May 9, 2021
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शबनम का फंदा तैयार, डेथ वारंट का इंतजार

  • वारंट के बाद तन्हाई बैरक में भेज दी जाएगी अमरोहा की शबनम
  • प्रेमी संग परिवार के सात लोगों को काट दिया था कुल्हाड़ी से

13 साल पहले अमरोहा में सामूहिक नरसंहार करने वाली शबनम आज दया की भीख मांग रही है। सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा और फिर राष्ट्रपति द्वारा याचिका ठुकराए जाने के बाद मथुरा जेल में तैयारियां शुरू हो गई हैं। अब बस डेथ वारंट का इंतजार है। रामपुर की जेल में गुमसुम सी रहने वाली शबनम की पेशानी पर चिंता की लकीरें दौड़ रही हैं। हालांकि उसके 12 साल के बेटे ने फिर से दया की गुहार लगाई है। फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

13 साल पहले हुआ था नरसंहार
अमरोहा के बावनखेड़ी गांव में 15 अप्रैल, 2008 को शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों को कुल्हाड़ी से काट दिया था। मरने वालों में शबनम के मां-बाप, शबनम के दो भाई, शबनम की एक भाभी, शबनम की एक मौसी की बेटी और शबनम का दस माह का भतीजा भी शामिल था। अध्यापक शौकत अली की बेटी शबनम इतिहास और भूगोल से एमए थी। उसका कक्षा पांच तक पढ़े मजदूर सलीम से प्रेम प्रसंग था। घर वाले इसका विरोध करते थे। एक रात उसने परिजनों को नशीली दवा खिला कर बेहोश कर दिया और सबकी हत्या कर दी। जेल में ही इसके बेटे ताज का जन्म हुआ। बताया गया है कि यह सलीम का ही पुत्र है।

चार महिलाओं को मिली है सजा
बेशक यह आजाद भारत की पहली फांसी होने वाली है लेकिन महिलाओं को मिली फांसी की यह सजा पहली नहीं है। अब तक शबनम सहित चार महिलाओं को यह सजा मिल चुकी है। इनमें हरियाणा की सोनिया, महाराष्ट्र की रेणुका और सीमा शामिल हैं। इन सभी का अपराध इतना संगीन है कि राष्ट्रपति ने भी इनकी दया याचिका को ठुकरा दिया है। इन सभी के डेथ वारंट आने का इंतजार है।

जेल प्रशासन अपनी ओर से पूरी तैयारी कर रहा है। डेथ वारंट आने के बाद ही फांसी देने की तिथि के बारे में पता चलेगा। फांसीघर को भी दुरुस्त किया जा रहा है। जेल मैनुअल के आधार पर ही तैयारियां की जा रही हैं।

शैलेंद्र कुमार मैत्रेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक (मथुरा)

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