February 28, 2021
पॉलिटिक्स राष्ट्रीय

बजट से पहले होगा कैबिनेट का विस्तार

  • अरविंद शर्मा की मंत्रिमंडल में हो सकती है नबंर दो की हैसियत
  • पांच-छह चेहरों को हटाने की चर्चा, हैवीवेट भी हैं निशाने पर

विधान परिषद चुनाव के समापन के बाद अब सबकी निगाह मंत्रिमंडल विस्तार पर लगी हुई है। नौकरशाही से राजनीति में प्रवेश करने वाले अरविंद कुमार शर्मा की ताजपोशी की सारी तैयारियां हो चुकी हैं। उन्हें मुख्यमंत्री के बराबर वाला बंगला आवंटित किए जाने की तैयारी चल रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद मंत्रिमंडल में उनकी हैसियत नंबर दो की हो सकती है। मंत्रिमंडल का विस्तार प्रदेश में बजट पेश होने से पहले संभव है। विस्तार में कई मंत्रियों की छुट्टी तो कुछ नये चेहरों का समायोजन हो सकता है।

प्रदेश में बिजली, पानी और सड़क जैसी जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री एक बेहतर व्यक्ति की तलाश में थे। बताया जाता है कि इसको लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी वार्ता हुई। उन्होंने प्रदेश में विदेश मंत्री जयशंकर और हरिदीप पुरी जैसे स्किल्ड व्यक्ति की मांग की थी, ताकि यूपी में सड़क, बिजली और पानी जैसे विभागों की कार्यप्रणाली का मैकेनिज्म सुधारा जा सके। मोदी-योगी की इस मुलाकात के बाद ही मऊ जिले के मूल निवासी और गुजरात कैडर के मोदी के विश्वासपात्र आईएएस अरविंद शर्मा को सेवानिवृत्ति से दो साल पहले ही वीआरएस लेने का निर्देश दे दिया गया। आनन-फानन में उनकी वीआरएस के आवेदन पर स्वीकृति भी दे दी गई। वीआरएस स्वीकृति होने के 24 घंटे बाद ही उन्हें भाजपा की सदस्यता ग्रहण करा दी गई और दूसरे दिन विधान परिषद का प्रत्याशी भी घोषित कर दिया गया। पार्टी में उनका वीआईपी जैसा स्वागत हुआ। अरविंद शर्मा की नाटकीय एंट्री ने यूपी भाजपा में भी खलबली मचा रखी है।

जिस तरह से राजनीति में अरविंद शर्मा की एंट्री हुई है, उससे वे मंत्री भी काफी चौकन्ने हो गए हैं, जिनके बारे में लखनऊ के गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं। साथ ही उनके ऊपर टेंडर मैनेज करने के आरोप तक लग रहे हैं। इन विभागों के मंत्री अब अपनी कुर्सी बचाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही संघ के पदाधिकारियों के यहां अपनी पैरवी करने में लगे हुए हैं। माना जा रहा है कि अरविंद शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी कुछ चौंकाने वाले फैसले ले सकते हैं। मंत्रिमंडल से कुछ ऐसे हेवीवैट चेहरों को भी हटाया जा सकता है, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनका हटना नामुमकिन है।

मंत्रिमंडल में अरविंद शर्मा की हैसियत क्या हो सकती है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके लिए मुख्यमंत्री के बराबर वाला बंगला 4, विक्रमादित्य मार्ग को सजाया-संवारा जा रहा है। वैसे चर्चा यह है कि दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य में से किसी एक को उप मुख्यमंत्री पद से हटाकर उनके स्थान पर अरविंद शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेश को तीसरा उप मुख्यमंत्री भी मिल सकता है। इनको जनता से सीधे जुड़े विभागों का दायित्व दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि प्रदेश की जनता को पानी, बिजली और सड़क की बेहतर सुविधा मिले। चुनावी वर्ष होने के कारण मुख्यमंत्री का इस पर फोकस भी है।

हट सकते हैं पांच-छह मंत्री

कैबिनेट विस्तार में पांच-छह मंत्रियों के हटाने की चर्चा है। इसमें एक महिला मंत्री का नाम जोर-शोर से चर्चाओं में है। इसके अलावा अवध क्षेत्र के एक कैबिनेट मंत्री का हटना भी लगभग तय माना जा रहा है। मोबाइल के प्रचार में मोदी और योगी का फोटो प्रयुक्त करने के मामले में फंसे एक मंत्री भी मुख्यमंत्री के निशाने पर हैं। इसी तरह एक-दो हैवीवेट मंत्री भी मुख्यमंत्री के निशाने पर हैं। वे इनकी कार्यप्रणाली से नाखुश हैं पर संगठन में मजबूत पकड़ रखने के कारण अभी तक वे बचे हुए हैं। चर्चा तो आगरा मंडल से भी एक-दो मंत्रियों को हटाए जाने की भी है। इधर मंत्रिमंडल में महिला कोटा पूरा करने के लिए इटावा से सरिता भदौरिया और बाह विधानसभा क्षेत्र से विधायक रानी पक्षालिका सिंह को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। यदि मंत्रिमंडल से एकाध वैश्य को हटाया जाता है तो उस स्थिति में पुरुषोत्तम खंडेलवाल के नाम पर भी विचार हो सकता है। आगरा से दक्षिण के विधायक योगेंद्र उपाध्याय के दावे को भी मजबूत माना जा रहा है। विद्यासागर सोनकर को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें से किसकी लॉटरी खुलेगी, यह भविष्य के गर्भ में है।

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