February 25, 2021
आगरा शिक्षा

निजी कॉलेजों की सच्चाई जानने निकल पड़ीं यूनिवर्सिटी की टीम

  • विधायक के विधान सभा में मामला उठाने के बाद मथुरा के प्राइवेट कॉलेजों के बारे में की जा रही है जांच
  • जांच दलों को दिए गए हैं मथुरा जिले के विभिन्न मार्ग, गोपनीयता भी बरती जा रही है इस अभियान में

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध प्राइवेट महाविद्यालयों में से अधिकांश की स्थिति बदहाल है। न मानक के अनुसार शिक्षक हैं और न फर्नीचर। कुछ महाविद्यालयों में तो एक ही बिल्डिंग में अंडर ग्रेजुएट, बीएड तथा आईटीआई तक संचालित हैं। जब जिस पाठ्यक्रम के लिए निरीक्षण होना होता है, वही बोर्ड कॉलेज पर टांग दिया जाता है। मथुरा के विधायक पूरन प्रकाश ने यह मामला विधानसभा में उठाया तो विश्वविद्यालय की नींद टूटी है। मथुरा के प्राइवेट महाविद्यालयों की नकेल कसने की तैयारी हो चुकी है। इस संबंध में विवि द्वारा चार जांच टीम गठित की गई हैं। ये टीमें पूरे मथुरा जिले के प्राइवेट कॉलेजों की जांच के लिए आज सुबह आगरा से निकल चुकी थीं। इन जांच दलों की रिपोर्ट के आधार पर महाविद्यालयों पर कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि मथुरा के विधायक पूरनप्रकाश ने विधानसभा में मथुरा जिले के प्राइवेट महाविद्यालयों की बदहाल स्थिति का मामला उठाया था। विधायक ने विधानसभा में कहा था कि बहुत से महाविद्यालयों में मानक के अनुसार शिक्षक नहीं हैं, क्लास रूम में फर्नीचर नहीं है। लैब में कोई प्रायोगिक कार्य नहीं कराया जाता। यह कालेज केवल प्रवेश व परीक्षा का काम करते हैं। पूरे साल इन महाविद्यालयों में कोई छात्र पढ़ाई करने नहीं आता। विश्वविद्यालय ने किस आधार पर इन महाविद्यालयों को संबद्धता दे रखी है? विधायक द्वारा यह मामला उठाए जाने के बाद कुछ महाविद्यालयों की जांच विश्वविद्यालय द्वारा कराई गई। ववि की टीम को एक-दो कॉलेज को छोड़कर किसी भी महाविद्यालय में मानक के अनुसार व्यवस्था नहीं मिली। इस जांच रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई, कोई नहीं जानता।

विधायक पूरन प्रकाश की शिकायत के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग की अपर सचिव मोनिका गर्ग ने विश्वविद्यालय को निर्देशित किया है कि विश्वविद्यालय से संबद्ध मथुरा जिले की सभी प्राइवेट महाविद्यालयों की जांच करायी जाए। इस निर्देश के बाद गुरुवार को कुलसचिव ने विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसर्स तथा सहायक व उप कुलसचिवों को मिलाकर चार टीम गठित की हैं। इन जांच दलों को मथुरा जिले के विभिन्न रूट्स दिए गए हैं। यह सभी जांच दल अपने-अपने रूट पर पड़ने वाले प्राइवेट महाविद्यालयों की जांच करेंगी। जांच का यह कार्य अगले कई दिन तक जारी रह सकता है।

कैसे हो पाएगी महाविद्यालयों की निष्पक्ष जांच

 ऐसा नहीं है कि विश्वविद्यालय द्वारा पहली बार महाविद्यालयों की जांच करायी जा रही हो। हर बार करायी जाने वाली जांच लिफाफे के बोझ तले दम तोड़ देती हैं तथा कॉलेज ज्यों के त्यों विश्वविद्यालय से संबद्ध रहकर केवल प्रवेश तथा परीक्षा का कार्य करते रहते हैं। जांच दल को किसी एक कोर्स की मान्यता की जांच के लिए भेजा जाता है। जांच करने वालों को पता ही नहीं होता कि कितने अन्य पाठ्यक्रम इस महाविद्यालय में संचालित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए यदि बीएड की जांच के लिए जांच दल को भेजा गया है तो वह घोड़े की आंख पर पड़े पट्टे की तरह बीएड के मानकों की जांच करते हैं। उनको यह पता ही नहीं होता कि बीए, बीएससी भी इस कालेज में चल रहे हैं। जो क्लास रूम बीए, बीएससी के लिए बनाए गए होते हैं, उन्हें ही बीएड की क्लास रूम की तरह कालेज संचालक द्वारा दिखा दिया जाता है।

संबद्धता विभाग से चलता है खेल

 विश्वविद्यालय का संबद्धता विभाग इस सभी गोरखधंधों की मुख्य जड़ है। इस विभाग को कालेज के सारे काले कारनामों की जानकारी रहती है किंतु लिफाफा उन काले कारनामों पर पर्दा डाल देता है। कई-कई सालों से इस विभाग में जमे कर्मचारियों के कॉलेज संचालकों से गहरी दोस्ती रहती है। कभी विश्वविद्यालय के अधिकारियों तथा कुलपति को स्वजातीय का हवाला देकर तो कभी लिफाफे के आधार पर इस विभाग में कर्मचारी जमे रहते हैं, और कालेज संचालक इस विभाग की कृपा से मनचाही संबद्धता हासिल करते रहते हैं। कई बार तो इस विभाग की मेहरबानी से कालेज संचालक संबद्धता के लिए दी जाने वाली एफडी तक निकाल ले जाते हैं तथा कलर फोटोस्टेट वाली एफडी फाइल में लगी रहती है। पूर्व कुलपतियों के समय में इस प्रकार के कई मामले पकड़े गए थे।

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