March 6, 2021
कारोबार कैरियर ताजा राष्ट्रीय शिक्षा

अब पीएफ ब्याज पर टैक्स

प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) सैलरीड लोगों के लिए रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाला सबसे बड़ा आकर्षण होता है। पीएफ से मिलने वाली रकम पूरी तरह टैक्स फ्री होती है। इस पर मिलने वाला ब्याज भी इनकम में नहीं जोड़ा जाता। जिन लोगों की सैलरी से आमदनी ज्यादा है, उनका पीएफ में किया गया योगदान और इकट्ठा हुआ ब्याज भी अधिक होता है। सरकार पीएफ फंड में ब्याज दर को एफडी से ऊंचा बनाए हुए है। पीएफ पर ब्याज जहां आठ फीसदी की रेंज में है, वहीं एफडी पर ब्याज को पांच फीसदी की रेंज में रखा गया है।

नए नियम में हाई इनकम ब्रैकेट वाले लोगों को पीएफ पर मिलने वाले ब्याज की छूट को कम किया गया है। अगर किसी शख्स का पीएफ में सालाना योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा होगा तो 2.5 लाख रुपये से ज्यादा वाली रकम पर उसे जो भी ब्याज मिलेगा, उस पर टैक्स देना होगा। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लें किसी व्यक्ति ने वित्त वर्ष 2021-22 में तीन लाख रुपये पीएफ में योगदान दिया। ऐसे में ढाई लाख की रकम पर उन्हें जो ब्याज मिलेगा, वह तो टैक्स फ्री होगा, लेकिन 50 हजार पर मिलने वाले ब्याज की रकम पर उन्हें टैक्स देना होगा।

सालाना 2.5 लाख तक का योगदान रहेगा टैक्स फ्री

वही व्यक्ति यदि अगले वित्त वर्ष यानी 2022-23 में चार लाख पीएफ में डाल देते हैं तो उन्हें डेढ़ लाख रुपये की रकम पर मिलने वाले ब्याज पर तो टैक्स देना ही होगा, इसके साथ ही पिछले साल जो 50 हजार रुपये ढाई लाख की लिमिट से ऊपर डाले गए थे, उन पर भी तो 2022-23 में ब्याज मिलेगा। इस ब्याज पर भी उन्हें टैक्स देना होगा। वित्त मंत्री ने साफ किया है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार एक नया सिस्टम लेकर आएगी। कोई कर्मचारी सामान्य तौर पर अपनी बेसिक सैलरी का 10 फीसदी पीएफ योगदान देता है। इस नजरिये से देखें तो जिन लोगों की सालाना बेसिक सैलरी 25 लाख या उससे ज्यादा है, उनका पीएफ योगदान ढाई लाख से ज्यादा हो जाएगा। ऐसे लोगों के ब्याज पर ही टैक्स का प्रावधान होगा। जिन लोगों की बेसिक सैलरी 25 लाख सालाना से कम है और वे वीपीएफ में भी योगदान नहीं देते, उन्हें इस नए नियम से चिंता करने की जरूरत नहीं है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *