March 3, 2021
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रनभूमि पर रहाणे और उनके रणबांकुरे

पहले टेस्ट के बाद जब सबने नकार दी टीम, तब शुरू हुआ पलटवार का असली खेल !

भारत की युवा क्रिकेट टीम ने अपने जबरदस्त जुझारूपन और बहादुरी के दम पर चौथे और आखिरी टेस्ट मैच के पांचवें दिन मंगलवार को आस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हरा बॉर्डर-गावस्कार ट्रॉफी अपने पास ही रखी है। यह सीरीज भारत ने 2-1 से जीती। भारत की सर्वकालिक महान टेस्ट सीरीज जीत मानी जा रही है। चौथे और आखिरी टेस्ट मैच को जीतने के लिए भारत को 328 रन बनाने थे, जो उसने शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा और ऋषभ पंत की बेहतरीन पारियों के दम पर सात विकेट खोकर बना लिए।

मोहम्मद सिराज और शार्दूल ठाकुर की गेंदबाजी का भी योगदान इस जीत में काफी अहम रहा। पंत ने रिद्धिमान साहा के करियर के लिए अब अनिश्चितता पैदा कर दी है। लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इस सीरीज की जीत से पहले यह कल्पना करके ही दिल दहल जाता है कि किसी खिलाड़ी को उस टीम की कमान मिले जो सीरीज के पहले ही टेस्ट मैच में 36 रन पर सिमट जाए और उस टीम का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी और नियमित कप्तान विराट कोहली पिता बनने के लिए वापस स्वदेश लौट जाएं।

सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी चोटिल हो जाए. और उसके बाद टीम घायल खिलाड़ियों का जमघट बन जाए, जिसमें जसप्रीत बुमराह, आर अश्विन, रविंद्र जडेजा, ऋषभ पंत, नवदीप सैनी और बाउंसर झेलते चेतेश्वर पुजारा भी शामिल हों। लेकिन अजिंक्य रहाणे इन सब परिस्थितियों में नायक साबित हुए।

उन्होंने बेहद शांति और चतुराई से विपक्षी टीम के हर वार का जवाब दिया। क्रिकेट की ‘रनभूमि’ पर अजिंक्य के रणबांकुर उस वक्त चले जब पहले टेस्ट के बाद टीम इंडिया को सभी ने नकार दिया था। हालात लेकिन एक दम उलट गए। सबसे पहले तो रहाणे की टीम ने दूसरे ही टेस्ट मैच में मेलबर्न में भारत को आठ विकेट से जीताया और हार का गम दूर किया। रहाणे ने पहली पारी में 112 रन की शतकीय पारी भी खेली। यह सिरीज बल्लेबाजों के लिए कैसी रही इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ और मार्कस लाबुशेन ही शतक बना सके।

अजिंक्य रहाणे पूरी सिरीज में स्टीव स्मिथ पर भी दबाव बनाने में कामयाब रहे। उन्होंने स्मिथ के आते ही आर अश्विन को गेंद दी जिनके सामने स्मिथ सहज होकर नहीं खेल सकेञ रहाणे ने भले ही इस सीरीज के आखिरी दो टेस्ट मैच में बल्ले से अधिक कमाल नहीं कर सके लेकिन उनकी कप्तानी को देखकर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक ब्रेयरली की याद जरूर आ जाती है जो सिर्फ अपनी कप्तानी के दम पर खेल जाते थे।

अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में भारत ने अभी तक पांच टेस्ट में से चार में जीत हासिल की है और एक मैच ड्रॉ रहा है। रहाणे को बल्लेबाजी में फिर भी शुभमन गिल, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, ऋषभ पंत और रविंद्र जडेजा का साथ मिला लेकिन जैसे अनुभवहीन गेंदबाज उन्हें मिले उसे देखकर एक बार तो कोई भी कप्तान घबरा सकता था। अब भविष्य में टीम की कमान भले ही विराट कोहली संभालें लेकिन अजिंक्य रहाणे को कप्तान के तौर पर इसलिए याद किया जाएगा कि उन्होंने आधी से ज्यादा घायल टीम के साथ उस ऑस्ट्रेलियाई टीम को मात दी जो कागज पर भारत से बेहतर थी।

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