February 26, 2021
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बजट को सिर्फ आयकर तक रखना उचित नही

वित्त सचिव अजय भूषण पांडे का कहना है कि केंद्रीय बजट को केवल इनकम टैक्स छूट के आईने में देखना सही नहीं है। यह बजट पूरे 138 करोड़ लोगों के लिए बनाया गया है। बजट बनाते समय देश की इकोनॉमी के सभी पहलुओं पर ध्यान दिया गया है। जितना हो सका मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में बजट को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। आम आदमी पर कोई अतिरिक्त भार नहीं डाला गया है।

अजय भूषण पांडे ने कहा कि बजट का मतलब सिर्फ इनकम टैक्स छूट तक ही सीमित नहीं है। बजट का मतलब है कि देश को चलाने के लिए आमदनी व खर्चे को लेकर तैयारी करना। बजट को समग्रता में देखना चाहिए। इस वक्त सरकार की आमदनी की क्या स्थिति है। लॉकडाउन के कारण टैक्स कलेक्शन में गिरावट का दौर चल रहा था। अब जाकर स्थिति में सुधार आया है। मगर जनवरी में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में तय लक्ष्य से 6.7 फीसदी की गिरावट कायम है। कोविड के कारण खर्चा बढ़ा है। लोगों को इनकम टैक्स छूट के अलावा अन्य सुविधाएं भी देनी हैं। खर्च व आमदनी के बीच तालमेल बैठाना है। बजट को सीमित दायरे में रहकर देखनी की आदत को छोड़ना होगा। अगर इनकम में छूट नहीं मिली तो बजट को गलत करार देना तर्कसंगत नहीं है।

देश के 138 करोड़ लोगों के लिए बनता है बजट-वित्त सचिव

उन्होंने कहा कि मिड्ल क्लास को पीएफ पर ब्याज से कोई झटका नहीं लगेगा। हमने पूरी स्टडी करने के बाद यह फैसला किया है। इस फैसला का असर एक फीसदी इनकम टैक्स पेयर्स पर होगा, जिनकी सैलरी ज्यादा है। आप जानते हैं कि 138 करोड़ की आबादी वाले देश में सात करोड़ या उससे ज्यादा लोग बेशक इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं मगर सिर्फ 1.70 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। बाकी लोग इनवेस्टमेंट छूट या अन्य छूटों का लाभ लेकर टैक्स को बचा लेते हैं। इस फैसला का असर इन 1.70 करोड़ में से सिर्फ एक फीसदी इनकम टैक्स पेयर्स पर पड़ेगा। यह कहना गलत होगा कि बजट में मिड्ल क्लास या आम आदमी का इस फैसले पर असर होगा। एक और बात मैं कहना चाहूंगा कि यह एक फीसदी लोग पीएफ में ज्यादा पैसा निवेश करते हैं तो इस पर ब्याज देना पड़ता है उसका भुगता तो ईमानदार टैक्स पेयर्स के पैसे से किया जाता है।

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