March 3, 2021
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“माँ तुझे प्रणाम”

असहनीय कष्ट सहे पर वहशी पति को उसके किए की सजा के अंजाम तक पहुंचाया एक मां ने

  • ससुराल छोड़ बच्चों को लेकर मायके आ गई थी यह मां, कठोर कदम उठाते समय थी भविष्य की चिंता
  • समाज ही नहीं प्रकृति का भी दोषी है अभियुक्त, बच्ची को पिता के कृत्य के कलंक के साथ जीना होगा

मशहूर शायर मुनव्वर राना का एक शेर है, ‘कुछ नहीं होगा तो आंचल में छुपा लेगी मुझे, मां कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी’। यह शेर उस मां पर सटीक बैठ रहा है जिसने अपनी बेटी को केवल आंचल में ही नहीं छुपाया वरन उस वहशी दरिंदे को सलाखों के पीछे भी पहुंचाया, जो अपने घृणित काम से पति और बेटी का पिता कहलाने का अधिकार खो चुका था। प्रणाम है ऐसी मां को, जिसके एक ओर मां की ममता थी तो दूसरी ओर पति के होते हुए भी एकाकी जीवन। उसे ससुराल छोड़नी पड़ी, पांच सालों में बहुत से दबाव आए, हर दिन  डर के साए में जीना पड़ा। बेटी के उदास चेहरे और आखों में दिखते खौफ ने उसके मातृत्व को संबल दिया, बल दिया और अंतत: वह उस दरिंदे को सजा दिलाने में सफल हुई जिसने उसकी बेटी के सपनों को अपनी वासना तले रौंदा था।

थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में पिता द्वारा अपनी ही बेटी से दस दिन तक लगातार बलात्कार के मामले में कोर्ट ने आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) वीके जायसवाल ने इस कृत्य को बहुत गंभीर मानते हुए अभियुक्त को अंतिम सांस तक कारावास में रखने का आदेश दिया है। इस संबंध में दस जून 2015 को मां ने मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज कराने की उसकी जद्दोजहद भी कम नहीं थी। गरीब परिवार की इस महिला से पुलिस ने थाने के चक्कर लगवाए। इस बीच सामाजिक दवाब भी बना लेकिन महिला ने हिम्मत नहीं हारी और मामला कोर्ट तक पहुंचा दिया। कोर्ट ने महिला के पक्ष में निर्णय सुनाया।

पांच साल तक तिल-तिल कर जली मां-बेटी
पांच साल लम्बी कानूनी लड़ाई में वह मां और बेटी हर दिन तिल-तिल कर जली, जिन्हें अपने ने ही जख्म दिए थे। पीड़िता की मां को जब अपने पति के कुकृत्य की पता चली तो उसकी क्या स्थिति रही होगी, इसका अंदाजा किया जा सकता है। एक तरफ बेटी तो दूसरी तरफ पति। पहाड़ जैसी जिंदगी कैसे कटेगी, जैसे तमाम सवाल पीड़िता की मां के जेहन में कौंध रहे थे जब उसने अपने वहशी पति को किए की सजा दिलाने की ठानी। अंतत: ममता जीती। उसने सजा दिलाने की ठानी। तमाम पापड़ बेले पर हार नहीं मानी। पांच साल तक यह मां हर दिन न्याय का इंतजार करती रही।

ये मनुष्य नहीं असभ्य, पशु से भी बदतर- कोर्ट
फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश पास्को वीके जायसवाल ने बहुत सख्त टिप्पणी की। कहा कि इस व्यक्ति ने हजारों साल से भी अधिक समृद्ध भारतीय परम्परा और संस्कारों का घोर अपमान किया है। अभियुक्त मनुष्य नहीं बल्कि असभ्य पशु से भी बदतर है। वो समाज का ही नहीं बल्कि प्रकृति का भी अपराधी है। उसने कुकर्म करते समय एक बार भी नहीं सोचा कि उसकी मासूम बच्ची के मन-मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ेगा। बच्ची को पिता द्वारा उसके प्रति किए गए कलंक के साथ जीना होगा।
अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता का तर्क था कि उसकी मां बुजुर्ग है। देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उसका पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। अत: अभियुक्त को कम से कम सजा दी जाए। महिला की ओर से पक्ष रख रहीं विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) विमलेश आनंद ने आरोपित के खिलाफ कठोरतम सजा की मांग रखी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि मां की अनुपस्थिति में पिता ही बेटी का रखवाला होता है। सभ्य समाज में इस बात की कल्पना नहीं की जा सकती कि कोई पिता अपनी ही सगी पुत्री के साथ इस प्रकार का अमानवीय, निंदनीय एवं शर्मनाक कृत्य कर सकता है। सामान्यत: कोई भी पिता अपनी पुत्री के लिए जान छिड़कता है। अपनी पुत्री की भलाई के लिए कोई पिता कुछ भी त्याग कर सकता है। न्यायाधीश ने एक मर्मस्पशी कविता के साथ कहा कि अभियुक्त के अपराध के लिए कठोरतम सजा दी जाए ताकि यह संदेश पहुंचे कि सभ्य समाज में ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है।

विमलेश आनंद, विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो)

कोर्ट ने दोनों पक्षों को बहुत ध्यान से सुना और समाजहित में फैसला सुनाया। पीड़ित पक्ष ने भी बहुत मजबूती से धैर्य बनाए रखा। पांच साल तक मां और बेटी ने लड़ाई लड़ी। इस तरह की घटनाएं समाज को झकझोर जाती हैं। आज के सभ्य समाज में कोई भी व्यक्ति ऐसा सोच भी नहीं सकता। बतौर महिला केस की बारीकियों पर काम किया और न्यायालय में पक्ष रखा। फैसले का स्वागत करते हैं।

बसंत गुप्ता,
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी)

पिता और पुत्री का रिश्ता बेहद खास होता है। मां की अनुपस्थिति में पिता ही बेटी का ध्यान रखता है। पिता अपनी बेटी की खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है। यह घटना सामाजिक ताने-बाने को छिन्नभिन्न करने वाली है। इस तरह के न्यायिक फैसलों से लोगों का कोर्ट और कानून के प्रति विश्वास और बढ़ेगा।

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