February 24, 2021
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कृषि कर्ज माफी पर विचार कर सकती है केन्द्र सरकार

कृषि सुधार पर तकरार के बीच मोदी सरकार आगामी बजट में किसानों से जुड़े उन मसलों पर भी गौर कर सकती है, जो पूरे देश के किसानों से जुड़ा है। किसानों का कर्ज माफ करना एक अहम मसला है, जो पूरे देश के किसानों से जुड़ा है और भारत में किसानों की कर्जमाफी लोकलुभावन योजनाओं में शामिल रही है। मगर, मोदी सरकार ने कर्जमाफी के बजाए किफायती दरों पर किसानों को कर्ज मुहैया करवाने की योजना को तवज्जो दिया। साथ ही, खेती-किसानी के काम में आर्थिक मदद के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान-निधि (पीएम-किसान) की शुरुआत की जो मोदी सरकार की सबसे महत्वकांक्षी योजना है। जानकारों की माने तो केंद्र सरकार देशभर के किसानों को खुश करने के लिए कर्जमाफी योजना पर भी विचार कर सकती है। इसके पीछे तर्क यह दिया जाता है कि सरकार जब कर्जमाफी का एलान करती है तो कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को बड़ी राहत मिलती है और सरकार के प्रति किसानों का भरोसा बढ़ता है।

आज जब नये कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन से सरकार पर किसानों में असंतोष की भावना पनपने लगी है, तब कर्जमाफी की योजना उनका भरोसा जीतने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकती है। देश के किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के मकसद से कृषि और संबद्ध क्षेत्र में सुधार के लिए दो नए कृषि कानून लाने और पहले से मौजूद एक कानून में संशोधन किया है। लेकिन इन कानूनों के विरोध में पंजाब और हरियाणा से उठी आवाज अब देश के अन्य प्रांतों तक पहुंचने लगी है।

नये कानूनों के विरोध में आंदोलन की राह पकड़े किसान दो महीने से अधिक समय से देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की बैठकें बेनतीजा रहने के बाद अब बातचीत भी बंद है। मालूम हो कि जब किसान आंदोलन शुरू हुआ था, तब किसानों की विभिन्न मांगों में कर्जमाफी भी एक प्रमुख मांग थी। जानकार बताते हैं कि शुरूआत में पंजाब और हरियाणा के किसान आंदोलन कर रहे थे और देश के अन्य हिस्सों के किसानों को इस आंदोलन से जोड़ने के लिए कृषि कर्जमाफी का मसला जोड़ा गया था।

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