February 28, 2021
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अब दोबारा लिखा जाएगा यूनिवर्सिटी का कुलगीत

  • माधव भवन जाकर पद्मश्री योगेंद्र बाबा से मिले कुलपति
  • वरिष्ठ कवि सोम ठाकुर से विश्वविद्यालय ने साधा संपर्क

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलगीत को लेकर उठे विवाद के  पटाक्षेप की तैयारी है। अब विश्वविद्यालय स्थानीय कवियों से संपर्क कर उनसे ही गीत लिखवाएगा। इस संबंध में शुक्रवार को कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने संस्कार भारती के संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री योगेंद्र बाबा से मुलाकात की। योगेंद्र बाबा ने कुछ स्थानीय कवियों के नाम कुलपति को सुझाए हैं। पद्मश्री योगेंद्र बाबा की सलाह पर कुलपति ने शनिवार को प्रसिद्ध कवि सोम ठाकुर से विश्वविद्यालय का कुलगीत लिखने का आग्रह किया है। साहित्य, कला तथा गीत से जुड़े कई अन्य विद्वानों को कुलपति ने संस्कृति भवन के संबंध में सलाह-मशविरा के लिए सोमवार को 11 बजे आमंत्रित किया है। गौरतलब है कि नये समीकरण ने 23 जनवरी के संस्करण में कुलगीत लिखवाने में स्थानीय कवियों की उपेक्षा तथा कुलगीत में उर्दू शब्दों की अधिकता पर आपत्ति उठायी थी। बता दें कि नये समीकरण के 23 जनवरी के अंक के माध्यम से पद्मश्री योगेंद्र बाबा ने ब्रज में स्थित विश्वविद्यालय का कुलगीत अलीगढ़ के जॉनी फास्टर से लिखवाने तथा गीत में उर्दू के  शब्दों की अधिकता पर आपत्ति जतायी थी। उन्होंने कहा था कि यह ब्रज के साहित्यकारों की उपेक्षा है। इसकी शिकायत वह राज्यपाल को पत्र लिखकर करेंगे। इसी अंक में सोम ठाकुर सहित अन्य कवि व साहित्य जगत से जुड़े विद्वानों ने कुलगीत अलीगढ़ से लिखवाने पर आपत्ति उठायी थी। इस विवाद को शांत करने के उद्देश्य से कुलपति शुक्रवार को माधव भवन पहुंच कर पद्मश्री योगेंद्र बाबा से मिले। कुलपति ने बाबा को विश्वविद्यालय में खुलने वाले संस्कृति भवन के माध्यम से लोककलाओं के संरक्षण व संवर्धन पर भी चर्चा की। योगेंद्र बाबा ने साहित्य तथा कला से जुड़े कुछ विद्वानों के नाम कुलपति को बताए , जिनकी मदद संस्कृति भवन में चलने वाले कोर्सेज तथा कार्यक्रमों में ली जा सकती है। पद्मश्री बाबा ने कुलपति को सलाह दी कि स्थानीय कवियों तथा साहित्यकारों की मदद कुलगीत लिखवाने में लें।

नये समीकरण के 23 जनवरी के अंक में कुलगीत से सम्बन्धित प्रकाशित खबर। फाइल फोटो

इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने वरिष्ठ कवि सोम ठाकुर से शनिवार को संपर्क किया। सोम ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय से उनके पास फोन आया था। विश्वविद्यालय के  कुलगीत को लिखने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है, जिसे वह लिखकर विश्वविद्यालय को देंगे। वहीं कुलपति ने शहर के कुछ अन्य साहित्य तथा कला जगत से लोगों को सोमवार को विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया है जिससे संस्कृति भवन के संबंध में उनकी राय भी ली जा सके।

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