February 25, 2021
अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय

चीन, तुर्की की शरण में पाकिस्तान, ग्रे लिस्ट से बाहर होने की जुगत

  • आज से शुरू हो रही फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स की बैठक
  • आतंकवाद है आड़े, नहीं हटा तो आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी

आतंकवाद फैलाने और आतंकवादियों को अपने यहां पनाह देने के लिए दुनिया भर में बदनाम हो चुके को अब अपने भविष्य की चिंता सता रही है। दरअसल पाकिस्तान के भविष्य का फैसला लेने के लिए फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स (एफएटीएफ) के वर्किंग ग्रुप की आज बैठक होने जा रही है। 22 से 26 फरवरी के बीच होने वाले एफएटीएफ के प्लेनरी सेशन से पहले 11 से 19 फरवरी के बीच में वर्किंग ग्रुप की 8 वर्चुअल बैठकें होनी हैं। इन बैठकों में इस बात की समीक्षा की जाएगी कि क्या पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की है या नहीं।

उधर, पाकिस्तान अपने आका चीन और तुर्की के बल पर ग्रे लिस्ट से बच निकलने की फिराक में है। पाकिस्तान ने एफएटीएफ से कहा कि उसने आतंकियों के वित्तपोषण को रोकने में ‘बड़ी सफलता’ हासिल की है, इसलिए उसे ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया जाए। पाकिस्तान ने एफटीएफ से गुहार लगाई है कि या तो उसे ग्रे लिस्ट से हमेशा के लिए निकाल दिया जाए या 27 सूत्री एक्शन प्लान को पूरा करने के लिए ग्रेस ग्रेस पीरियड को बढ़ा दिया जाए। हालांकि पाकिस्तान की दाल गलती नहीं दिख रही है।

एफएटीएफ ने जोर देकर कहा है कि पाकिस्तान को अगर ग्रे लिस्ट से निकलना है और ब्लैक लिस्ट होने से बचना है तो उसे आतंकियों के वित्तपोषण और मनी लांड्रिंग पर कड़ाई से लगाम लगानी होगी। आतंकियों के खुलकर समर्थन की वजह से एफएटीएफ ने वर्ष 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। एफएटीएफ के अधिकारियों ने कहा था कि पाकिस्तान आतंक के खिलाफ हमारे 27 कार्ययोजनाओं में से प्रमुख छह योजनाओं को पूरा करने में नाकाम साबित हुआ है। इसमें भारत में वांछित आतंकवादियों मौलाना मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई न करना भी शामिल हैं।

इसके अलावा नामित करने वाले चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी पाकिस्तान की सरजमीं से गतिविधियां चला रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की उसकी प्रतिबद्धता से संतुष्ट नहीं हैं। खुद को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से निकाले जाने के लिए पाकिस्तान अपने आका चीन और तुर्की की शरण में चला गया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी खुद इन देशों के नेताओं से बात कर अपने लिए सहायता मांग रहे हैं। अगर पाकिस्तान एफएटीएफ की इस बैठक में भी ग्रे लिस्ट में बना रहता है तो उसकी आर्थिक स्थिति का और बेड़ा गर्क होना तय है।

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