March 2, 2021
आगरा कारोबार क्राइम

पलटू कमरे

होटल व्यवसाय में बहुत प्रचलित नाम हो चुका है ये, इन्हीं कमरों का होता है देह व्यापार में इस्तेमाल

  • हर होटल के कुछ कमरे ‘पलटू’ नाम से जाने जाते हैं
  • गेस्ट हाउस तथा लॉज में भी चल रहा है यही कारोबार
  • हुक्का बार तथा क्लब के केबिन भी हैं आशियाना

ताजनगरी में हर सड़क और गली-मोहल्ले तक में चल रहे छोटे होटलों में अवैध धंधों के खुलासे के बाद पुलिस अफसर जागे हैं। देखने में ये होटल भले ही बहुत सामान्य से लगें, लेकिन बात खरीद-बिक्री या फिर किराए पर देने की बात आती है तो ये बहुत मूल्यवान हैं। छोटे होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों में ‘पलटू’ कमरों वाले होटलों की बहुत डिमांड है। ऐसे होटल ऊंची कीमत पर बेचे अथवा ऊंचे किराए पर दिए जाते हैं। इसके अलावा शहर के विभिन्न इलाकों में खुले क्लब, लॉज, गेस्ट हाउस तथा हुक्का बार में भी यही कारोबार संचालित है। क्लब तथा हुक्का बार में प्रेमी जोड़ों के लिए केबिन बने हुए हैं।

उदाहरण के लिए होटल किराए पर देते समय अथवा बेचते समय बता दिया जाता है कि होटल के रेस्टोरेंट तथा किचिन के साथ पांच कमरे ‘पलटू’ हैं। होटल लाइन में ‘पलटू’ कमरे उन कमरों को कहा जाता है जो घंटे के हिसाब से प्रेमी जोड़ों को अथवा देह व्यवसाय के लिए दिए जाते हैं। ‘पलटू’ कमरों की संख्या से ही अनुमान लग जाता है कि इस होटल की कमाई कितनी है अथवा प्रतिदिन यहां आने वाले जोड़ों की संख्या कितनी हो सकती है। होटलों की खरीद-बिक्री अथवा किराए पर दिलाने का काम करने वाले दलाल ‘पलटू’ कमरों के आधार पर ही खरीददार से सौदेबाजी करते हैं। फतेहपुरसीकरी मार्ग तथा आगरा-मथुरा रोड पर ‘पलटू’ कमरों वाले होटलों की भरमार है

शहर के आउटस्कर्ट वाले मार्गों जैसे फतेहपुरसीकरी रोड, मथुरा रोड, फीरोजाबाद रोड, खंदौली रोड, एनएच 19 तथा शहर के अंदर विभिन्न कालोनियों में इस प्रकार के छोटे होटल, लॉज अथवा गेस्ट हाउस बने हुए हैं। कुछ गेस्ट हाउस का तो साइन बोर्ड तक पढ़ने में नहीं आता। इन होटलों अथवा गेस्ट हाउस में से कई में तो किचिन तक नहीं है। इन गेस्ट हाउस की दशा बाहर से देखने पर ही नजर आ जाती है कि इसमें किस किस्म के गेस्ट ठहरने के लिए आते हैं। इस प्रकार के गेस्ट हाउस में भी घंटे के आधार पर देह व्यापार के लिए कमरे देने का कारोबार संचालित है।

शहर की विभिन्न कालोनियों में क्लब, डिस्को, हुक्का बार संचालित हो रहे हैं। इन सभी में प्रेमी जोड़ों के एकांत के लिए केबिन की सुविधा है। इस प्रकार के कई रेस्टोरेंट कम हुक्का बार में कोई किचिन नहीं है। प्रेमी जोड़ों के लिए यह आसपास के रेस्टोरेंट से कम कीमत पर खाद्य अथवा पेय पदार्थ खरीद कर ऊंची कीमत पर अपने यहां उपलब्ध कराते हैं। खाने के आइटम में की जाने वाली वृद्धि ही इनकी कमाई की मुख्य जरिया है।

ऐसा नहीं है कि यह कारोबार इलाका पुलिस की नजरों से छुपा हो। इलाका पुलिस के चीता मोबाइल पुलिसकर्मियों तथा थाना, चौकी पुलिस के सिपाहियों को इनकी पूरी जानकारी रहती है तथा इनका मासिक शुल्क ऐसे हुक्का बार, क्लब और डिस्को आदि से फिक्स रहता है। थाना अथवा चौकी इंचार्ज भी स्टाफ को खुश रखने के लिए इस ओर से आंखें बंद किए रहते हैं। 

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *