February 26, 2021
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जमा करनी होगी पूरी स्कूल फीस

  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला, राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
  • पांच मार्च से स्कूल वसूल सकेंगे पैसा, छह किश्तों में करना होगा जमा

प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर अभिभावकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने अभिभावकों को पूरे साल की फीस का 100 फीसदी (पूरी फीस) भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फीस राहत के फैसले पर भी रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने अभिभावकों को राहत देते हुए फीस छह किस्तों में चुकाने का आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यूपी समेत देश के सभी राज्यों के स्कूलों के लिए नजीर बनेगा।

कोरोनाकाल में ऑनलाइन क्लासेज के दौरान अभिभावकों ने फीस में रियायत की मांग की थी। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राहत देते हुए फीस में छूट दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाते हुए सोमवार को नया आदेश जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के अनुसार अभिभावकों को स्कूल की पूरी फीस चुकानी होगी। पांच मार्च से स्कूल अपनी फीस वसूल सकेंगे। कोर्ट के आदेश के अनुसार साल 2019-20 में तय फीस के हिसाब से स्कूल प्रबंधन द्वारा फीस ली जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्राइवेट स्कूल बढ़ी हुई फीस नहीं ले सकेंगे। पांच मार्च से सत्र 2019-20 में तय फीस के हिसाब से ही वसूली की जाएगी। हालांकि पूर्व में महज ट्यूशन फीस का 70 फीसदी देना तय हुआ था लेकिन अब पूरी फीस चुकानी होगी। कोर्ट ने अभिभावकों को राहत देते हुए इस फीस को छह किश्तों में जमा करने का आदेश भी दिया है।

फीस जमा न होने पर भी नहीं कटेगा नाम- कोर्ट
कोर्ट ने कहा है कि जो अभिभावक फीस नहीं दे पाए हैं, उनके बच्चों को परीक्षा या कक्षाओं से बेदखल नहीं किया जा सकेगा। फीस वसूली के लिए विद्यालय प्रबंधन उन पर अनावश्यक दबाव नहीं बना सकेगा। कोर्ट के स्कूल संचालकों को यह भी आदेश दिया है कि फीस जमा न होने की स्थिति में किसी भी विद्यार्थी को स्कूल से हटाया नहीं जाएगा।

स्कूलों ने खटखटाया था सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
राजस्थान हाईकोर्ट के बाद स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। राजस्थान हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस इंद्रजीत महांति की खंडपीठ ने निजी स्कूल फीस विवाद मामले में अभिभावकों को राहत दी थी। कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिन निजी स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई कराई है, वे ट्यूशन फीस की 70 फीसदी धनराशि ही फीस के तौर पर ले सकेंगे। इस मामले में राजस्थान के प्राइवेट स्कूलों की ओर से याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए नया आदेश जारी किया है।

खिले स्कूल संचालकों के चेहरे
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ताजनगरी के स्कूल संचालकों के चेहरे भी खिल गए हैं। अप्सा अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि स्कूलों की ओर से लॉकडाउन और कोरोनाकाल में समाजहित में कई कार्य किए गए। अब जनजीवन पटरी पर लौट आया है लेकिन स्कूलों को फीस न मिलने के कारण काफी परेशानी हो रही है। कोर्ट के इस फैसले का संस्था स्वागत करती है।

कई स्कूल कर रहे मनमानी- पापा
फीस को लेकर संघर्ष कर रही संस्था पापा का कहना है कि कोर्ट ने फीस जमा न होने की स्थिति में भी विद्यार्थी का नाम स्कूल न काटने का आदेश दिया है लेकिन शहर के तमाम स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर फीस का दबाव बना कर हटाया जा रहा है। ऐसे स्कूलों की शिकायत संबंधित विभाग से की जाएगी। विद्यार्थियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। कोर्ट का यह अंतरिम आदेश है। 15 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई होगी।

मौजूदा सत्र को प्रभावित नहीं करेगा आदेश
कोर्ट ने कहा है कि उपरोक्त आदेश मौजूदा सत्र 2021-22 की फीस वसूली प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा। विद्यार्थियों को इस सत्र की फीस अपने तय समय पर ही अदा करनी होगी।
कोर्ट ने राजस्थान सरकार को भी आदेश दिया है कि स्ववित्त पोषित स्कूलों पर अगर किसी भी तरह की सरकारी देनदानी है तो उसकी वसूली 31 मार्च तक कर ली जाए।

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