March 3, 2021
आगरा पॉलिटिक्स

वर्दी है पर वह लड़की भी है!

  • पुलिस महकमे में कार्यरत महिलाएं भी करती हैं असहज हालातों का सामना
  • थानों में मनचलों की स्टाइल में पुरुष पुलिसकर्मी फ्लर्ट करने से बाज नहीं आते
  • पुलिस की गंदी गालियां सुनकर तो लगता है कि पुलिस क्यों ज्वाइन की

पिछले दिनों यूपी के दो जिलों में दो महिला पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए सुसाइड से समूचा पुलिस महकमा सवालों के घेरे में आ गया था। सवाल उठे थे कि ऐसा क्या हो रहा है कि वर्दी धारण कर समाज से बुराई का समूल नाश करने का संकल्प लेने वाली महिलाएं मौत को गले लगा रही हैं। नये समीकरण ने इसकी तह में जाने पर पाया कि कानून की रखवाली करने वाली ये महिला पुलिसकर्मी वर्दीधारियों के बीच खुद की रखवाली के लिए भी जूझती हैं। इन्हें पुरुष पुलिसकर्मियों के बीच बहुत असहज हालातों से गुजरना पड़ता है। वे भले ही पुलिस की वर्दी धारण कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें बार-बार अहसास कराया जाता है कि वे महिला हैं। पुलिस परिसरों में उन्हें वह सब कुछ सहना पड़ता है जो आम लड़कियों और महिलाओं को घर से बाहर निकलने पर फेस करना होता है। शरीर पर वर्दी होते हुए भी वे सब कुछ चुपचाप सहन करने को विवश हैं क्योंकि सवाल नौकरी का आ खड़ा होता है।

आगरा के समस्त थानों और पुलिस दफ्तरों में महिला पुलिसकर्मी खासी संख्या में तैनात हैं। पुलिस विभाग में महिलाओं की भर्ती के पीछे उद्देश्य यही था कि थानों में पहुंचने वाली महिलाएं खुद को सहज महसूस कर सकें। अधिकारी महिला पुलिसकर्मियों से पुरुष पुलिसकर्मियों जैसी पुलिसिंग की अपेक्षा तो करते हैं, लेकिन उनके लिए सहज माहौल नहीं बना पाते। ‘नए समीकरण’ के इस संवाददाता से महिला पुलिसकर्मियों ने ऑफ द रेकॉर्ड बातचीत में इस बात को स्वीकार किया।

महानगर के एक थाने में तैनात एक महिला सिपाही ने बताया कि पुलिस ज्वाइन करते समय उसकी सहेलियों ने कहा था कि इससे अच्छा तो टीचर बनती, लेकिन उसने सोच समझकर खाकी को चुना। वह पुलिस की वर्दी में है लेकिन यह भी जानती है कि वह एक लड़की भी है। कभी-कभी थाने पर उसे इतना असहज होना पड़ जाता है कि पुलिस में आने का निर्णय गलत लगने लगता है। वह बताती है कि थाने में पुरुष पुलिसकर्मी महिला सिपाहियों के सामने ही इतनी अश्लील और गंदी-गंदी गालियां देने लगते हैं कि उन्हें वहां से हटना पड़ जाता है। पुरुष पुलिसकर्मी उनके इर्द-गिर्द मंडराते रहते हैं। अश्लील कमेंट्स और इशारे भी सहने पड़ते हैं। इस महिला सिपाही का कहना था कि पुरुष तो पुरुष ही रहता है, वह चाहे आम आदमी हो या वर्दीधारी, सभी की सोच एक जैसी होती है।

महिला थाने में तैनात एक महिला सिपाही को भी पुलिस की सेवा में बहुत असहज कर देने वाले अनुभव हो रहे हैं। इस महिला सिपाही ने बताया कि महिला थाने से पहले वह एक अन्य थाने में तैनात थी। उस थाने में पुरुष पुलिसकर्मी भी थे। कोतवाल के मुंह लगे एक सिपाही ने उसे बहुत परेशान किया। वह उससे दोस्ती करना चाहता था। उसने इंकार किया तो पुरुष सिपाही ने इंसपेक्टर के कान भर दिए। उसे बेवजह इंसपेक्टर की डांट खानी पड़ी। उस दिन उसने पुलिस की नौकरी छोड़ने की सोच लिया था, लेकिन परिजनों के समझाने पर रुक गई और फिर उसने अपना तबादला महिला थाने में करा लिया। एक महिला दरोगा ने भी माना कि महकमे में माहौल महिलाओं के अनुकूल नहीं है। नए रंगरूट के बीच कुछ ज्यादा ही दिक्कतें सामने आ रही हैं। नए सिपाही नई रंगरूट (महिला सिपाहियों) फोन नंबर हासिल करने के बाद अपने स्टायलिश फोटो भेजते हैं। थानों ड्यूटी के दौरान ही ये रंगरूट महिला सिपाहियों के इर्द-गिर्द ही मंडराते रहते हैं। इनकी कोशिश यही रहती है कि कैसे महिला सिपाही को इंप्रैस करें।

वरिष्ठ अधिकारियों में ठन गई थी

पुलिस महकमे  में कार्यरत महिलाओं के प्रति आकर्षण की बात की जाए तो अधिकारी भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। पड़ोसी जिले में तैनात एसएसपी की डीआईजी आगरा रेंज से बस इतनी सी बात पर ठन गई थी कि एक महिला दरोगा को दोनों ही वरिष्ठ अधिकारी अपना पीआरओ बनाना चाहते थे। यह महिला दरोगा भी महकमे में चर्चाओं में रहती थी।

महिला अधिकारी ने लगाया था आरोप

महिला सिपाही और दरोगा ही नहीं, अधिकारी स्तर की महिला भी महकमे में असहज हालातों का सामना कर चुकी हैं। एक महिला अधिकारी ने आगरा में तैनाती के दौरान तत्कालीन डीआईजी पर खुद के उत्पीड़न का आरोप लगाया था। महिला अधिकारी ने परेशान होकर नौकरी से इस्तीफा तक लिख दिया था। 

मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव

पुलिस महकमे में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या अच्छी खासी हो चुकी है, लेकिन महिलाओं के मद्देनजर जरूरी सुविधाओं की अभी भी कमी नजर आती है। अधिकतर थानों में महिलाओं के लिए पृथक शौचालय नहीं है। पुरुष शौचालयों का उपयोग करने में असहज महसूस करती हैं। कई महिला पुलिसकर्मियों ने इस संवाददाता से कहा कि वे ड्यूटी टाइम में बहुत काम पानी पीती हैं ताकि उन्हें टॉयलेट न जाना पड़े। 

‘हम पुलिस महकमे में महिला पुलिसकर्मियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी महिला पुलिसकर्मी को परेशानी हो तो वह उन्हें बताए। पुलिस लाइन में संचालित ग्रीवांस सेल में भी वह अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। विशाखा कमेटी भी ऐसी शिकायतों के समाधान के लिए ही बनाई गई है। शिकायत करने वाली महिला सिपाहियों की पहचान को गोपनीय रखा जाता है।’-बबलू कुमार, एसएसपी

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