February 28, 2021
आगरा आम मुददे लाइफ स्टाइल

मम्मी-पापा की लड़ाई में खतरे में मुन्ना की पढ़ाई

  • काउंसलर्स का कहना- दंपति को समझाकर कराया जाता है समझौता
  • कई बच्चों की पढ़ाई अटकी हुई, बच्चों की भी नहीं करते हैं चिंता

जगदीशपुरा के किशोरपुरा की रहने वाली सरिता (काल्पनिक नाम) की शादी सदर के गोपालपुरा निवासी सुरेंद्र सिंह से हुई थी। शादी को दस साल हो गए हैं। बेटा पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। इतने वर्ष बाद दोनों के बीच का विवाद थाने की चौखट तक पहुंच गया। दोनों ही एक दूसरे के साथ रहने को तैयार नहीं हो रहे थे। दो साल से दोनों में विवाद हो रहे थे। बेटे की पढ़ाई भी डिस्टर्ब हो रही थी। एक साल तो उसकी पढ़ाई भी छूट गई थी। स्कूल की परीक्षा में वह फेल भी हो गया था। जब इस बात की जानकारी काउसंलर्स को हुई तो उन्होंने दोनों को समझाया और बच्चे का वास्ता देकर सुलह करा दी। दोनों में ही कमियां थीं, लेकिन अब दोनों ठीक प्रकार से रह रहे हैं।

ऐसा ही शाहगंज की रहने वाली रिया (बदला नाम) के साथ हुआ। शादी के 13 वर्ष पति से विवाद हुआ। यह मामला भी काउंसिलिंग के लिए परिवार परामर्श केंद्र में चल रहा है। दोनों के विवाद का असर बेटी पर पड़ा है। बेटी की पढ़ाई डिस्टर्ब हुई। बेटी कई बार मम्मी के साथ मायके में आई तो कभी समझौता होने पर पिता के घर आ गई। गुस्से में आकर बेटी ने किताबों को फेंक दिया। मां के साथ काउंसलिंग में जब बेटी आई तो उसने काउंसलर्स को जो बताया, उसे सुनकर होश उड़ गए। उसने कहा कि उसकी परीक्षा थी। लेकिन मम्मी-पापा को लड़ाई से मतलब था।

यह दो मामले महज उदाहरण भर हैं। और भी कितने मामले ऐसे हैं जो इस बात को जाहिर करते हैं कि मां-बाप की लढ़ाई में बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है। लेकिन अहम की लड़ाई में मां-बाप को इस बात से कोई सरोकर नहीं है।

दोनों के परिवारों को समझना चाहिए
कुछ पुलिसकर्मियों से भी बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह बात बिल्कुल ठीक है कि मां-बाप की लड़ाई में बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब हो जाती है, लेकिन ऐसा लोग कोई सोचता नहीं है। लड़का-लड़की दोनों ही पक्षों की गलती होती है। वह तो दोनों के परिवारों को इस मामले में दोषी मानते हैं। चंूकि लड़के के परिजन चाहते हैं कि बहू झुके और बहू के परिजन चाहते हैं कि लड़का झुके। परिजनों की आपस की नाक की लड़ाई में ही बच्चों का भविष्य चौपट हो जाता है।

क्या कहते हैं काउंसलर्स
काउंसलर्स का कहना है कि जब बच्चा पढ़ने का लायक हो जाता है तो मां-बाप को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। उनके आपसी झगड़ों का प्रत्यक्ष रूप से बच्चों पर असर पढ़ता है। जब घर में झगड़ा होता देखते हैं तो बच्चे अवसाद में आ जाते हैं। बच्चों के मां और बाप दोनों को ही समझना चाहिए। एक-दूसरे की बातों को लेकर कभी प्रतिष्ठा नहंी बनानी चाहिए। काउंसलिंग के दौरान कई बार सामने आया है कि मामूली बातों पर विवाद हुआ। फिर धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि जीवन कानूनी प्रक्रिया में उलझ गया।

बबलू कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

गृहस्थ जीवन में आ रहे तनाव के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। इस पर महिला थाना प्रभारी और परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी को निर्देश दिए गए थे कि कोशिश की जाए कि किसी का घर न टूटे। बेहतर काउंसलिंग के जरिये समझौता कराया जाए।’

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