March 2, 2021
आगरा कैरियर ताजा शिक्षा

आईएसएस में अब अर्थशास्त्र एवं राजनीतिशास्त्र भी

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संस्थानों में नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की तैयारी है। शीघ्र ही विवि परिसर स्थित इंस्टीट्यूट आॅफ सोशल साइंसेज में राजनीतिशास्त्र तथा अर्थशास्त्र की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इन विषयों के लिए कोई नए पद सृजित नहीं किए जा रहे। समाज विज्ञान संस्थान के खाली पड़े पदों पर ही राजनीति शास्त्र तथा अर्थशास्त्र के शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसे लेकर समाज विज्ञान संस्थान के शिक्षक मन ही मन कुढ़ रहे हैं।

एकेडमिक काउंसिल ने इन विषयों के लिए दी हरी झंडी, खाली पदों पर होगी शिक्षकों की नियुक्ति

बता दें कि कुलपति ने पदभार ग्रहण के थोड़े दिन बाद ही आश्चर्य व्यक्त किया था कि ह्युमेनिटीज के अंतर्गत राजनीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र जरूरी विषय हैं। इन विषयों को विश्वविद्यालय द्वारा कैसे छोड़ दिया गया है। बाद में कुलपति ने जब सोशल साइंस इंस्टीट्यूट के स्टेट्यूट का अध्ययन किया तो उसमें साफ लिखा हुआ था कि सोशल साइंस इंस्टीट्यूट में अर्थशास्त्र (जिसमें सांख्यिकी शामिल है), राजनीतिशास्त्र (इंटरनेशनल रिलेशन सहित) तथा समाजशास्त्र जिसमें सोशल साइकोलॉजी तथा सोशल एंथ्रोपॉलोजी शामिल है, की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। आश्चर्य की बात है कि सोशल साइंस इंस्टीट्यूट के गठन के बाद से ही इन विषयों की ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया गया।

पता चला है कि कुलपति ने इस बारे में सोशल साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. दिवाकर खरे से लिखित प्रस्ताव भी ले लिया है कि सोशल साइंस इंस्टीट्यूट में अर्थशास्त्र तथा राजनीति शास्त्र की कक्षाएं संचालित की जाएं। इसके लिए इन विषयों के योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। इस प्रस्ताव को विवि की एकेडमिक काउंसिल से भी हरी झंडी मिल चुकी है। इससे इन विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। शीघ्र ही इन विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी तथा राजनीति शास्त्र तथा अर्थशास्त्र की कक्षाएं भी शुरू की जा सकेंगी। कुलपति की योजना आने वाले समय में इतिहास विभाग को भी आईएसएस में शामिल करने की है। अभी तक इतिहास विभाग अलग स्वायत्त रूप से चल रहा है।

इन विषयों के लिए समाज विज्ञान संस्थान के खाली पड़े पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर संस्थान के शिक्षक मन ही मन दुखी हैं। उनका मानना है कि इन विषयों के लिए नए पदों का सृजन कर नियुक्ति करनी चाहिए, हालांकि इस बारे में बोलने अथवा विरोध करने का साहस कोई शिक्षक नहीं कर पा रहा है।

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