन, खिलौने, चिलम आदि के अवशेष मिल चुके हैं। खुदाई में अब तक की सबसे बड़ी  खोज है यहां जमीन के नीचे मिला फौवारा। यह फौवारा उस समय की आधुनिक तकनीक से लैस था।

वर्गाकार डिजाइनदार व चूने से बने हुए वॉटर टैंक के बीचों-बीच फौवारा लगा हुआ था। हर दिशा से  टैंक की लंबाई 8.7 मीटर और गहराई 1.1 मीटर है। टैंक के अंदर से एएसआई कर्मचारियों ने मलबा हटा दिया है। सफाई के दौरान टैंक में पुराने बर्तन मिले हैं, जिनमें हांडी, ढक्कन, चिलम और खिलौनों के अवशेष शामिल हैं। टैंक में पानी पहुंचाने को आउटलेट नाली भी मिली है। इन सभी अवशेषों का संरक्षण कर लिया गया है।

अवशेषों के कालखंड का लगाएंगे पता
टोटरमल की बारादरी से मिले अवशेषों को माल रोड स्थित एएसआई के सर्किल आॅफिस में रखा गया है। यहां उनके कालखंड का पता लगाने के लिए अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि यह किस कालखंड के हैं। इन सभी अवशेषों को एएसआई ने बारादरी का हिस्सा ही माना है। बच्चों के खिलौनों व अन्य अवशेषों को देख कर लग रहा है कि यह दरबार के खास लोगों के परिवारों के लिए डिजाइन किए गए थे। राजा टोडरमल ने ही मुगलिया सल्तनत को नई आम कर प्रक्रिया से बारे में जानकारी दी थी।

दबाव पद्धति पर चलता था फौवारा
टैंक में लगे फौवारे तक पानी कैसे पहुंचता होगा, इसे लेकर एएसआई के विशेषज्ञ माथापच्ची कर रहे हैं। हालांकि मुगल काल में चारबाग पद्धति पर बनाए गए उद्यानों में फौवारे दबाव पद्धति पर चलते थे। इसमें अधिक ऊंचाई पर बनी टंकी से पानी को नीचे छोड़ा जाता था और फौवारे बिना किसी मोटर के चलने लगते थे। ताजमहल के अंदर स्थित फौवारे आज भी इसी पद्धति पर संचालित होते हैं। फौवारे का संरक्षण पूरा करने के बाद उसे फिर से शुरू किया जाएगा।


नौ डिजाइन पैटर्न से लैस है फौवारा
यह फौवारा लगभग 450 साल पुराना प्रतीत हो रहा है। इसके निर्माण में लाइम प्लास्टर का इस्तेमाल किया गया होगा। इस टैंक की हर दीवार पर नौ डिजाइन पैटर्न हैं। टैंक का फौवारा लाल बलुई पत्थर का है। इसका पाइप किस धातु का है, यह पता लगाया जा रहा है। एएसआई ने फतेहपुरसीकरी के इस हिस्से में करीब 20 बरस बाद संरक्षण कार्य शुरू किया है। बारादरी चारों ओर से खुली हुई है। शाम को यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा हो जाता है। इसकी बाउंड्रीवॉल भी कराई जाएगी।

वसंत कुमार स्वर्णकार (अधीक्षण पुरातत्वविद्)

उत्खनन का कार्य जारी है। टैंक की जल प्रणाली के बारे में पता लगाया जा रहा है। बारादरी के बीचों-बीच यह फौवारा रहा होगा। फतेहपुरसीकरी की गर्मी से बचने के लिए इसका निर्माण कराया गया होगा। पत्थर तराशते समय वाटर टैंक का प्लेटफार्म निकला था। खुदाई के दौरान कई अन्य वस्तुओं के अवशेष भी मिले हैं। यह टैंक बारादरी के ठीक सामने है और उसी का हिस्सा है।

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