March 2, 2021
आगरा आम मुददे नगर निगम पॉलिटिक्स

गायों की देखभाल के लिए गो सेस

  • नगर निगम के सदन की बैठक में दूसरे दिन भी हुआ हंगामा
  • आर्थिक बदहाली से जूझ रहे नगर निगम ने पार्षदों को स्टडी टूर पर अंंडमान निकोबार भेजने का प्रस्ताव भी पास किया
  • जनहित के मुद्दों पर पार्षदों ने अफसरों पर जमकर किए प्रहार, सफाई, अतिक्रमण, पॉलीथिन समेत कई समस्याओं पर घेरा

नगर निगम सदन की बैठक का दूसरा दिन जनहित के मुद्दों पर चर्चा के साथ समाप्त हो गया। इस अधिवेशन में मेयर नवीन जैन ने एक अहम घोषणा यह की कि महानगर में सड़कों पर घूमते गोवंश को गोशाला में रखकर उनके लिए समुचित व्यवस्थाएं किए जाने के लिए गो सेस लगाया जाएगा। मतलब यह कि गायों के लिए नगर निगम शहरवासियों पर थोड़ा आर्थिक भार डालेगा। इस सेस से होने वाली आय को गायों की सेवा में खर्च किया जाएगा। इसके साथ ही कंगाल नगर निगम ने पार्षदों को अंडमान निकोबार में स्टडी टूर पर भेजने का प्रस्ताव भी पारित किया है। कई मुद्दों को लेकर विपक्षी खासकर बसपा के पार्षदों ने सदन का बायकॉट कर दिया। बाद में अधिवेशन में जनसमस्याओं पर सार्थक चर्चा भी हुई। विकास कार्यों के लिए 22 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी गई।

नगर निगम सदन की बैठक सोमवार को शुरू हुई थी। पहले दिन बहुत देर तक चले हंगामे की वजह से सारे प्रस्तावों पर चर्चा न हो पाने पर मेयर नवीन जैन ने अधिवेशन को अगले दिन भी जारी रखने की घोषणा की थी। मंगलवार को अपराह्न दो बजे के बाद से शुरू हुई बैठक में हंगामे की नौबत बन गई। विपक्षी बसपा पार्षदों ने कुछ मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू किया तो सत्ता पक्ष भाजपा के पार्षद उनके सामने आकर नारेबाजी करने लगे। दोनों ओर से शोरगुल होता रहा।

ज्यादातर पार्षद चाहते थे कि जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो। मेयर नवीन जैन ने इसकी अनुमति दे दी। पार्षद राकेश जैन, रवि माथुर, प्रकाश केशवानी, मोहन लोधी, नवल तिवारी, सुभाष भिलावली, गुड्डू राठौर, ओपी धाकड़, कन्हैया लाल, श्यामवीर सिंह, कमलेश, संजीव चौबे, बबलू लोधी, पंकज माहौर, जगदीश पचौरी, राहुल चौधरी, श्रवण कश्यप, मंजू वार्ष्णेय, बच्चू सिंह, जय सिंह सरदारा, शोभाराम, नेहा गुप्ता, कर्मवीर, राजेश प्रजापति, अनुराग चतुर्वेदी, गुलाब सिंह समेत अन्य ने चर्चा में भाग लिया। इन पार्षदों ने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन न होने,  नालियों और सड़कों की नियमित सफाई न होने जैसे मुद्दे उठाते हुए अधिकारियों को घेरा।

डलाबघरों से रोजाना कूड़ा न उठने की शिकायत भी पार्षदों ने की। कहा कि नगर निगम में विभाग होते हुए भी शहर में घूमते आवारा पशुओं पर नियंत्रण नहीं हो रहा, जिससे लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। रोक के बावजूद प्लास्टिक बैग और पॉलीथिन के धड़ल्ले से उपयोग पर भी पार्षदों ने अधिकारियों की खिंचाई की। एमजी रोड के चौराहों पर ट्रैफिक नियंत्रण के लिए जेब्रा लाइन नहीं दिखती। पार्षदों का कहना था कि प्रवर्तन दल होने के बावजूद शहर अतिक्रमणों से मुक्त नहीं हो पा रहा। कुछ पार्षदों ने सफाई कर्मचारियों की वर्दी का मुद्दा उठाया। ज्यादातर पार्षदों ने अपने वार्डोंं में समुचित सफाई न होने, पेयजल संकट और सीवर उफाने जैसे मामले भी उठाए। 

पार्षद रवि बिहारी माथुर और राकेश जैन ने बगैर कार्ययोजना के डस्टबिन, जालीदार रिक्शों और तीन पहिया रिक्शों की खरीद पर सवाल उठाए। इन दोनों पार्षदों के प्रस्ताव पर इस खरीद को करने वाले अधिकारियों की जांच कराने का प्रस्ताव पास किया गया। पार्षदों का कहना था कि डस्टबिन बांटने का कोई लाभ नहीं हुआ। रिक्शे वार्ड कार्यालयों में जंग खा रहे हैं। रिक्शों से कूड़ा कलेक्ट करने को पर्याप्त कर्मचारी नहीं थे तो इन्हें खरीदा क्यों गया। डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली कंपनी न होने के कारण भी ये रिक्शे में उपयोग में नहीं लाए जा पा रहे।

पार्षद ब्रज मोहन ने सदर भट्टी वाल्मीकि वाटिका में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा न लगाए जाने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इस आशय का प्रस्ताव पहले से पास है।

दो मार्गो का नामकरण
नगर निगम सदन में पारित हुए दो प्रस्तावों में शहर के दो मार्गों को नया नाम दिया गया। अनुराग चतुर्वेदी व शरद चौहान समेत कई अन्य पार्षदों के प्रस्ताव पर बेलनगंज चौराहे से पथवारी देवी मंदिर तक का मार्ग स्वाधीनता सेनानी रोशन लाल गुप्त करुणेश रोड करने का निर्णय लिया गया। इसी प्रकार पार्षद सपना जैन के प्रस्ताव पर साई की तकिया से छीपीटोला चौराहे तक के मार्ग का नाम आचार्य ज्ञान सागर महाराज के नाम पर करने का फैसला हुआ। इस मार्ग पर जैन आचार्य ज्ञान सागर महाराज के नाम पर गेट भी बनेगा।

जर्जर टंकियां गिराई जाएंगी
नगर निगम कक्ष 87 के नटराजपुरम और शांताकुंज की जर्जर पानी की टंकियां गिराई जाएंगी। निगम के सदन में इस आशय का प्रस्ताव पास किया गया है। टंकियां जर्जर होने का मामला क्षेत्रीय पार्षद रवि शर्मा ने उठाया और बताया कि नटराजपुरम और शांताकुंज की टंकियां बहुत जर्जर हो चुकी हैं। इनसे कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हादसा न हो, इसके लिए जरूरी है कि इन टंकियों को सुरक्षित तरीके से गिरा दिया जाए।

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