February 24, 2021
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नयी तकनीक और दवाओं से- कैंसर का इलाज आसान

कैंसर का इलाज अब पहले से अधिक सुविधाजनक हो गया है। पहले कैंसर में की जाने वाली कीमोथेरैपी तथा रेडियोथेरैपी में कैंसर ग्रसित कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित होती थीं, जिसके साइड इफेक्ट (बाल गिरना, त्वचा का रंग बदलना) आदि कई रूप में मरीज को झेलने होते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब ऐसी दवाएं आ गई हैं जो सीधे कैंसर से प्रभावित सेल पर ही असर करेंगी। इन दवाओं का कोई प्रभाव कैंसर ग्रस्त हिस्से के अलावा कहीं नहीं होगा।

रेनबो अस्पताल की कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. तृप्ति शरण ने बताया कि अब कैंसर के इलाज की कई नयी विधियां तथा दवाएं आ गई हैं जिससे मरीज को होने वाले साइड इफेक्ट पहले की तुलना में काफी कम हो गए हैं। नयी थैरेपी में टारगेट थेरैपी प्रमुख है। टारगेट थेरैपी में दवा का असर सीधे कैंसरग्रस्त कोशिका पर ही होता है। शरीर के नार्मल टिशू पर दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। इस थेरैपी ने कीमोथेरेपी में होने वाले साइड इफेक्ट काफी कम कर दिए हैं। अभी यह थेरेपी गर्भाशय, स्तन कैंसर तथा प्रोस्ट्रेट कैंसर तथा ब्रेन के ट्यूमर में प्रयोग की जा रही है। डॉ. शरण ने बताया कि इसी प्रकार मुंह तथा त्वचा के कैंसर  के लिए अब मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाएं आ गई हैं। यह दवाएं गोली और कैप्सूल के रूप में दी जाती हैं। यह दवाएं शरीर में कैंसररोधी क्षमता बढ़ाती हैं तथा ऐसे सेल विकसित करती हैं जो सीधे कैंसर ग्रसित कोशिकाओं को नष्ट करने का काम करते हैं। इन दवाओं के प्रयोग से इलाज अधिक सुविधाजनक हो गया है।

कीमो तथा रेडियोथेरैपी के साइड इफेक्ट हुए काफी कम

बता दें कि पहले रेडियोथेरैपी (जिसे आम भाषा में सिकाई कहा जाता है) के दौरान जिस स्थान पर रेडियोथेरैपी की जाती थी, उसके आसपास की त्वचा की कोशिकाओं को भी रेडिएशन से होने वाले दुष्प्रभाव को झेलना पड़ता था। अब स्टीरियो टेक्टिक रेडियोथेरैपी शुरू हो गई है। इस थेरैपी के माध्यम से सुई की नोक  के बराबर के स्थान पर भी रेडियोथेरेैपी की जा सकती है। इसका सर्वाधिक फायदा ब्रेन ट्यूमर के इलाज में हुआ है। पहले ट्यूमर की रेडियोथेरैपी में डर रहता था कि ब्रेन का अन्य कोई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित न हो जाए। अब जहां ट्यूमर है वहीं रेडियोथेरैपी की जा सकती है। इस थेरैपी के माध्यम से ट्यूमर को रिमूव भी किया जा सकता है। ब्रेन के किसी अन्य हिस्से पर कोई प्रभाव नहीं होगा। 

लाल रंग का मंजन भी कैंसर कारक
कैंसर के कारणों में तंबाकू आज भी नंबर एक पर है। कैंसर के पचास प्रतिशत से अधिक मामले मुंह के कैंसर के सामने आ रहे हैं जिसका प्रमुख कारण तंबाकू तथा गुटखा के अधिक मात्रा में सेवन है। डॉ. तृप्ति शरण के अनुसार बिना तंबाकू वाला लाल रंग का मंजन भी कैंसर के एक प्रमुख कारण के रूप में सामने आया है। इस मंजन में कोई ऐसा तत्व है जो कैंसर कारक है। डॉ. शरण के अनुसार कैंसर के अन्य कारणों में एल्कोहल, लाइफ स्टाइल में बदलाव तथा खान पान में फास्ट फूड का अधिकाधिक चलन है।

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