February 26, 2021
आगरा लाइफ स्टाइल शिक्षा

82% गर्ल्स स्टूडेंट्स में इंटरनेट एडिक्शन

  • 17.6 प्रतिशत बॉयज स्टूडेंट्स भी एडिक्शन के शिकार
  • पोर्न साइट्स के लिए 12 प्रतिशत स्टूडेंट्स प्रयोग करते हैं इंटरनेट

इंटरनेट एडिक्शन की समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। लड़कियों में इस एडिक्शन के मामले लड़कों की तुलना में अधिक हैं। एफएच मेडिकल कॉलेज में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि 82. 4 प्रतिशत गर्ल्स स्टूडेंट इंटरनेट एडिक्शन की शिकार हैं, जबकि लड़कों में यह प्रतिशत कुल 17.6 है। इस एडिक्शन का प्रभाव उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ता है।

एफएच मेडिकल कॉलेज एत्मादपुर में 109 नर्सिंग स्टूडेंट्स पर यह अध्ययन किया गया। अध्ययन में शामिल स्टूडेंट्स में 66.1 प्रतिशत गर्ल्स तथा 33. 9 प्रतिशत बॉयज स्टूडेंट थे।  बता दें कि समय के साथ इंटरनेट का प्रयोग देश में बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत में 700 मिलियन इंटरनेट यूजर्स हैं। इंटरनेट के अधिक प्रयोग के कारण इससे होने वाले दुष्प्रभाव भी बढ़ रहे हैं। 1995 में डॉ. इवान गोल्डबर्ग ने इंटरनेट के अधिक प्रयोग से होने वाली साइकॉलोजिकल, फिजिकल तथा पढ़ाई पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए इंटरनेट एडिक्शन के टर्म का प्रयोग किया। तीन से पांच घंटे प्रतिदिन तक इंटरनेट के प्रयोग को एडिक्शन की संज्ञा दी गई।

एफएच मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर पी. शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर एएस मेहता तथा एच सिंह और प्रोफेसर एससी गुप्ता द्वारा किया गया यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड मेडीकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में पाया गया कि 92 प्रतिशत स्टूडेंट एजुकेशन में मदद के लिए, 67.9 प्रतिशत  मनोरंजन, 54.1 प्रतिशत सोशल साइट्स, 31.2 प्रतिशत ई मेल तथा 11.9 प्रतिशत स्टूडेंट्स पोर्न साइट्स देखने के लिए इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। अध्ययन में शामिल स्टूडेंट्स में से लगभग चार प्रतिशत एल्कोहल तथा दो प्रतिशत स्मोक करने के आदी थे। अध्ययन के निष्कर्ष में कहा गया है कि इंटरनेट एडिक्शन का प्रभाव छात्र के साइकोलॉजिकल, फिजिकल तथा सोशल संबंधों पर पड़ता है। जरूरी है कि स्टूडेंट्स को समय-समय पर काउंसलिंग के माध्यम से इंटरनेट के सेफ यूज तथा एडिक्शन से बचने के बारे में बताया जाए। 

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