April 13, 2021
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साल बीता लेकिन ‘जख्म’ अभी हरे

  • एक बरस पहले आज ही लगा था स्मारकों पर ताला, कोरोनाकाल ने बर्बाद की टूरिज्म इंडस्ट्री
  • टीटीजेड के गठन के बाद पर्यटन से लाखों लोगों को मिलता रोजगार, पटरी पर नहीं लौटा उद्योग

पिछले साल वो आज का ही दिन था, जब ताजमहल सहित देश के सभी स्मारकों में ताला डाल दिया गया था। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। ताजमहल, फतेहपुरसीकरी, सिकंदरा सहित तमाम स्मारक लगभग छह से आठ महीने तक बंद रहे। इस दौरान पर्यटन उद्योग की कमर ही टूट गई। टूरिज्म ट्रेड से जुड़े तमाम लोगों का जीवन अभी तक पटरी पर नहीं आ सका है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था कि ताजमहल की धवलता को बचाया जाए। तमाम इंडस्ट्री बंद हो गईं और कइयों ने बिजली आधारित काम शुरू कर दिया। प्रदूषण रहित उद्योगों में अव्वल नंबर पर है शहर की टूरिज्म इंडस्ट्री। ताजमहल और फतेहपुरसीकरी के आसपास रहने वाले लाखों लोग इस इंडस्ट्री सीधे या फिर किसी न किसी रूप में जुड़े हैं।

कोरोनाकाल ने इस उद्योग को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाया है। विदेशी टूरिस्ट अन्य देशों की यात्रा करने से कतरा रहे हैं। भारत में तो अभी तक विदेशियों का आमद शुरू नहीं हुई है। टूरिस्ट वीजा भी नहीं दिए जा रहे। विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने बड़ी संख्या में आते थे लेकिन एक साल में हालात विपरीत हो गए हैं। छह महीने से अधिक समय से ताजमहल बंद रहा था। इस कारण लोगों को अपना घर चलाना मुश्किल हो गया था। उम्मीद है कि फिर से इंडस्ट्री को पंख लगेंगे और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को रोजगार मिलेगा।

राकेश चौहान, अध्यक्ष (होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन)

विदेशी टूरिस्ट जब तक ताजनगरी नहीं आएगा, पर्यटन उद्योग पटरी पर नहीं आ सकेगा। इंटरनेशनल फ्लाइट्स और टूरिस्ट वीजा पर लगी रोक हटनी चाहिए। घरेलू पर्यटकों की आमद तो बढ़ी है लेकिन अंतरराष्ट्रीय ग्रुप आने से ही कुछ बात बनेगी।

संजीव टंडन,
जीएम (कोर्टयार्ड बाय मैरिएट)

पर्यटन से सीधे तौर पर होटल इंडस्ट्री जुड़ी है। कोरोनाकाल से पूर्व काफी संख्या में विदेशी टूरिस्ट आते थे। होटलों का संचालन अच्छी तरह से हो रहा था लेकिन छह से आठ महीने की बंदी ने काफी नुकसान पहुंचाया। अब फिर से इंडस्ट्री कुछ पटरी पर आ रही है लेकिन अभी काफी समय लगेगा।

रचना गौतम, टूरिस्ट गाइड

कोरोना ने टूरिज्म इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है। जब पर्यटक ही नहीं आएंगे तो टूरिस्ट गाइड क्या काम करेंगे। पिछले साल फरवरी तक विदेशी पर्यटकों का फ्लो अच्छा था। कई ग्रुप भी आ रहे थे। मार्च के पहले सप्ताह से ही आमद कम हो गई थी। अब तो एक साल बीत गया है। तमाम गाइडों ने अन्य काम शुरू कर लिए हैं।

संदीप अरोड़ा, होटल व्यवसायी

घरेलू पर्यटकों की संख्या पिछले डेढ़ महीने में कुछ बढ़ी है लेकिन अभी भी पहले जैसी बात नहीं है। ताजनगरी में टूरिज्म ट्रेड से लाखों लोग जुड़े हैं। हजारों घरों का चूल्हा जलता है। यह इंडस्ट्री तो पूरी तरह से वेंटीलेटर पर आ गई है। सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने ही होंगे।

मनोज शर्मा, पर्यटन विशेषज्ञ

पर्यटन और ताजमहल, सीधे एक-दूसरे से जुड़े हैं। भारत आना वाला हर विदेशी पर्यटक ताजमहल जरूर आता है। विदेशों में ताजमहल घूमने जाना गर्व की बात है। कोरोनाकाल ने इंडस्ट्री को गहरे जख्म दिए हैं। इन्हें भरने में अभी काफी समय लगेगा। देशी पर्यटकों की संख्या तो कुछ बढ़ी है।

बनने के बाद पहली बार 188 दिन बंद रहा ताजमहल
आगरा।
कोरोनाकाल में ताजमहल 188 दिन बंद रहा। निर्माण के 373 बरसों में यह पहला बार था, जब ताज के दरवाजे इतने दिन तक बंद रहे। दस्तावेज बताते हैं कि ताजमहल का निर्माण 1632 से 1648 के बीच हुआ था। अभी तक ताज केवल तीन बार सैलानियों के लिए बंद किया गया। सबसे पहले 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पहली बार ताला डाला गया था। जानकार बताते हैं कि इसे पूरी तरह पेड़ों की टहनियों से ढक दिया गया था। युद्ध चार से 16 दिसंबर तक चला था। इसके बाद ताज की सफाई में दो दिन लगे। पर्यटकों के लिए इसके दरवाजे 18 दिसंबर को खोले गए। दूसरी बार साल 1978 में आई बाढ़ के दौरान। जानकारों के अनुसार यमुना में सितंबर के महीने बाढ़ का पानी ताजमहल परिसर में चमेली फर्श के नीचे तक आ गया था। ताजमहल के मुख्य गुंबद पर बाढ़ का नजारा देखने के लिए भीड़ उमड़ रही थी तो सुरक्षा के लिहाज से इसे बंद किया गया। हाल में तीसरी बार कोरोनाकाल में पिछले साल 17 मार्च से 20 सितंबर तक ताज बंद रहा।

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