February 27, 2021
आगरा इतिहास पॉलिटिक्स

आज फिर से नये मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई

  • जॉन्स मिल संपत्ति विवाद
  • संघर्ष समिति के सदस्यों की याचिका पर बुधवार को हुई थी सुनवाई
  • जिलाधिकारी को 22 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश

जॉन्स मिल संपत्ति मामले में प्रशासन की जांच पर अंगुलियां उठने के साथ ही मामला अब कानूनी पेचीदगियों में फंस गया है। अभी तक शांत बैठे वैध बैनामाधारकों ने प्रशासन की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देने के साथ ही शासन स्तर भी पैरोकारी तेज कर दी है। हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान लेते हुए बुधवार को जिलाधिकारी को 22 फरवरी तक जबाव दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इधर जिलाधिकारी के स्तर से मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। शासन के निर्देश पर ही अब कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इस मामले में बैनामाधारकों द्वारा सौंपे गए कागजातों की जांच जारी रहेगी।

जॉन्स मिल परिसर में रहने वाले बैनामाधारकों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पानी, बिजली, रजिस्ट्री आदि पर जिलाधिकारी की रोक के आदेश को चुनौती दी गई थी। बुधवार को इस मामले ने सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता और याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की जिरह सुनने के बाद मामले जिलाधिकारी को 22 फरवरी तक जबाव दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचियों के अधिवक्ता का कहना है कि जिलाधिकारी जनता के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं। किसी भी व्यक्ति को हवा, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट में पैरवी करने पहुंचे जॉन्स मिल संघर्ष समिति सदस्य हाईकोर्ट के रूख को देख उत्साहित हैं। उनका मानना है कि उन्हें न्याय निश्चित रूप से मिलेगा।

इधर एक अन्य मामले में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में आज फिर से सुनवाई होनी है। मामला है बंगला नंबर 13 के बीमा अस्पताल नाम से प्रसिद्ध करीब 3000 वर्ग जमीन का। इस मामले में पूर्व पार्षद सलीम उस्मानी ने वर्ष 2014 में अशोक अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल और गोविंदा हाउसिंग लिमिटेड पर फर्जी बैनामा कराकर उस पर बिल्डिंग बनाने की शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी से की थी। इस मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट ने जांच की थी। उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड देखने के साथ ही दोनों पक्षों को भी साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता की ओर से साक्ष्य वैध नहीं पाए गए थे। जांच में शिकायत को झूठा पाया गया।

बाद में यह मामला न्यायालय में भी चला गया। वहां पर जिलाधिकारी की ओर से वर्ष 2017 में जांच रिपोर्ट को हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसी को आधार बनाकर अशोक अग्रवाल की ओर से जिलाधिकारी की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट कर दिया गया है कि उनके द्वारा कराए गये बैनामे विधिवत हैं तो अब उनको गलत कैसे ठहराया जा सकता है। अशोक अग्रवाल की याचिका पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई हो रही है।

इधर जॉन्स मिल के अन्य लोगों ने भी हाईकोर्ट का रूख कर लिया है। स्थिति यह है कि हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। प्रशासन की ओर से एक अधिकारी ने वहीं डेरा डाल लिया है।

इधर इस मामले को लेकर कुछ लोगों ने शासन स्तर भी शिकायत की है। उनकी शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन से जानकारी ली गई है। इस मामले में जिलाधिकारी की ओर से भी कहा गया है कि इस मामले की जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। वहां के निर्देश के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। हालांकि एडीएम आतिथ्य के यहां जिन लोगों ने कागजात दाखिल किए हैं, उनकी जांच जारी रहेगी।

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