March 2, 2021
आगरा कारोबार क्राइम

पाटनी व महेंद्रू आमने-सामने

  • बंगला नंबर 49 को मुद्दा बनाकर हो रहे हैं हमले
  • राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता छावनी में बनी चर्चा का विषय

छावनी क्षेत्र के दो राजनीतिक दिग्गजों के बीच शह-मात का खेल चल रहा है। दोनों ही एक-दूसरे की हस्ती मिटाने में जुटे हैं। मुद्दा बना है छावनी परिषद का बंगला नंबर 49। दोनों के बीच राजनीतिक अदावत आज की नहीं है, बल्कि इसको 30-32 साल हो चुके हैं। इन दिनों दोनों ही एक-दूसरे के आमने-सामने आ खड़े हुए हैं। जिस बंगला नंबर 49 को लेकर दोनों के बीच जंग छिड़ी है, उसमें विजेता कौन होगा, यह भविष्य के गर्भ में हैं पर इन दिनों छावनी क्षेत्र में यह मुद्दा सर्वाधिक गरमाया हुआ है।

हम बात कर रहे हैं छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष विनय पाटनी और वर्तमान उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू की। दोनों के बीच लंबे अरसे से राजनीतिक द्वंद्व किसी से छिपा नहीं है। छावनी परिषद के चुनाव में वर्ष 1992 में डॉ. महेंद्रू के पिता ओमप्रकाश महेंद्रू को विनय पाटनी ने हरा दिया था। इसके बाद से ही डॉ. महेंद्रू और पाटनी के बीच पाले खिंच गए थे। इस चुनाव में जीत के बाद पाटनी छावनी परिषद के उपाध्यक्ष भी बने। इस चुनाव के बाद ही डॉ. महेंद्रू ने पाटनी को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक दुश्मन मान लिया था। इसी के बाद से दोनों ही एक-दूसरे को पटकनी देने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। ताजा मामला छावनी परिषद के बंगला नंबर 49 को लेकर दोनों के बीच में तलवारें खिंच गई हैं। इस बंगले पर पाटनी का कब्जा है और उसके एक हिस्से में उनका आवास और कार्यालय है।  इस मामले में पाटनी पर आरोप है कि रक्षा मंत्रालय की जमीन पर बने बंगला नंबर 49 का व्यवसायीकरण कर दिया गया है। इस पर 48 गैर कानूनी निर्माण करा रखे हैं। डॉ. महेंद्रू का कहना है कि इस मामले में पाटनी को सेक्शन 185 व 248 के तहत न्यायालय से नोटिस  दिए गये। पाटनी इस मामले में न्यायालय से हार चुके हैं और नोटिस के आधार पर वहां पर बने कॉमर्शियल काम्पलेक्स को ध्वस्त करने के आदेश भी हुए थे। इस मामले में पाटनी द्वारा जीओसी में अपील की गई। वहां से पाटनी को स्टे मिल गया। इस मामले में डॉ. महेंद्रू का कहना है कि स्टे एक भाग का दिया गया है न कि पूरी संपत्ति पर।

पिछले दिनों इस मुद्दे को डॉ. महेंद्रू ने बोर्ड बैठक में उठाने का प्रयास किया तो छावनी परिषद के सदस्य दुर्गेश उपाध्याय, तारिक अनवर व सीमा राजपूत ने विरोध कर दिया। इसके कारण इस मुद्दे पर बोर्ड बैठक में चर्चा नहीं हो सकी थी। सदस्यों का कहना था कि बैठक में किसी एक व्यक्ति के बंगले पर निशाना साधने के उद्देश्य से राजनीतिक लाभ नहीं लेना चाहिए। अगर बैठक में छावनी के अन्य बंगलों के बारे में भी चर्चा होती तो अलग बात थी। इस बैठक के बाद भाजपा का प्रतिनिधिमंडल अधिशासी अधिकारी से मिला था। उसने आरोप लगाया कि बुद्ध विहार स्थित क्वार्टर नंबर नौ, जिसके स्वामी डॉ. महेंद्रू हैं, उन्होंने भी अनाधिकृत निर्माण कर रखे हैं। साथ ही उनकी पैथोलॉजी पर भी छावनी परिषद का लाखों रुपया बकाया है। केवल एक बंगले का मुद्दा उठाकर डॉ. महेंद्रू राजनीतिक दुश्मनी निकाल रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विनय पाटनी के साथ छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष श्रीभगवान गुप्ता, रामकिशन अग्रवाल, विजय गौड़, अशोक अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, हसन अली, अरुण गुप्ता, अंकुर सिंघल आदि शामिल थे।

अन्य मुद्दों पर हुई चर्चा
बोर्ड बैठक में हाल ही में छावनी परिषद द्वारा माल रोड पर स्थित सर्वे संख्या-131/400 नामनेर की भूमि को अनाधिकृत मोटर वर्कशॉप को हटाकर अपने कब्जे में लिया था। उस भूमि के प्रयोग से सम्बन्ध में जीई, सैनिक अस्पताल के कमान्डर तथा वार्ड नं. 5 व 6 के सदस्य की एक संयुक्त समिति गठित की गई, जो अपनी आख्या फरवरी के पहले सप्ताह में प्रस्तुत करेगी। छावनी क्षेत्र में इलैक्ट्रिक पोल पर विज्ञापन से सम्बन्धित ठेके के सम्बन्ध में बोर्ड में चर्चा के बाद इसे अगली बोर्ड बैठक में तय करने का फैसला लिया गया। छावनी क्षेत्र में स्थापित 20 आरओ, एटीएम के रखरखाव हेतु पुन: टेंडर आमन्त्रित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में छावनी क्षेत्र में सीवर लाइन की योजना पर अन्तिम निर्णय लिया गया। सदर बाजार क्षेत्र में स्थित सरदार पटेल गार्डन के सौन्दर्यीकरण पर भी चर्चा हुई और निर्णय लिया गया कि इसके उत्थान हेतु एक कार्ययोजना बनाई जाए, जिसमें वार्ड नंबर दो के सदस्य से भी सलाह-मशविरा लिया जाए।

छावनी परिषद की हाल की मीटिंग में मौजूद अधिकारी और बोर्ड के निर्वाचित सदस्य।

बोर्ड बैठक में उठ गया मुद्दा
पिछली बैठक में मात खाने के बाद डॉ. महेंद्रू ने इस बार पूरी तरह से पाड़बंदी करने के बाद ही गत दिवस हुई बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को उठाया। बैठक में छावनी परिषद के बंगलों में अनाधिकृत निर्माणों पर डीईओ को 45 दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया। बंगला संख्या-49 में टोरन्ट ऑफिस के मूल्यांकन को लेकर जो भी भ्रान्ति थी, उसके सम्बन्ध में बोर्ड द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि छावनी अधिनियम 2006 में दिए गये प्रावधान के तहत मूल्यांकन का प्राधिकार मुख्य अधिशासी अधिकारी का है। बंगलों में व्यवसायिक गतिविधि को लेकर चर्चा के दौरान निर्णय लिया गया कि अनाधिकृत निर्माण के साथ चेंज ऑफ परपज को भी डीईओ की रिपोर्ट के साथ सम्मलित किया जाए। इस बैठक में डॉ. महेंद्रू ने पाटनी को घेरने के लिए इस बार सभी बंगलों में अनाधिकृत निर्माणों को ले लिया, ताकि कोई सदस्य उन पर निशाना न साध सके।

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