March 2, 2021
आगरा कारोबार क्राइम सेहत

फूड प्रोडक्ट के नाम पर हो रही थीं दवा की पैकिंग

एक्सपायर्ड दवाओं के खेल में कुछ ही समय में फर्श से अर्श तक पहुंचे प्रदीप व धीरज राजौरा बंधुओं द्वारा मथुरा की जिस फैक्ट्री में दवाओं की पैकिंग व रिस्ट्रिपिंग करायी जा रही थी, उस फैक्ट्री पर भी दवा बनाने का लाइसेंस नहीं है। मीडेन हेल्थकेयर नामक इस फर्म पर फूड प्रोडक्ट बनाने का लाइसेंस है। इस फर्म के मालिक सौरभ शर्मा ने औषधि विभाग के अधिकारियों के सामने स्वीकार किया कि उनके पास औषधि निर्माण एवं पैकिंग का कोई लाइसेंस नहीं है।

औषधि विभाग के निरीक्षक जिस समय अघोई मथुरा स्थित मेडिन हेल्थ केयर पर पहुंचे तो वहां एक फूड प्रोडक्ट के केप्सूलों की स्ट्रिपिंग चल रही थी। इसी कमरे की जांच की तो गाबा एनटी की टैबलेट की सैकड़ों स्ट्रिप बरामद हुईं। वहीं पर दवाओं पर बैच नंबर, एक्सपाइरी तथा एमआरपी की मुहर लगाने के लिए प्रयोग होने वाली रबर स्टीरियो भी मिली। इस रबर पर 250 रुपये एमआरपी दर्शायी गई थी। वहीं मौके पर कार्यरत आपरेटर राजू ने बताया कि कुछ दिन पहले आगरा से दो लोग यह दवा, तथा पैकिंग के लिए एलमूनियम की फॉयल के साथ आए थे तथा 3000 स्ट्रिप बनवा कर ले गए।

औषधि निरीक्षक नरेश मोहन ने बताया कि दोनों ही आरोपी किलो के आधार पर एक्सपायर्ड दवाइयां खरीदते थे। बहुत कम दाम में माल खरीद लेते थे। इनके पास से कई दवा कंपनियों का माल मिला है। जिन्हें यह नई पैकिंग और नई मुहर (रेट व एक्सपाइरी डेट) के साथ बाजार में कम दाम पर बेच देते थे। पुलिस इन दोनों भाइयों के पूरे नेटवर्क को टटोल रही है।

शासन के निर्देश के बाद पड़ा छापा
इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया था। औषधि विभाग ने एक्सपायर दवाओं को दोबारा पैकिंग कर बेचे जाने की रिपोर्ट शासन को भेजी थी। वहां से सोमवार सुबह ही आदेश आए और आगरा के अलावा अलीगढ़, मेरठ और मुरादाबाद मंडल के आठ औषधि निरीक्षकों को काम में लगाया गया। सबसे पहले सत्यम प्लाजा फिर राजौरा भाइयों के घर, इसके बाद गोदाम और मथुरा में भी छापेमारी की गई।

एमआरपी पर देते थे 70 फीसदी की छूट
आगरा। अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों पर एमआरपी से 70 फीसदी कम रेट पर दवाएं दी जाती थीं। दोनों भाइयों ने दवाओं के इस गोरखधंधे का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था। आगरा के अलावा कई शहरों में उनके प्रतिनिधि काम कर रहे थे। अस्पताल के मेडिकल स्टोरों पर माल को खपाना आसान रहता है। दोनों भाई आवास विकास कॉलोनी में ही सेक्टर आठ में रहते हैं। सत्यम प्लाजा में जहां छापा पड़ा, उसके बराबर की दुकान में भी लाखों रुपये का माल भरा हुआ रखा था।

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