March 2, 2021
आगरा इतिहास पॉलिटिक्स

डीएम दें तो सही कार्रवाई का नोटिस

  • जॉन्स मिल संपत्ति विवाद में 30 जनवरी से सड़कों पर आकर आंदोलन की चेतावनी
  • हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की कमेटी से जांच कराने की मांग
  • डीएम को नहीं है मौलिक अधिकारों के हनन का अधिकार
  • वैध बैनामा धारकों के बैनामा शून्य भी नहीं कर सकते डीएम
  • जिलाधिकारी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में कर रहे अतिक्रमण

जॉन्स मिल संपत्ति विवाद में जिला प्रशासन की एकपक्षीय उत्पीड़नात्मक कार्यवाही के खिलाफ संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति ने 30 जनवरी के बाद सड़कों पर आकर आंदोलन की घोषणा कर दी है। साथ ही समिति इस मामले में जल्द ही मुख्य सचिव से मुलाकात कर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर मामले की जांच का आग्रह करेगी। समिति ने प्रशासन के दावों की पोल खोलते हुए तमाम साक्ष्य प्रस्तुत किए। वे चाहते हैं कि प्रशासन उन्हें कार्रवाई का नोटिस दे या एफआईआर दर्ज कराए, ताकि उनको न्यायालय में जाकर न्याय मांगने का मौका मिले।
जॉन्स मिल संघर्ष समिति ने जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर प्रांगण में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि वे बैनामा धारक हैं, कब्जा धारक नहीं हैं। प्रशासन उन्हें कब्जा धारक कहना बंद करे। समिति के सदस्यों ने प्रशासन से उनके सवालों का जबाव देने की चुनौती दी है। समिति का सवाल है कि उनकी भूमि को सरकारी भूमि बताने वाले विभाग पहले यह बताएं कि उन्होंने आज तक कब-कब इस क्षेत्र की ठीया बंदी की है? जब पूर्व में हुई जांचों में प्रशासन के आला अधिकारी यह पुष्टि कर चुके हैं कि वे ही इसके मालिक हैं, तब फिर उन जांच रिपोर्टों को वर्तमान प्रशासन क्यों नजरअंदाज कर रहा है? जब पहले इन जगहों को गैर सरकारी जगह माना गया है तो फिर अब ये सरकारी कैसे हो गईं? उन्होंने जिला प्रशासन से 23 खसरों की 128 बीघा भूमि के सरकारी स्वामित्व होने के दस्तावेज सौंपने की मांग की।

बैनामे शून्य कैसे ? – जॉन्स मिल संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार जिलाधिकारी को बैनामे शून्य करने का अधिकार नहीं है। यह प्रक्रिया अनुचित और अवैध है। जिलाधिकारी बताएं कि किस नियम और किस कानून के तहत वे वैध बैनामों को शून्य घोषित कर रहे हैं।

उपलब्ध नहीं करा रहे अभिलेख – प्रशासन ने 30 जनवरी तक राजस्व सम्बंधी अभिलेखों के साथ अपना पक्ष रखने की बात कही है, लेकिन सम्बंधित बाबू अभिलेखों की प्रतिलिपि उपलब्ध कराने के बजाय, यह कह रहे हैं कि मामले की जांच चल रही है। सभी कागजात कप्तान साहब के कार्यालय में पहुंचा दिए गए हैं। सदस्यों ने सवाल किया कि ऐसे में वे प्रामाणिक तथ्यों के साथ अपनी बात कैसे रखें। सब कुछ एक तरफा चल रहा है। उन्हें अपनी बात कहने का भी मौका नहीं मिल रहा।

आमजन के मध्य फैला रहे भ्रांति – संघर्ष समिति ने कहा कि जिला प्रशासन को शायद न्यायालय पर भरोसा नहीं है इसीलिए वो नोटिस आदि की विधिक कार्रवाई के बिना केवल समाचार माध्यमों से सूचित कर रहे हैं। उनके इस अनुचित रवैये से आमजन के मध्य भ्रांति फैल रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक प्रशासन के हर वैध सर्वे और वैध तरीके से की गई हर जांच में पूर्ण सहयोग किया है। प्रशासन संभ्रांत नागरिकों और सारे कर अदा करने वाले व्यापारियों को हथकड़ी डालने की तैयारी कर रहा है। इसके विरुद्ध जन आक्रोश बढ़ रहा है।

मौलिक अधिकारों का हनन – संघर्ष समिति ने कहा कि जिलाधिकारी ने बिजली-पानी और मरम्मत आदि के कामों पर रोक लगा दी है, जबकि बिजली- पानी आम आदमी का मौलिक अधिकार है। इस पर रोक कानूनी अपराध है।

जवाब देने से कतरा रहा प्रशासन – संघर्ष समिति ने बताया कि उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्रशासन से पूछा था कि शहरी आबादी के अंदर किसी भी भूमि को खरीदते समय किन-किन सरकारी अभिलेखों को देखा जाना चाहिए और यह अभिलेख विगत कितने वर्षों तक के देखे जाने चाहिए पर इस आरटीआई का जवाब प्रशासन ने अभी तक नहीं दिया है। इन सवालों के जवाब प्रशासन देने से कतरा रहा है?। इससे उसकी मंशा संदिग्ध मालूम पड़ती है।

जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम मंदिर प्रांगण में जॉन्स मिल प्रकरण में व्यापारियों और यहां के बाशिंदों का पक्ष रखते व्यापारी नेता टीएन अग्रवाल। मंचस्थ हैं नेशनल चैम्बर के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेद्र सिंह रावत आदि। फोटो-एनएस

जांच पूरी कैसे? संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रशासन द्वारा की गई जांच के अभिलेख अधूरे हैं। एक ओर नगर निगम से पूरे प्रपत्र जिलाधिकारी को नहीं मिले हैं, वहीं राजस्व विभाग लखनऊ से भी टीम बैरंग लौट कर आई है। फिर अधूरे अभिलेखों के आधार पर जांच को पूर्ण कैसे मान लिया गया है?

शिकायतकर्ताओं की मंशा भी देखे प्रशासन – संघर्ष समिति ने जॉन्स मिल प्रकरण में शिकायत करने वाले लोगों की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह लोग राजनीति से जुड़े हैं और इस जांच से राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। साथ ही वे अवैध व चौथ वसूली में भी लिप्त हैं। आरोप लगाया कि इनका काम शिकायत करके पैसा वसूलना रहा है। संघर्ष समिति ने जिलाधिकारी से शिकायतकर्ताओं की भी जांच करने की मांग की।

खाटू श्याम मंदिर पर संकट पत्रकार वार्ता में उपस्थित खाटू श्याम के भक्तों ने भी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि खाटू श्याम मंदिर लाखों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। प्रशासन इसको तोड़ने की साजिश न रचे, अन्यथा ठीक नहीं होगा।

क्षेत्रीय लोग भी करेंगे आंदोलन – क्षेत्रीय निवासियों की ओर से दीपक सिंह तोमर ने कहा कि उनके बाप-दादा और पुरखे जॉन्स मिल में मजदूरी का काम करते थे। वे यहां दशकों से रह रहे हैं। अगर प्रशासन ने उनके आशियाने उजाड़े तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। गौरतलब है कि जॉन्स मिल लाइन से गरीब नगर तक जुड़ी बस्तियों में 35 हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं।

व्यापार मंडल बोला – आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल ने कहा कि क्योंकि यह मामला पूर्व में उच्च न्यायालयों में विचाराधीन है, इसलिए हाईकोर्ट के पूर्व जजों व रिवेन्यू टीम की कमेटी बनाकर नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जाए। इस मामले में वह व्यापारियों के साथ लखनऊ जाकर मुख्य सचिव से वार्ता करेंगे। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता पं. बृजेन्द्र रावत ने कहा कि 1940 में ही इस जमीन का मुम्बई हाईकोर्ट ने मालिकाना हक तय कर दिया है। उसी आधार पर बैनामे हुए हैं। आगरा शहर में यह जमीन नॉन जेडए में आती है। यह भूमि जमीदारी एव्यूलेशन एक्ट में नहीं आती है। इसलिए प्रशासन को अधिकार ही नहीं उक्त भूमि की जांच का।

प्रमुख संगठन आये साथ

जॉन्स मिल संघर्ष समिति से जुड़े व्यापारियों की इस लड़ाई में नेशनल चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, आगरा व्यापार मंडल और बार एसोसिएशन ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया है। पत्रकार वार्ता में आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल, नेशनल चेंबर के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश रावत एडवोकेट, खाटू श्याम मंदिर के अध्यक्ष अनिल मित्तल, जॉन्स मिल संघर्ष समिति के संरक्षक ब्रजमोहन अग्रवाल, दयानंद नागरानी, मुकेश जैन, अतुल बंसल, प्रमोद अग्रवाल, अनिल जैन, विशाल बंसल, हर्ष गुप्ता, पंकज बंसल, मनोज अग्रवाल, मनीष, उमाशंकर माहेश्वरी, अशोक (फरह), सुनील अग्रवाल, नित्यानंद शर्मा, संजय खंडेलवाल, प्रमोद गोयल आदि मौजूद रहे।

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