February 26, 2021
आगरा उत्तर प्रदेश क्राइम ताजा

निरंतर बढ़ रहा आगरा में गलीज धंधा ‘सेक्स इंडस्ट्री’

  • शहर के बाहर सुनसान जैसी जगहों पर बने होटल काट रहे चांदी
  • स्थानीय लोगों को भी उपलब्ध कराते देते घंटों के हिसाब से कमरे

महानगर के बाहरी इलाकों में तमाम सड़कों पर ऐसी जगहों पर होटल बने हुए हैं, जहां होटल चलाने की कोई तुक नहीं बनती। होटल तो ऐसे स्थानों पर बनाए जाते हैं जो व्यावसायिक स्थलों के आसपास हों, जिससे वहां ठहरने वाले लोग आसानी से पहुंच सकें। पिछले कुछ समय में आगरा शहर के बाहरी इलाकों में दर्जनों की संख्या में ऐसी जगहों पर होटल बने हैं, जहां बाहरी लोग तो क्या शहरवासी भी नहीं जाना चाहेंगे। इसके बाद भी ये होटल खूब फल-फूल रहे हैं। इसकी तह में जाएंगे तो होटल बनाने और चलाने का इरादा समझ में आ जाता है। ये सारे होटल ‘सेक्स इंडस्ट्री’ के नाम पर फल-फूल रहे हैं।
होटलों के लिए नियम तो बहुत हैं। नियमों का पालन शायद ही कोई करता हो। नियमों से बचने के लिए ही संचालक होटल को गेस्ट हाउस का नाम दे देते हैं। लोगों ने ऐसी-ऐसी जगहों पर गेस्ट और होटल बना लिए हैं, जो क्षेत्र अधिकतर सुनसान जैसे रहते हैं, लेकिन इन होटलों के बाहर गाड़ियों का जमघट लगा रहता है।
ऐसे होटलों के जरिए ही देह व्यापार चलाने वालों ने ताजनगरी में ‘सेक्स इंड्रस्टी’ खड़ी कर दी है। घंटों के लिए कमरे दिए जाते हैं और होटल संचालक पर होती रहती है नोटों की बरसात। मंदी हो या लॉकडाउन जैसे हालात, इन होटलों की कमाई पर कोई असर नहीं पड़ता। होटलों में आने वाले लड़के-लड़कियों को कपल्स के नाम पर रूम दिए जाते हैं। प्रशासन का आदेश है कि स्थानीय लोगों को कमरे किसी भी होटल में नहीं दिए जाएं। अकेले किसी को रुकना हो तो ठहर सकता है, लेकिन जोड़े में नहीं,लेकिन ये होटल खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं।
कल बिचपुरी रोड पर जिस एआर पैलेस एंड रेस्टोरेंट में पुलिस ने छापा मारा, वहां से काफी लड़के-लड़कियों को पकड़ा। यह होटल भी ऐसी जगह पर है, जहां किसी पर्यटक के आने की कल्पना तक नहीं की जा सकती। ताजगंज, सिकंदरा, जगदीशपुरा, एत्मादुद्दौला और सदर थाना क्षेत्र के तमाम होटलों में इसी तरह के काम हो रहे हैं।

पुलिस ही कराती और पकड़ती भी

शहर के बाहरी इलाकों में बने होटलों में देह व्यापार के मामले जिस तरह से पकड़ में आ रहे हैं, उसमें यह कड़वा सच यह भी है कि इस धंधे को कराती भी पुलिस है और पकड़ती भी पुलिस ही है। ठीक उसी तरह जिस तरह जुए और सट्टे के मामले में होता है। इस तरह के गलत काम इलाके के थाने और चौकी की शह पर होते हैं जबकि एक्शन लेती हैं वरिष्ठ अधिकारियों की टीमें। अब तक जितने भी मामले अधिकारियों ने अपने स्तर से पकड़वाए हैं, उनमें थानों की पुलिस को बाईपास किए जाने के बाद ही सफलता मिली है। इसका मतलब तो ये हुआ कि अधिकारी भी जानते हैं कि सब कुछ थानों और चौकियों की मिलीभगत से होता है। अगर ऐसा है तो फिर इन पर एक्शन क्यों नहीं होता?
बीते कल बिचपुरी चौकी क्षेत्र में बोदला-बिचपुरी रोड स्थित होटल एआर पैलेस पर छापा मारकर कथित देह व्यापार का खुलासा करने वाली टीम भी पुलिस कप्तान की ही थी। कप्तान ने थाना पुलिस को अंधेरे में रखकर यह ऑपरेशन कराया। इस होटल में दस जोड़े लड़के-लड़कियों के अलावा एक युवती और दो युवकों को कमरे से पकड़ा गया था। सभी को नियम विरुद्ध कमरे उपलब्ध कराए गए थे। सवाल उठ रहा है कि होटल में इतना सब कुछ चल रहा था जबकि पुलिस चौकी चंद कदमों की दूरी पर है। इस सवाल का जवाब भी हर कोई जानता है कि इलाका पुलिस की मर्जी के बगैर इस तरह के गलत काम होटल में हो ही नहीं सकते। ऐसे होटलों को चलाने वाले थाना-चौकी के कारखास सिपाहियों से संपर्क में रहते हैं और महीनेदारी के हिसाब से फीलगुड कराते रहते हैं। इस तरह के होटलों में तभी कार्रवाई हो पाती है जब इन मामलों की शिकायत किसी बड़े अधिकारी के पास तक पहुंचती है। दूसरे शब्दों में इसे यूं कह सकते हैं कि थाना-चौकी के स्तर से गलत कामों की शह मिलती है और अधिकारियों के स्तर से एक्शन होता है।
थाना-चौकियों की पुलिस की बात करें तो इनकी तो हालत यह है कि छापे से पूर्व ही किसी न किसी माध्यम से सूचना लीक कर देते हैं। कई बार छापों में यह देखने को भी मिला है। इसलिए अधिकारी भी अलर्ट हो गए हैं। जब उन्हें कहीं छापा पड़वाना होता है तो दूसरे थाने की टीम को भेजा जाता है। थाना पुलिस को छापा मारने के बाद ही बुलाया जाता है। पिछले दिनों में एसएसपी बबलू कुमार के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने कई ऐसी जगहों पर छापे मारे जिनकी थाना पुलिस को जानकारी नहीं थी। जगदीशपुरा थाना क्षेत्र में चल रहे जुए के अड्डे पर शाहगंज पुलिस ने छापा मारा था।

थाना-चौकियों की पुलिस की शह से होते गलत काम,

पकड़े तभी जाते जब अधिकारी बाहर की टीम भेजते

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