February 26, 2021
अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय सेहत

नया वायरस 10 साल करेगा परेशान

  • कोराना से मौतों के लिए 4 सहरोग जिम्मेदार
  • ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में व्यापक स्तर पर हुए शोध के परिणाम कल शाम जारी

ब्रिटेन के ‘केन्ट’ क्षेत्र में सबसे पहले मिला कोरोना वायरस का नया रूप चिंता का विषय बन गया है क्योंकि कोरोना महामारी से सुरक्षा के लिए तैयार की गई कोविड-19 वैक्सीन का असर इसके सामने फीका पड़ सकता है। ये दावा है यूके जेनेटिक सर्विलांस प्रोग्राम चीफ शेरोन पीकॉक का। उनका मानना है कि कोरोना का यह केन्ट वैरिएंट ब्रिटेन में फैल चुका है और इस बात की पूरी संभावना है कि यह पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लेगा।

पीकॉक ने कहा कि मैं यह सोचता हूं कि भविष्य को देखते हुए इसके लिए वर्षों लग जाएंगे। इसमें दस साल लग सकते हैं। वहीं इंपीरियल कॉलेज लंदन ने एक अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें कोविड-19 से संबंधित कुछ नए लक्षणों का पता चला है। इन नए लक्षणों में ठंड लगना, भूख में कमी, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। जून 2020 से जनवरी 2021 के बीच 10 लाख से अधिक लोगों पर किए गए सर्वे के आधार पर अध्ययन में कहा गया है कि ये नए लक्षण वायरस के उन क्लासिक लक्षणों (बुखार, लगातार खांसी, गंध और/या स्वाद की क्षमता खो देना) के अलावा थे, जिनका उल्लेख नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के मार्गदर्शन में शामिल है।

इंपीरियल कॉलेज लंदन में रिएक्ट (रियल-टाइम असेसमेंट ऑफ कम्युनिटी ट्रांसमिशन) टीम द्वारा जारी किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि उम्र के आधार पर लक्षणों में कुछ भिन्नता थी, लेकिन ठंड सभी आयु वर्ग के कोविड-19 मरीजों को महसूस हुई थी। बता दें कि ब्रिटेन में अब कुल मामलों की संख्या गुरुवार सुबह तक बढ़कर 39,96,833 और मौतों का आंकड़ा 1,15,068 हो गया है। यह देश संक्रमण के मामलों में दुनिया में अमेरिका, भारत और ब्राजील के बाद चौथे नंबर पर है। वहीं मौतों के मामले में अमेरिका, ब्राजील, मैक्सिको और भारत के बाद पांचवें नंबर पर है। यहां अब तक 1.26 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन का पहला डोज मिल चुका है।

वहीं ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के एक नए शोध में पाया गया है कि कैंसर, किडनी का पुराना रोग, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप कोविड-19 मौतों के लिए जिम्मेदार 4 प्रमुख सह-बीमारियां (कॉम्बिडिटीज) हैं। 14 देशों के 3,75,859 प्रतिभागियों के वैश्विक डेटा का विश्लेषण करने के बाद यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि सांख्यिकीय तौर पर किडनी की पुरानी बीमारी इसमें सबसे ऊपर है। उन्होंने यह भी पाया कि कोविड-19 रोगियों की मौत के मामले में उच्च रक्तचाप, मोटापा और डायबिटीज का अहम रोल हैं।

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