March 2, 2021
आगरा शिक्षा

आमदनी है अठन्नी, खर्चा हो रहा रुपैया

  • कई विभागों में शिक्षकों के अनुपात में छात्र संख्या बहुत कम
  • इनके शिक्षकों को लाखों रुपये हर माह वेतन दिया जा रहा है
  • छात्र न बढ़े तो यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसर्स की हो जाएगी छुट्टी

डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्रों द्वारा दी गई फीस का अपव्यय जोरों पर है। विवि के कई विभाग ऐसे हैं जहां छात्र संख्या ना के बराबर है जबकि विभाग के शिक्षकों पर विश्वविद्यालय लाखों रुपये प्रतिमाह खर्च कर रहा है। छात्र संख्या में यह कमी इन विषयों में एमफिल बंद होने के कारण हुई है। बता दें कि नई शिक्षा नीति में एमफिल पर रोक लगा दी गई है। विवि के कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि जिन विभागों में छात्र संख्या बहुत कम है, अगर अगले वर्ष भी यही स्थिति रही तो ऐसे विभागों के शिक्षकों को हटा देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा।

बता दें कि विवि के भाषा विज्ञान, सांख्यिकी तथा इतिहास विभाग में एमफिल की कक्षाएं भरी रहती थीं। इसका कारण यह था कि एमफिल करने वाले छात्रों को पीएचडी में वरीयता दी जाती थी। नयी शिक्षा नीति में एमफिल पर रोक लगा दी गई।

यही कारण है कि विवि द्वारा छात्रों के प्रवेश के लिए निकाले गए विज्ञापन में एमफिल हटा दिया गया। अब केवल इन विभागों में एमए की कक्षाएं संचालित हो रही हैं।

विवि के केएम इंस्टीट्यूट में भाषा विज्ञान में एमए का पाठ्यक्रम संचालित है। इस पाठ्यक्रम में कुल 12 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जबकि इस विभाग में चार असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एक वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। इनकी सैलरी पर ही विश्वविद्यालय लाखों रुपये खर्च करता है। इसी प्रकार एमए सांख्यिकी में छात्र संख्या आठ है जबकि पूर्व के सेमिस्टर में भी छात्र संख्या आठ ही है। कुल मिलाकर छात्र संख्या बीस से कम है, जबकि सांख्यिकी विभाग में चार स्थायी शिक्षक कार्यरत हैं।

इसी प्रकार विश्वविद्यालय में संचालित एमए इतिहास में चार प्रोफेसर्स तथा दो अतिथि शिक्षक हैं जबकि छात्र संख्या बीस से कम है। इस विभाग में भी जब एमफिल संचालित हो रहा था तो एमफिल की कक्षाएं पीएचडी में वरीयता मिलने के कारण भरी रहती थीं। कमोबेश यही स्थिति विवि में चल रहे अधिकांश विभागों में है। इन विभागों के शिक्षकों का कहना है कि वे शोध कार्य भी करवाते हैं पर शोध कार्य शिक्षक के वर्क लोड में शामिल नहीं किया जाता।

प्रो. अशोक मित्तल, कुलपति

‘इस वर्ष वह विभिन्न विभागों में छात्र संख्या और शिक्षकों के अनुपात का आंकलन कर रहे हैं। अगले वर्ष इन विभागों में कार्यरत शिक्षकों को ही छात्र संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। जिन विभागों में छात्र संख्या कम रहेगी, उस विभाग के अतिरिक्त शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा।’

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