February 25, 2021
आगरा क्राइम ताजा

यौन शोषण में फंसे डॉ. जितेंद्र चौहान

  • मेघालय के केंद्रीय कृषि विवि का मामला, लंबे समय तक आरबीएस कॉलेज में रहे हैं तैनात
  • मुकद्मा दर्ज, डीन के पद से हटाए गए, मामले की जांच जारी, सुर्खियों में पूरा प्रकरण

आरबीएस कॉलेज (बिचपुरी कैम्पस) में कृषि प्रसार विभाग के अध्यक्ष रहे डॉ. जितेंद्र चौहान पर मेघालय में दो लड़कियों के यौन शोषण का मुकद्मा दर्ज हुआ है। डॉ. चौहान वहां उमियैम स्थित केंद्रीय कृषि विवि के डीन पद पर तैनात थे। आरोपों के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया है। पुलिस के अलावा विवि की एक कमेटी ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।

मेघालय में नॉंगपोह के महिला थाने में दर्ज मुकद्मे के अनुसार डॉ. चौहान पर दो युवतियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। युवतियों के अनुसार डीन ने जनवरी और फरवरी माह में उनका यौन शोषण किया। मुकद्मे के अनुसार डीन ने दोनों युवतियों के अलग-अलग दिन विवि के गेस्ट हाउस में बुलाया और यौन शोषण किया। आरोप यह भी है कि इसी विवि में तैनात राम सिंह नाम के कर्मचारी ने दोनों युवतियों को चुप रहने के लिए पैसे भी देने की कोशिश की। युवतियों के आरोप के आधार पर इम्फाल स्थित विवि मुख्यालय ने डॉ. चौहान को पदमुक्त कर दिया गया है। प्रो. प्रदीप कुमार बोरा नए डीन बनाए गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। विवि कर्मचारियों ने डॉ. चौहान को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग उठाई है। इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। विवि की एक स्वतंत्र कमेटी भी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।

युवती ने बरसाए थप्पड़, वीडियो वायरल
इस पूरे प्रकरण का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में विवि कर्मचारी (जिनमें शोषण का आरोप लगाने वाली महिलाएं भी शामिल हैं) डॉ. चौहान पर तमाम आरोप लगाते दिख रहे हैं। जिन पर डीन डॉ. जितेंद्र चौहान माफी मांग रहे हैं। बातचीत के दौरान ही एक युवती ने उनके थप्पड़ भी जड़ दिए। डॉ. चौहान ने विरोध किया तो अन्य कर्मचारी युवती के पक्ष में खड़े होते दिख रहे हैं।

कृषि मंत्री के ओएसडी भी रहे
डॉ. चौहान लंबे समय तक आरबीएस कॉलेज के बिचपुरी कैम्पस में तैनात रहे हैं। 2014 मेें केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार में कृषि मंत्री बने राधामोहन सिंह के ओएसडी भी रहे। ताजनगरी में राजनीतिक व सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं। फिलहाल कुछ समय से पूर्वोत्तर में तैनात थे।

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