March 2, 2021
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अग्रसेन चौक का नाम बदलने का भ्रम फैल गया

वीर गोकुला जाट की मूर्ति कोतवाली के पास लगाने की मेयर ने की घोषणा

वीरवर गोकुल सिंह उर्फ गोकुला जाट के नाम पर फौवारा चौराहे का नामकरण किए जाने का भ्रम कुछ इस तरह फैला कि देखते ही देखते विवाद खड़ा हो गया। विरोध के स्वर अग्रवाल समाज की ओर से उठे क्योंकि फौवारा चौक का नामकरण पहले ही महाराजा अग्रसेन के नाम पर हो चुका है। विरोध बढ़ते देख मेयर ने शाम होते-होते स्पष्टीकरण दिया कि अग्रसेन चौक का नाम नहीं बदला जाएगा। वीर गोकुला की मूर्ति तो महाराजा अग्रसेन की मूर्ति से सौ मीटर दूर कोतवाली के पास लगाई जाएगी।

वीर गोकुला जाट की फौवारा चौक क्षेत्र में मूर्ति लगाने की घोषणा संबंधी कार्यक्रम आनन-फानन में हुआ। इसके केंद्र में एक ओर मेयर नवीन जैन थे तो दूसरी ओर सांसद राज कुमार चाहर। इसे किसान आंदोलन के चलते जाट समाज को खुश करने के रूप में देखा गया, मेयर के कैम्प कार्यालय की ओर से मंगलवार की शाम सूचना दी गई थी कि नगर निगम के सदन कक्ष में जाट समाज का प्रतिनिधिमंडल अपने समाज की मांगें महापौर के समक्ष रखेगा। दोपहर 12 बजे से आयोजित इस कार्यक्रम में महापौर ने वीरवर गोकुला की भव्य और अष्टधातु की प्रतिमा फौवारा चौक के पास कोतवाली के आसपास लगाने के साथ ही इस चौक का नामकरण वीर गोकुला जाट के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की। मेयर की इस घोषणा से नगर निगम सदन में मौजूद जाट समाज गदगद हो उठा। जाट समाज के नेताओं ने मेयर को पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत भी किया।

महापौर की इस घोषणा की खबर जैसे ही फैली, इसकी प्रतिक्रिया शुरू होने लगी। खासकर अग्रवाल समाज की ओर से। हर कोई यह सवाल उठाने लगा कि फौवारा चौक का नामकरण तो पहले से ही महाराजा अग्रसेन के नाम पर हो चुका है और वहां महाराजा अग्रसेन की मूर्ति कैसे लग सकती है। शाम होते-होते विवाद ज्यादा बढ़ता दिखा तो महापौर नवीन जैन ने स्पष्टीकरण दिया कि लोग भ्रमित न हों। वीर गोकुला की मूर्ति कोतवाली के पास लगाई जानी है। अग्रसेन चौक नाम और महाराजा अग्रसेन की मूर्ति के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

दरअसल विवाद का विषय चौक के नामकरण का ही था क्योंकि मूर्ति कोतवाली के पास लगाने को लेकर कोई विवाद नहीं होगा। देखना यह है कि महापौर के स्पष्टीकरण को जाट समाज किस रूप में लेता है।

नगर निगम के सदन में वीर गोकुला जाट की प्रतिमा की घोषणा करते मेयर नवीन जैन। मंचस्थ हैं सांसद राज कुमार चाहर, विधायक राम प्रताप सिंह चौहान, जेएस फौजदार, कप्तान सिंह चाहर, दुर्गविजय सिंह भैया, शैलराज सिंह, कमल चौधरी एवं अन्य।

जाट राजनीति भी दिखी कार्यक्रम में

फौवारा चौक क्षेत्र में वीरवर गोकुला जाट की अष्टधातु की भव्य प्रतिमा लगाए जाने की घोषणा के कार्यक्रम में भी राजनीति दिखी। जाट महासभा ने दिसम्बर माह के तीसरे सप्ताह में मेयर को वीर गोकुला और महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगाने के लिए जगह देने का प्रस्ताव दिया था। इसके दो-तीन दिन बाद ही महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर हुए कार्यक्रम में मेयर ने जाट नेताओं की मौजूदगी में दोनों महापुरुषों की प्रतिमाओं के लिए जल्द जगह देने का ऐलान कर दिया था। इसी घोषणा के क्रम में जाट महासभा ने मूर्तियों के लिए मेयर को चार स्थान भी सुझा दिए थे। बीते कल के कार्यक्रम में जाट समाज के जो प्रमुख लोग पहुंचे, वे दो स्तर से आमंत्रित किए गए थे। एक तरफ मेयर के कैम्प कार्यालय से जाट महासभा के प्रमुख लोगों सुरेंद्र सिंह वर्मा, कुंवर शैलराज सिंह, कप्तान सिंह चाहर समेत तमाम लोगों को आमंत्रित किया गया था तो दूसरी ओर सांसद राज कुमार चाहर की ओर से जगत सिंह फौजदार, हाकिम सिंह सोलंकी, राजेंद्र फौजदार, पूर्व विधायक डॉ. अनिल चौधरी, दुर्गविजय सिंह भैया एडवोकेट और कमल चौधरी आदि को बुलाया गया। मेयर नवीन जैन ने जब वीर गोकुला की मूर्ति लगाने की घोषणा की, उससे पहले कहा कि उन्हें सांसद राज कुमार चाहर की ओर से प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके बाद मेयर ने यह भी कहा कि इसी तरह का प्रस्ताव उन्हें जाट महासभा की ओर से पहले ही मिल चुका था। बाद में सांसद चाहर ने कहा कि उनका प्रस्ताव जाट महासभा के पक्ष में ही है। जाट महासभा के लोग चर्चा कर रहे थे कि जब महासभा का प्रस्ताव था ही तो अलग से प्रस्ताव देने की क्या जरूरत थी।

अग्रवाल समाज के लोग रात में जा पहुंचे महापौर के घर

फौवारा चौक का नाम बदलने का भ्रम फैलने पर मेयर से मुलाकात करते अग्रवाल युवा संगठन के पदाधिकारी।

फौवारा चौक का नाम बदलकर वीर गोकुला चौक किए जाने का भ्रम फैला तो अग्रवाल युवा संगठन के पदाधिकारी स्थिति साफ करने के लिए मेयर के पास पहुंच गए। संगठन के संस्थापक विनोद अग्रवाल एवं अग्रसेन प्रतिमा स्थापना समिति के अध्यक्ष सुरेश बंसल कागजी के नेतृत्व में समाज का प्रतिनिधिमंडल रात में मेयर के निवास पर पहुंचा। सभी ने मेयर के सामने अपना विरोध दर्ज कराया। इस पर मेयर ने स्पष्ट किया कि यह भ्रम है। ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा। फौवारा चौक को अग्रसेन चौक के नाम से ही जाना जाएगा। महापौर ने बताया कि हींग की मंडी रोड पर कोतवाली के नजदीक उचित स्थान का चयन कर गोकुला जाट की प्रतिमा लगाई जाएगी। उसी रोड का नाम वीर गोकुला जाट रोड रखने की मांग उनके समक्ष रखी गई है, जिस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। मेयर की बात सुनने के बाद पदाधिकारी संतुष्ठ नजर आए। प्रतिनिधिमंडल में युवा संगठन के सरंक्षक अखिल बसंल, अध्यक्ष शैलू अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विवेक गर्ग, सलाहकार शकुन बसंल, कुलवंत मित्तल आदि मौजूद रहे।

नवीन जैन, महापौर

’वीर गोकुल सिंह कहीं और नहीं, ब्रज की धरती पर ही 17वीं शताब्दी में पैदा हुए थे। वे मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, हिंडौन एरिया की हिंदू जनता खासकर किसानों के नेता थे। तिलपत की गढ़ी उनका केंद्र थी। उस समय के मुगल शासक औरंगजेब के हिंदू समाज पर अत्याचार के खिलाफ उन्होंने आवाज बुलंद की। औरंगजेब की सेना के छक्के छुड़ा दिए। ब्रज में आज जो हिंदू मंदिर और संस्कृति जीवित है, वह वीर गोकुला के बलिदान की बदौलत ही है। ऐसे वीर को इतिहासकारों ने भुला दिया था, लेकिन हम आगरा में उनकी मूर्ति लगाकर उनकी याद को अक्षुण्ण बनाने जा रहे हैं। नगर निगम वीर गोकुला की भव्य मूर्ति लगाएगा।

अग्रसेन चौक यथावत रहेगा- मेयर नवीन जैन
पहले से ही अग्रसेन चौक के नाम से पहचान रखने वाले फौवारा चौक का वीर गोकुला के नाम पर नामकरण किए जाने का भ्रम फैला तो और विवाद खड़ा हुआ तो मेयर नवीन जैन ने कहा कि यह चौक महाराजा अग्रसेन के नाम से ही जाना जाएगा। अग्रवाल समाज के ब्रिजेश अग्रवाल से बातचीत करते हुए मेयर का एक आॅडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे कहते दिख रहे हैं कि कुछ लोगों ने भ्रम फैला दिया है। फौवारा को अग्रसेन चौक के नाम से ही जाना जाएगा। महाराजा अग्रसेन की मूर्ति के बराबर कोई दूसरी मूर्ति नहीं लग सकती। मैं भी तो वही खून (वैश्य) हूं। मेरे रहते ऐसा कदापि नहीं हो सकता। वीर गोकुला की मूर्ति तो हम कोतवाली के पास लगाएंगे। मेयर नवीन जैन ने नये समीकरण से बातचीत में भी यही बात दुहराई। उन्होंने कहा कि वीर गोकुला की मूर्ति कोतवाली के पास लगाई जानी है। महाराजा अग्रसेन चौक का नाम यथावत रहेगा।

राजकुमार चाहर, सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा

17वीं शताब्दी में मुगल बादशाह औरंगजेब के अत्याचारों से हिंदू जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी। मंदिर तोड़े जा रहे थे। हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटकर उन्हें मुस्लिम बनाया जा रहा था। किसानों पर अनेक तरह के लगान थोपे जा रहे थे। किसान कुल में जन्मे वीर गोकुल सिंह ने मुगलों के इस अत्याचार को चुनौती दी। जाट समाज और राजपूत, गुर्जर, यादव, मेव, मीणा आदि हिंदू जातियों ने वीर गोकुला का साथ दिया। औरंगजेब की सेना को इस वीर के नेतृत्व में गाजर-मूली की तरह काट दिया गया। वीर गोकुला को बंदी बनाकर आगरा लाया गया। इस्लाम न कबूलने पर उन्हें कोतवाली वाली जगह पर उनके अंग काटकर उन्हें मौत दी गई थी। हिंदू समाज ऐसे वीर को कभी नहीं भुला सकता। उनके अंग काटने पर खून के फौवारे छूटे थे, इसी वजह से इस जगह का नाम फौवारा पड़ा।

राम प्रताप सिंह चौहान, विधायक, एत्मादपुर

वीर गोकुल सिंह ने बलिदान दे दिया, लेकिन मुगल शासकों के आगे नहीं झुके। हिंदू समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा। ऐसे वीर योद्धा की प्रतिमा आगरा में बहुत पहले लग जानी चाहिए थी, क्योंकि उनकी शहादत यहीं पर हुई थी।

बाजार में भी मुखर हुए विरोध के स्वर

यह चित्र है कोतवाली के आसपास का, जहां नगर निगम वीर गोकुला जाट की प्रतिमा लगवाना चाहता है। चित्र देखकर तो कोई जगह ऐसी नजर नहीं आती, जहां मूर्ति लगाई जा सके। हालांकि मेयर नवीन जैन ने कहा है कि शनिवार को जाट समाज के नेताओं के साथ इस क्षेत्र का दौरा कर मूर्ति के लिए जगह तलाशेंगे।

नगर निगम सभागार में मेयर नवीन जैन ने फौवारा चौक पर वीर गोकुला जाट की प्रतिमा लगाने और चौक का नाम वीर गोकुला जाट के नाम पर रखने की घोषणा की। इसकी जानकारी दोपहर तक स्थानीय कारोबारियों को हुई तो विरोध के स्वर मुखर होने लगे। इस पर शाम को महापौर नवीन जैन को स्पष्ट करना पड़ा कि वीर गोकुला जाट की अष्टधातु की प्रतिमा कोतवाली के पास उस जगह पर लगाई जाएगी, जहां मुगल शासन के दौरान उन्हें शहीद किया गया था।
दवा कारोबारी महेश अग्रवाल ने कहा कि काफी समय पहले यहां महाराजा अग्रसेन जी की मूर्ति स्थापित करने के साथ ही यह तय हो गया था कि चौराहे हो अग्रसेन चौक के नाम से जाना जाएगा। दवा कारोबारी आगे से इसके लिए मुहिम भी चलाएंगे। दवा कारोबारी विमल गुप्ता ने कहा कि चौराहे पर महाराजा अग्रसेन जी की प्रतिमा लगी है। तमाम लोग इसी से चौक को पहचानते हैं। यहां प्रतिमा या नाम बदलने जैसे फैसले नहीं लेने चाहिए। भाजपा के उच्च पदाधिकारियों को भी इस पर विचार करना जाहिए। दवा कारोबारी राजकुमार गुप्ता ने कहा कि हम बचपन से ही फौवारा चौक सुनते आए हैं। अचानक इसे परिवर्तित किया जाना ठीक नहीं है। दवा कारोबारी आशीष शर्मा ने कहा कि शुरुआत से फौवारा चौक सुनते आए हैं। काफी समय पहले महाराजा अग्रसेन जी की प्रतिमा स्थापित करने के साथ ही चौक का नाम महाराजा अग्रसेन चौक किया गया। अब एक बार फिर इसे परिवर्तित किया जा रहा है। इस तरह के फैसले अचानक नहीं लिए जाने चाहिए बल्कि काफी सोच-विचार के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए। स्थानीय कारोबारी अमित गुप्ता ने कहा कि मेयर साहब को अपने निर्णय पर पुन: विचार करना चाहिए। जब पहले से यहां महाराजा अग्रसेन जी की प्रतिमा स्थापित है। चौक का नाम भी महाराजा अग्रसेन चौक है तो इस तरह के फैसले लेना औचित्यहीन है।

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